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पुलिस लाइन-थाने सुरक्षित नहीं, चार बाइक चोरी

जहां हर वक्त पुलिस रहती हो, वे स्थान भी अब महफूज नहीं रहे। पुलिस लाइन से दो सिपाहियों की बाइक चोरी हो गई। चार बाइक-स्कूटी के लॉक तोड़ने का प्रयास हुआ। मेडिकल कैंपस में थाने से महज सौ मीटर दूरी पर खड़ी बाइक को चोर दिनदहाड़े चुरा ले गए। शास्त्रीनगर सेक्टर-छह से भी एक बाइक चोरी हुई है।

सिपाही ओमकार फिलहाल पुलिस लाइन में तैनात है। सोमवार रात 10 बजे ड्यूटी से आकर उसने बाइक गणना ड्यूटी कार्यालय के बाहर खड़ी कर दी और अपने क्वार्टर पर चला गया। मंगलवार सुबह आया तो बाइक गायब मिली। यहां पर कई और बाइकें खड़ी हुई थीं। इससे पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। जांच-पड़ताल की तो पता चला कि चोरों ने चार बाइक और स्कूटी के भी लॉक तोड़ने का प्रयास किया। इन वाहनों के लॉक पर किसी वस्तु से चोट के निशान पाए गए। हालांकि चोर इसमें सफल नहीं हो पाए और एक ही बाइक ले जा सके। पुलिस लाइन में ही फैमिली क्वार्टर के पास खड़ी एक और सिपाही की बाइक चोरी हुई है। दोनों मामलों में सिविल लाइन थाने में तहरीर दी गई है। हालांकि एक बाइक चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस लाइन में बाइक चोरी तब हुई हैं, जब यहां मुख्य गेट पर सुरक्षा तैनात रहती है।

उधर, इंचौली के गांव खरदौनी निवासी माजिद मंगलवार को अपनी परिचित मरीज को देखने के लिए मेडिकल अस्पताल परिसर में आया था। वह थाने से मात्र सौ मीटर दूरी पर बाइक खड़ी करके मरीज देखने वार्ड में चला गया। दस मिनट बाद वापस आया तो बाइक गायब मिली। माजिद ने मेडिकल थाने में तहरीर दी है। शास्त्रीनगर सेक्टर-छह में भी घर के बाहर खड़ी एक बाइक चोरी हुई है। सभी मामलों में पीड़ितों ने संबंधित थानों में जाकर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने उन्हें वाहन बरामद करने का भरोसा दिया है।

वाहन चोरों का गिरोह सक्रिय

नौचंदी पुलिस ने तीन दिन पहले ही बाइक चोरों का गैंग पकड़ा है। इनसे चोरी की कई बाइकें बरामद हुई हैं। इससे साफ है कि शहर में वाहन चोरों का गैंग फिर से सक्रिय हो गया है। लगातार दुपहिया वाहन चोरी हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने भी एक दिन पहले ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो ऑन डिमांड मेरठ से लग्जरी गाड़ियां चुराता था।

सोतीगंज बड़ी मंडी

मेरठ के सोतीगंज बाजार को वाहन कटान की सबसे बड़ी मंडी कहा जाता है। यहां यह धंधा पिछले कई दशक से हो रहा है। शुरुआत में यहां इंश्योरेंस के वाहन काटे जाते थे। बाद में इसी की आड़ लेकर चोरी के वाहनों को काटा जाने लगा जो आज तक हो रहा है। यहां हर वाहन के खरीदने का रेट फिक्स है। चोरी की बाइक तीन से पांच हजार रुपये तक में खरीदी जाती है।

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