मेरठ सेंट्रल मार्केट: व्यापारियों ने तलाशी उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिले तो बनें बात
Meerut News - शास्त्रीनगर में अवैध कॉम्पलेक्स ध्वस्त होने के बाद व्यापारियों और क्षेत्रवासियों में खलबली मची है। 44 भवनों पर सील लगाई गई है और 851 भवनों को नोटिस जारी किया गया है। व्यापारी और महिलाएं मकानों को बचाने के लिए धरना दे रहे हैं। यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड रेगुलेशन 1982 का उल्लेख करते हुए राहत की मांग की जा रही है।

सेंट्रल मार्केट शास्त्रीनगर में अवैध कॉम्पलेक्स ध्वस्त होने, उसके बाद अब पूरी तरह व्यवासिक 44 भवनों पर सील लगने एवं 851 भवनों को आवास विकास परिषद की ओर से जारी होने वाले नोटिसों को लेकर व्यापारियों-क्षेत्रवासियों में मकानों-भवनों में होने वाली संभावित तोड़फोड़ को लेकर खलबली मची है। मकान बचाने को महिलाएं, व्यापारी धरने पर है। ऐसे में तमाम स्तरों पर व्यापारियों एवं क्षेत्रवासियों को सेटबैक मामले में राहत देने की मांग उठ रही और तमाम नियम-कानून खंगाले जा रहे है। आवास विकास परिषद के अफसर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अन्य कोशिशों के बजाए सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने में जुटे है।
ऐसे में व्यापारियों के साथ ही मेरठ से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के अधिवक्ता ऐसे नियम-कानून को खंगालने और कोई तथ्य जुटाने में लगे है, जिसके जरिए सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों एवं क्षेत्रवासियों को सेटबैक छोड़ने के मामले मे राहत मिले एवं भवनों में तोड़फोड़ से बच सके। पिछले दिनों आगरा से आए हेमंत सिंह ने तो एक उम्मीद जगाई ही थी, लेकिन गुरुवार को संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने भी एक आदेश की कॉपी जुटाई है। जो यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड रेगुलेशन 1982 की है। व्यापारी उम्मीद कर रहे है कि आवास विकास की नियमावली को शामिल करते हुए नई रिपोर्ट तैयार कर आवास विकास अफसर सुप्रीम कोर्ट में पेश करें तो राहत मिल सकती है।संयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री सरदार दलजीत सिंह का कहना है कि यह प्रति संगठन के पूर्व मंत्री बाबूलाल गुप्ता के पास रिकॉर्ड में थी, जो उनके निधन से पूर्व संयुक्त व्यापार संघ को दस्तावेजों में मिली थी। व्यापारियों से संबंधित दस्तावेजों को खंगाला तो उनके हाथ यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड रेगुलेशन 1982 की वह प्रति लगी, जिसमें एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) के लिए गाइन लाइन बनाई थी। इस नियमावली के मुताबिक एलआईजी के लिए सेटबैक का कोई प्रावधान नहीं है।मेरठ के व्यापारियों का दावाव्यापारियों का दावा है कि शास्त्रीनगर 1978-80 के बीच बसना शुरू हुआ था। यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड रेगुलेशन 1982 में बना और लागू किया। इसमें 50 मीटर तक के एलआईजी श्रेणी के प्लाट-मकान पर सेटबैक की अनिवार्यता नहीं है। 50 मीटर से ऊपर वाले मकानों में 500 मीटर से अधिक के मकानों के लिए फ्रंट एवं रेयर सेटबैक का नियम है। साइड सेटबैक 250 मीटर से 500 मीटर तक एवं 500 मीटर से अधिक वाले मकानों के लिए तय किया हुआ है।आवास विकास अफसरों से मांगव्यापारियों की आवास विकास परिषद के अधिकारियों से मांग की है कि वह यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड रेगुलेशन 1982 के नियम का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट बनाए और उसे दाखिल करें। ताकि 50 मीटर तक के मकान वालों को सेटबैक मामले में राहत मिल सके।इसलिए भी मची है खलबली: आवास विकास की ओर से सील किये 44 पूरी तरह से कॉमर्शियल भवनों में ग्यारह ऐसे भी शामिल है, जिन्होंने भू-उपयोग परिवर्तन के लिए शमन शुल्क भी जमा किया हुआ है। करीब 40 से 50 व्यापारियों का आवास विकास में करीब 16 करोड़ रुपये जमा है। सिर्फ वहीं भवन सील करने से छोड़े गए, जहां पर व्यापारी परिवार के साथ रह रहे है।आवास विकास अफसर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करें हलपनामासंयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री सरदार दलजीत सिंह का कहना है कि आवास विकास अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट में गलत रिपोर्ट दाखिल की। यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड रेगुलेशन 1982 का उल्लेख कर रिपोर्ट दाखिल नहीं की, ताकि अपने अफसरों को बचाया जा सके। आवास विकास अफसर दुबारा से रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में दाखिल करें। मेन सेंट्रल मार्केट व्यापार संघ अघ्यक्ष जितेंद्र अग्रवाल का कहना है कि केंद्र-प्रदेश सरकार सेंट्रल मार्केट मामले में हस्तक्षेप कर उजड़ते व्यापार-व्यापारियों को बचाए। जनप्रतिनिधि अभी भी प्रयास करें एवं आवास विकास परिषद के अफसर तमाम पहलुओं को शामिल कर सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करें तो क्षेत्रवासियों को राहत मिल सकती है।
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लेखक के बारे में
Salim Ahmadशॉर्ट बायो: सलीम अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान मेरठ में उद्योग, व्यापार और कारोबार बीट कवर कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
सलीम अहमद मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान, मेरठ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में उद्योग, व्यापार और कारोबार पर केंद्रित खबरें करते हैं। उन्होंने प्रिंट एवं डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
कॅरियर का सफर
सलीम अहमद ने कॅरियर की शुरुआत 1996 में राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रमुख अखबार से की जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। इसके बाद 2000 से 2006 तक अमर उजाला के साथ जुड़े रहे। 2006 में हिन्दुस्तान से जुड़कर काम शुरू किया और वर्तमान में उद्योग, व्यापार और कारोबार क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
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बीए और मास कम्युनिकेशन में डिग्री हासिल की। सलीम कारोबार, उद्योग, व्यापार बीट पर कमांड होने के साथ बिजली, वन विभाग और अन्य जुड़े विषयों पर अच्छी पकड़ रखते हैं।
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