बोले मेरठ : जब ट्रैक है तैयार तो किस बात का है इंतजार

Newswrap हिन्दुस्तान, मेरठ
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Meerut News - मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनकर तैयार है, लेकिन स्टेडियम लंबे समय से बंद है। खिलाड़ी भामाशाह पार्क में प्रैक्टिस कर रहे हैं और एशियन गेम्स की तैयारी कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने ट्रैक को जल्द खोलने की अपील की है ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें और देश के लिए मेडल ला सकें।

बोले मेरठ : जब ट्रैक है तैयार तो किस बात का है इंतजार

मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनकर तैयार है, जिसके निर्माण को लेकर स्टेडियम काफी लंबे समय से बंद है। इसके चलते खिलाड़ी लंबे समय से इधर-उधर प्रैक्टिस करके काम चला रहे हैं और पदक लाने की तैयारी में जुटे हैं। स्टेडियम बंद होने के कारण एथलेटिक्स खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इन खिलाड़ियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। भामाशाह पार्क के ग्राउंड में प्रैक्टिस कर रहे नेशनल और इंटरनेशनल एथलेटिक्स खिलाड़ी स्टेडियम में ट्रैक पर दौड़ने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि देश के लिए बेहतर कर सकें और मेडल लाएं।

हिन्दुस्तान बोले मेरठ द्वारा इन खिलाड़ियों से संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना। यह सभी स्टेडियम को जल्द खोले जाने और ट्रैक को जल्द से जल्द हैंडओवर चाहते हैं, ताकि अपने खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर सकें और देश के लिए मेडल ला सकें।मेरठ का खेल इतिहास हमेशा से गौरवशाली रहा है। इस शहर ने देश को अनगिनत खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराया है। लेकिन आज लंबे समय से बंद चल रहे कैलाश प्रकाश स्टेडियम को लेकर खिलाड़ियों की आंखों में एक सवाल है, जब वहां ट्रैक बनकर तैयार है, तो आखिर इंतजार किस बात का है? कैलाश प्रकाश स्टेडियम में बना सिंथेटिक ट्रैक अब पूरी तरह तैयार है। यह ट्रैक न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, बल्कि खिलाड़ियों के सपनों को नई रफ्तार देने की क्षमता भी रखता है। लेकिन विडंबना यह है कि इस ट्रैक के तैयार होने के बावजूद स्टेडियम लंबे समय से बंद पड़ा है। खिलाड़ियों और एथलेटिक्स संघ के अनुसार स्टेडियम में 3400 से ज्यादा खिलाड़ी रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 500 से अधिक एथलेटिक्स खिलाड़ी हैं, जिनके लिए ट्रैक सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि उनके सपनों की मंजिल तक पहुंचने का रास्ता है। आज ये खिलाड़ी शहर के अलग-अलग कोनों में, कभी सड़कों पर, तो कभी छोटे मैदानों में अभ्यास कर रहे हैं। इधर-उधर प्रैक्टिस करने वाले 100 से ज्यादा खिलाड़ी ऐसे हैं, जो नेशनल और इंटरनेशनल स्तर की तैयारी कर रहे हैं। उनके कदमों में देश के लिए मेडल जीतने का जुनून है, लेकिन सही सुविधाओं के अभाव में उनकी मेहनत अधूरी सी लगती है। उम्मीद है कि जल्द उनको स्टेडियम का ट्रैक मिल जाएगा और साथ ही एथलेटिक्स का अच्छा कोच भी ट्रेनिंग के लिए नियुक्त होगा।-----------------------------------------छह महीने के लिए बंद हुआ और पौने दो साल हो गएदेश के लिए मेडल जीतने की तैयारी कर रहे एथलेटिक्स खिलाड़ियों का कहना है कि एशियन गेम्स सिर पर हैं और स्टेडियम लंबे समय से बंद चल रहा है। कभी छह महीने के लिए बंद करने को कहा गया था, लेकिन आज पौने दो साल हो गए हैं। अगर प्रैक्टिस करने के लिए बेहतर जगह नहीं मिलेगी तो परफॉर्मेंस किस तरह अच्छी होगी। यहां नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ी मौजूद हैं, देश के लिए मेडल जीत चुके हैं, इसके बावजूद हमें एक अच्छा ट्रैक नहीं मिल पा रहा है। