दशकों बाद मेरठ कैंट से छिना नंबर-2 की सीट का ताज

हिन्दुस्तान, मेरठ
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मेरठ जिले में विधानसभा सीटों के समीकरण बदल गए हैं। मेरठ कैंट सीट, जो दशकों से दूसरे स्थान पर थी, अब तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। किठौर ने 3,22,769 मतदाताओं के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है। मतदाताओं की संख्या में इस बदलाव से आगामी चुनावों में पार्टियों को रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।

दशकों बाद मेरठ कैंट से छिना नंबर-2 की सीट का ताज
मेरठ जिले में एसआईआर के बाद विधानसभा सीटों के समीकरण अब पूरी तरह बदल चुके हैं। दशकों से मतदाताओं की संख्या के लिहाज से दबदबा रखने वाली मेरठ कैंट सीट अब थोड़ा पिछड़ गई है। नए आंकड़ों के अनुसार, मेरठ कैंट से 'नंबर-2' का ताज छिन गया है और अब किठौर दूसरे स्थान पर आ गई है। मेरठ कैंट तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले मेरठ में मतदाताओं की संख्या के लिहाज से एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। दशकों से दूसरे सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान बनाए रखने वाली मेरठ कैंट सीट अब तीसरे स्थान पर खिसक गई है। मेरठ कैंट में अब मतदाताओं की कुल संख्या 3.16,239 रह गई है। वहीं, किठौर विधानसभा ने मतदाताओं की संख्या 3,22,769 के साथ दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। जिले में किठौर क्षेत्र में एसआईआर के बाद सबसे कम 47.410 मतदाताओं का नाम हटा है, जबकि मेरठ कैंट में सबसे अधिक 1,21,727 का नाम हटाया गया है। मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 1,18,280 नाम हटने के बाद भी मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक 3,91,738 है और जिले में पहला स्थान पर है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, मेरठ दक्षिण विधानसभा मतदाताओं की संख्या के मामले में पहले पायदान पर और मेरठ कैंट दूसरे पायदान पर हुआ करती थी। ​मेरठ कैंट सीट का दूसरे नंबर से खिसकना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि मतदाताओं की संख्या में आए इस बदलाव से आगामी चुनावों में पार्टियों को अपनी रणनीति और संसाधनों के बंटवारे पर दोबारा विचार करना होगा।

मतदान प्रतिशत अब वास्तविक दिखेगा

भले ही सर्विस क्लास के वोटर कम होने से संख्या कम हुई हो, लेकिन मेरठ कैंट में अब वास्तविक मतदान 70 प्रतिशत से अधिक दिखेगा। जनता का स्नेह पहले से अधिक मिलेगा।

-अमित अग्रवाल, विधायक, मेरठ कैंट।

एसआईआर में सभी ने सहयोग किया है। इसका नतीजा है कि इलाके में अधिकतर वोट बने हैं। कम वोट कटे हैं। किठौर क्षेत्र की जनता को बहुत-बहुत बधाई।

- शाहिद मंजूर, विधायक, किठौर।

Rakesh Priyadarshi

लेखक के बारे में

Rakesh Priyadarshi

शॉर्ट बायो :

राकेश प्रियदर्शी पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में सेना और कैंट बोर्ड बीट को देख रहे हैं।


परिचय एवं अनुभव

राकेश प्रियदर्शी मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में पश्चिम उत्तर प्रदेश, मेरठ में सेना और कैंट बोर्ड टीम की लीड करते हैं। 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया में कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


कॅरियर का सफर

राकेश प्रियदर्शी ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2000 में हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख अखबार से की जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2007 से 2008 तक दैनिक जागरण में डिजिटल के साथ काम किया। 2008 से हिन्दुस्तान में शुरुआत की। यहां उन्होंने सेना, कैंट बोर्ड की खबरों की विशेष कवरेज की।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

बीए (आनर्स) और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा होने के साथ पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला। लगातार सेना, कैंट बोर्ड और राजनीति, प्रशासनिक खबरों को कवर कर रहे हैं। राजनीति, प्रशासन, सेना और कैंट बोर्ड बीट पर अच्छी पकड़ है।


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सेना और कैंट बोर्ड के विषयों पर गहरी समझ है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है। इस लक्ष्य के साथ ही पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।


विशेषज्ञता

मेरठ समेत वेस्ट यूपी की राजनीति पर अच्छी समझ
प्रशासनिक गतिविधियों पर अच्छी पकड़
सेना और कैंट बोर्ड की गतिविधियों की एक्सप्लेनर रिपोर्टिंग।

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