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मेरठमेरठ में निर्माण, नोएडा में पैकिंग और हिमाचल का लेबल लगाकर सप्लाई

हिन्दुस्तान टीम,मेरठPublished By: Newswrap
Mon, 07 Jun 2021 04:00 AM
मेरठ में निर्माण, नोएडा में पैकिंग और हिमाचल का लेबल लगाकर सप्लाई

मेरठ। मुख्य संवाददाता

मुंबई पुलिस और ड्रग विभाग की टीम के साथ मेरठ व गाजियाबाद की ड्रग विभाग की टीम ने नकली दवाओं के प्रकरण में छापेमारी की है। खुलासा हुआ कि नकली दवाओं का निर्माण मेरठ की फर्म में कराया जाता था और इनकी पैकिंग नोएडा में कराई जाती थी। इन पर हिमाचल की एक कंपनी का लेबल लगाकर सप्लाई किया जा रहा था। हिमाचल सरकार से मांगी जानकारी में संबंधित फर्म की कोई सूचना नहीं मिली, जिसके बाद छापेमारी शुरू की गई है। इस मामले में कई अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। साथ ही नोएडा में भी कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे हुआ खुलासा

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुंबई की ड्रग विभाग की टीम और पुलिस ने मिलकर कुछ दवाओं की रैंडम सेंपलिंग कराई थी। इस दौरान हिमाचल प्रदेश की एक दवा कंपनी की दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल फेल हो गए। मुंबई पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश सरकार से संबंधित दवा कंपनी की जानकारी मांगी तो पता चला कि दी गई जगह पर इस तरह की कोई फर्म नहीं है। पुलिस ने दवा मंगवाने वाले संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की तो गाजियाबाद का कनेक्शन खुला। पता चला कि गाजियाबाद निवासी सुदीप ने दवा सप्लाई की थी। इसके बाद सुदीप को उठाया।

सुदीप से मेरठ का कनेक्शन सामने आया

सुदीप से पूछताछ की गई तो बताया कि वह खरखौदा धीरखेड़ा स्थित एबीएम लैब प्राइवेट लिमिटेड से यह माल तैयार कराता था। इसके बाद इसकी पैकिंग नोएडा में कराता था और इन पर हिमाचल की कंपनी की लेबल लगाकर सप्लाई कर रहा था। इसी सूचना पर एबीएम लैब पर छापा मारा गया और कंपनी के चेयरमैन संदीप को गिरफ्तार किया गया। हालांकि कंपनी से न तो संबंधित दवाओं का न तो कोई सैंपल मिला है और न ही पैकिंग का सामान।

संदीप और सुदीप के बीच हुआ लेनदेन

ड्रग इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि संदीप और सुदीप के बीच बैंक के माध्यम से कुछ रकम का लेनदेन किया गया है। ऐसे में साफ है कि कोई दवा तो बेची गई है। पूछताछ में खुलासा होगा कि क्या दिया गया है। वहीं दूसरी ओर जिस समयावधि में नकली दवाओं का निर्माण कर सप्लाई की गई, उस समय के दौरान कंपनी में क्या बनाया गया। संदीप जानकारी नहीं दे पाया है। ऐसे में मामला संदिग्ध है।

1965 से है लाइसेंस

ड्रग विभाग के रिकार्ड के अनुसार एबीएम फर्म का लाइसेंस 1965 से है। यानी 56 साल पुराना लाइसेंस है। पूर्व में कुछ समय के लिए फर्म बंद की गई थी, लेकिन वर्ष 2004 में दोबारा इसी नाम से फर्म का लाइसेंस लिया गया।

मेरठ पुलिस और ड्रग विभाग से जानकारी नहीं की साझा

मेरठ के ड्रग इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि मुंबई पुलिस या मुंबई की ड्रग विभाग की टीम ने कोई भी जानकारी केस से संबंधित साझा नहीं की है। न तो बनाई गई दवा और इंजेक्शन के फोटो दिए गए हैं और न ही सैंपल की लैब रिपोर्ट दी गई है। चूंकि मेरठ में दवा निर्माण का दावा किया गया है, इसलिए इस केस से जुड़ी जानकारी अब लिखापढ़ी में मांगी जाएगी।

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