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में ट्रैक बनकर तैयार हो चुका है, उसे खिलाड़ियों के लिए खोला जाना चाहिए ताकि आने वाले खेलों में हम लोग बेहतर प्रदर्शन कर सकें। --------------------------------------प्रैक्टिस के लिए ट्रैक का इंतजार, कैसे होगा रास्ता पारखिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम बंद होने के बाद से हम लोग इधर-उधर मैदानों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। भामाशाह पार्क में प्रैक्टिस तो कर रहे हैं, लेकिन मैदान की हालत बहुत खराब है। कभी भी यहां से हटा दिए जाते हैं, मैदान में गड्ढे हो जाते हैं तो उनको भी खुद ही ठीक करना पड़ता है। स्टेडियम में एंट्री पूरी तरह बंद है, यहां मजबूरी में प्रैक्टिस करनी पड़ रही है। एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को सबसे पहले वार्मअप के लिए रनिंग जरूरी है, लेकिन दौड़ने के लिए अच्छी जगह ही नहीं है। ऊबड़-खाबड़ मैदान के रनिंग ट्रैक पर कई बार गिरने का खतरा रहता है और पैर भी मुड़ जाता है। जबकि खिलाड़ी के लिए स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है, जरा सी चोट पूरे भविष्य को दांव पर लगा देती है। अब ट्रैक की बहुत ज्यादा जरुरत है, जिसे जल्द खोला जाए। -------------------------------------------प्रैक्टिस के लिए अच्छा ग्राउंड और कोच जरुरीभामाशाह पार्क में प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ियों का कहना है कि ट्रैक नहीं होने के कारण लंबे समय से दिक्कतें झेल रहे हैं। प्रैक्टिस के लिए सही ग्राउंड नहीं हैं, किसी तरह काम चल रहा है। पूरे मेरठ में एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए कोई कोच नहीं है, जो सीनियर खिलाड़ियों को उनके मुकाम तक पहुंचा सके। यहां नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ी खुद के अनुभवों से एक दूसरे को आगे बढ़ा रहे हैं। हम चाहते हैं कि सरकार एक बेहतर एथलेटिक्स का कोच नियुक्त करे ताकि खिलाड़ियों सही दिशा मिले। क्योंकि खेलों में पदक के लिए आधार जरूरी है, वह मिलता है सही ट्रैक से और एक अच्छे कोच के द्वारा। जब तक आधार ही सही नहीं होगा तो मेडल के लिए उम्मीदें भी कम होती हैं। इसलिए अच्छे प्रदर्शन और मेडल के लिए ट्रैक के साथ ही अच्छा कोच होना जरूरी है। ----------------------------------------------------ना तो पानी की सुविधा है और ना ही शौचालयराष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर मेडल जीतने वाले खिलाड़ी जो भामाशाह पार्क में मजबूरन प्रैक्टिस कर रहे हैं, उनका कहना है कि यहां महिला एथलेटिक्स खिलाड़ी प्रैक्टिस करती हैं, ना तो शौचालय है और ना ही पानी की व्यवस्था। ऐसे में बुहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। गर्मी के चलते पानी भी जरूरी है, लेकिन उसकी व्यवस्था भी यहां नहीं है। अगर कैलाश प्रकाश स्टेडियम जल्द से जल्द तैयार हो जाए और खिलाड़ियों के लिए खुल जाए तो बहुत राहत मिलेगी। देखा जाए तो प्रैक्टिस के लिए एक अच्छी जगह कहीं नहीं है, जब तक स्टेडियम नहीं खुलेगा और ट्रैक चालू नहीं होगा तब तक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। लेकिन उम्मीद है, कि जल्द स्टेडियम का काम पूरा होगा और ट्रैक पर खिलाड़ी दौड़ने लगेंगे।--------------------------------------------------मेरठ को मिले कोच और बने हॉस्टलभामाशाह में प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ियों का कहना है कि मेरठ को एक एथलेटिक्स कोच की बहुत जरूरत है। साथ ही स्टेडियम में एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल का निर्माण हो, ताकि दूर-दराज से आने वाले खिलाड़ी अपनी प्रैक्टिस समय के साथ बेहतर तरीके से कर सकें। जिस तरह एक कोच जीतने के गुर सिखाता है उसी तरह हॉस्टल में खिलाड़ी रहकर बेहतर कर सकता है। क्योंकि कई बार खिलाड़ी केवल आने-जाने में ही थक जाता है। ऐसे में खिलाड़ी को थकान ना हो और वह सुबह शाम अच्छे से तैयारी कर सके। यहां खुले में रखा सामान भी खराब हो जाता है और चोरी होने का डर रहता है। ना सही मैदान है ना ही रहने के लिए हॉस्टल, ऐसे में सफर तो खिलाड़ियों को ही करना पड़ रहा है। ---------------------------------------एशियन गेम्स के लिए होने हैं सलेक्शन ट्रायलखिलाड़ियों का कहना है कि आगामी मई महीने में एशियन गेम्स के लिए सलेक्शन ट्रायल होने हैं। शॉटपुट, जेवलिन थ्रो, चक्का फेंक, वॉकिंग आदि खेलों के लिए 25 मई से ट्रायल होंगे, जो यहां क्वालिफाई करेगा वह एशियम गेम्स के लिए खेलेगा। क्योंकि पांच-छह महीने बाद एशियन गेम्स होने है, जिसके लिए प्रैक्टिस बहुत जरूरी है। स्टेडियम बंद होने के कारण फिलहाल हम भामाशाह पार्क के ग्राउंड में अभ्यास कर रहे हैं। यहां सीमित संसाधनों के बीच अपनी तैयारी जारी रखे हुए हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि पार्क का मैदान उस स्तर की सुविधा नहीं दे सकता, जो एक सिंथेटिक ट्रैक देता है। ‘अगर हमें समय पर ट्रैक मिल जाए, तो हम बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और देश के लिए मेडल ला सकते हैं,’ यह कहना है उन खिलाड़ियों का, जिनकी आंखों में उम्मीद और दिल में देशभक्ति भरी है।-----------------------------------------------------------समस्या- करीब पौने दो सालों से निर्माण कार्य के चलते स्टेडियम बंद है- सही मैदानों की कमी के कारण प्रैक्टिस बेहतर नहीं हो पाती है- मेरठ में एथलेटिक्स कोच की कमी खिलाड़ियों को खल रही है- ट्रैक बनकर तैयार है, लेकिन अभी भी खिलाड़ियों की एंट्री बंद है- एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल की बहुत कमी रहती हैसुझाव- निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए और स्टेडियम खोला जाए- स्टेडियम में बने सिंथेटिक ट्रैक को जल्द चालू किया जाना चाहिए- सरकार की तरफ से जल्द एथलेटिक्स कोच की नियुक्ति की जाए- खिलाड़ियों के भविष्य को देखते हुए जल्द ट्रैक को चालू किया जाए- एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल का निर्माण भी जल्द हो------------------------------------------हमारी भी सुनोअभी इस ट्रैक को जांचने के लिए कमेटी बनेगी, जिसके बाद वह जांच करेगी कि यह ट्रैक ठीक बना है या नहीं। इसके बाद हैंडओवर हो जाए तो हमारे जो एथलीट सफर कर रहे हैं उनको ट्रैक मिल जाएगा। सही तरीके से यह सिंथेटिक ट्रैक बरता भी जाना चाहिए, उस पर सीधे किसी को भी ना उतारा जाए। इसके लिए देखना होगा कि हर कोई ट्रैक पर ना जाए। क्योंकि इस ट्रैक को प्रोटेक्ट किया जाना चाहिए, ताकि ट्रैक लंबा चले। नियमों का सही से पालन किया जाए, खिलाड़ियों को भी बताया जाएगा कि इसको किस तरह से इस्तेमाल किया जाए। खेल विभाग इसको कितने दिनों में कंपनी से हैंडओवर ले लेगा यह देखना है, जल्द ट्रैक शुरू हो जाए और जो हमारे खिलाड़ियों का नुकसान हो रहा है वह ना हो। यह देखना भी जरूरी है कि यह ट्रैक सही बन रहा है या नही, आरएसओ इसको पर्सनल देख रहे हैं। - अनु कुमार, सचिव जिला एथलेटिक्स संघ व चेयरमैन उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स एसोसिशनहमारी भी सुनोएशियन गेम्स आ रहे हैं, उसके लिए खिलाड़ियों का सलेक्शन ट्रायल होना है, लेकिन कोई अच्छा ट्रैक नहीं है, स्टेडियम में ट्रैक तैयार हो गया है, लेकिन यह पता नहीं कब हैंडओवर होगा, साथ ही एक कोच की भी बहुत जरुरत है। - धर्मेंद्र कुमार, इंटरनेशनल खिलाड़ी, जेवलिन थ्रोखिलाड़ियों को एक अच्छे प्रदर्शन के लिए एक बेहतर ट्रैक की जरूरत होती है, जहां वह अच्छे से प्रैक्टिस कर सके, स्टेडियम बंद होने के कारण हमें यहां प्रैक्टिस करनी पड़ती है, जल्द ट्रैक चालू किया जाना चाहिए। - अनमोल, वर्ल्ड ग्रांट पिक्स गोल्ड मेडलिस्ट, पैरा एथलीटखिलाड़ी को अच्छा खेलने के लिए बहुत सारी चीजों की जरूरत होती है, जो इस वक्त हमारे पास नहीं है, स्टेडियम में ट्रैक को जल्द खिलाड़ियों के लिए खोला जाए, ताकि खिलाड़ी बेहतर तैयारी कर सके। - सत्यम सिंह, नेशनल एथलेटिक्स, गोल्ड मेडलिस्टयहां प्रैक्टिस करना मजबूरी है, अभी तक स्टेडियम बंद है, जल्द ही स्टेडियम में निर्माण कार्यों को पूरा किया जाए और खिलाड़ियों के लिए ट्रैक को खोला जाए, आने वाले समय में बड़े खेलों की तैयारी करनी है। - सना चौधरी, नेशनल मेडलिस्ट, डिस्कस थ्रोमेरठ में कोई एथलेटिक्स कोच नहीं है, जिसके कारण खिलाड़ियों को समस्याएं भी होती हैं, स्टेडियम चालू नहीं होने से खिलाड़ियों को दूसरे मैदानों में प्रैक्टिस करनी पड़ रही है, जल्द ट्रैक शुरू हो। - रोबिन, नेशनल मेडलिस्ट, कोच, डिस्कस थ्रोभामाशाह पार्क में मजबूरी में प्रैक्टिस करनी पड़ रही है, एशियन गेम्स भी आ रहे हैं ऐसे में सलेक्शन ट्रायल होने हैं, ऐसे में एक अच्छा रनिंग ट्रैक और सर्किल होना जरूरी है, जल्द स्टेडियम शुरू हो। - शिवानी, नेशनल मेडलिस्ट, डिस्कस थ्रोइस मैदान को कभी भी खाली करना पड़ जाता है, कोई कार्यक्रम होता है तो यहां भी प्रैक्टिस नहीं कर पाते, उधर स्टेडियम पहले से ही बंद पड़ा है, लंबा समय हो गया है, उसे जल्द खोला जाना चाहिए। - राहुल सिंह, डिस्कस थ्रो, नेशनल मेडलिस्टखिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो वह मेडल कैसे लाएगा, ट्रैक बन चुका है, जल्द ट्रैक को खिलाड़ियों के लिए चालू किया जाए, स्टेडियम में जाकर खिलाड़ी प्रैक्टिस करेंगे तो बेहतर रिजल्ट आएंगे। - लक्की धीमान, नेशनल खिलाड़ी, शॉटपुटसबसे बड़ी कमी सुविधाओं की है, यहां भामाशाह पार्क में ना तो पानी की व्यवस्था है और ना ही शौचालय है, एशियन गेम्स आने वाले हैं, जिसके लिए क्वालिफाईंग ट्रायल होने हैं, जल्द स्टेडियम का ट्रैक चालू हो। - फातिमा खातून, इंटरनेशनल खिलाड़ी, जेवलिन, डिस्कस थ्रो खिलाड़ियों की हिम्मत कई बार टूट जाती है जब उनको बेहतर सुविधाएं नहीं मिलती हैं, स्टेडियम में बहुत समय से निर्माण कार्य चल रहा है, जो बहुत लेट हो चुका है, जल्द निर्माण कार्य पूरा होना चाहिए। - शावेज बसीर, नेशनल खिलाड़ी, डिस्कस थ्रोकभी छह महीने के लिए स्टेडियम बंद किया गया था, लेकिन आज पौने दो साल हो गए हैं, अब तो जल्द से जल्द काम पूरा किया जाए और ट्रैक तैयार है तो उसको जल्द हैंडओवर किया जाए, खिलाड़ी काफी सफर कर रहे हैं। - प्रियांश, नेशनल खिलाड़ी, शॉटपुट डिस्कस थ्रोमेरठ में खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल होना बहुत जरूरी है, बहुत सारे खिलाड़ी दूर से आते हैं, उनको थकान होती है और फिर प्रैक्टिस भी बेहतर नहीं हो पाती, इसलिए हॉस्टल और पानी व अन्य सुविधाएं होनी चाहिएं। - आयुष वर्मा, इंटरनेशनल खिलाड़ी, शॉटपुटस्टेडियम को बंद हुए काफी समय हो गया है, खिलाड़ी इधर उधर प्रैक्टिस कर रहे हैं, जल्द ही स्टेडियम में निर्माण कार्य पूरा हो और खिलाड़ियों को ट्रैक मिल जाए, इससे खिलाड़ी अच्छी तैयारी कर सकेंगे। - किरण बालियान, एशियन कांस्य पदक विजेतासबसे बड़ी बात है कि यहां खिलाड़ियों के लिए प्रैक्टिस की जगह नहीं है, पूरे मेरठ में कोई एथलेटिक्स कोच भी नहीं है, आने वाले समय में कई बड़े गेम्स होने हैं, जिसके लिए ग्राउंड और कोच होना जरूरी है, ताकि खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सके। - हरदयाल राठी, नेशनल मेडलिस्ट, वॉकिंग---------------------------------------------------------पहले ट्रैक का निरीक्षण होगा, उसकी रिपोर्ट लगेगी और उसके बाद जाकर प्रक्रिया आगे बढ़गी, अभी कहा नहीं जा सकता कब तक चालू होगा, क्योंकि यह एक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा, जो हमारे हाथ में नहीं है। - आरएसओ, कैलाश प्रकाश स्टेडियम

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