मेरठ: 320 करोड़ की जीएसटी चोरी मामले में डीजीजीआई ने नोएडा से दो किये गिरफ्तार, जेल गए

मेरठ: 320 करोड़ की जीएसटी चोरी मामले में डीजीजीआई ने नोएडा से दो किये गिरफ्तार, जेल गए

संक्षेप:

Meerut News - मेरठ में जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय ने ऑनलाइन गेमिंग जीएसटी फ्रॉड का भंडाफोड़ किया है। आरोपियों ने 1200 करोड़ रुपये जीते लेकिन एक रुपये का भी टैक्स नहीं चुकाया। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। यह मामला काले धन को सफेद करने और ग्राहकों से ठगी से जुड़ा है।

Dec 11, 2025 11:14 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मेरठ
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मेरठ, प्रमुख संवाददाता जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) मेरठ जोन की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन गेमिंग जीएसटी फ्रॉड के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। डीजीजीआई टीम ने 320 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के आरोप में दो कंपनी मालिकों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने ऑनलाइन गेमिंग के जरिए करीब 1200 करोड़ रुपये जीते, लेकिन सरकार को एक रुपये का भी टैक्स नहीं चुकाया। गिरफ्तारी के बाद डीजीजीआई की टीम ने दोनों आरोपियों राजन और रवि सिंह को मेरठ में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दुर्गेश नंदिनी की अदालत में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता और भारी मात्रा में कर चोरी को देखते हुए दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

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शासकीय अधिवक्ता लक्ष्य कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि डीजीजीआई मेरठ जोन की टीम पिछले तीन महीनों से इन संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। टीम को इनपुट मिला था कि ऑनलाइन गेमिंग के जरिए भारी मात्रा में पैसों का लेनदेन हो रहा है, लेकिन टैक्स जमा नहीं किया जा रहा। पुख्ता सबूत मिलने के बाद टीम ने जाल बिछाया और दोनों मुख्य आरोपियों को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी राजन और फरीदाबाद निवासी रवि सिंह के रूप में हुई है। 1200 करोड़ जीते, पर टैक्स नहीं दिया जांच में सामने आया है कि यह खेल बहुत बड़े स्तर पर चल रहा था। आंकड़ों के मुताबिक राजन (दिल्ली) ने अपनी कंपनी के जरिए ऑनलाइन गेमिंग में करीब 442 करोड़ रुपये की रकम जीती। रवि सिंह (फरीदाबाद) ने और भी बड़ा खेल करते हुए 760 करोड़ रुपये जीते। कुल मिलाकर दोनों ने लगभग 1200 करोड़ रुपये की कमाई की। नियमानुसार, ऑनलाइन गेमिंग से हुई कमाई पर सरकार को जीएसटी देना अनिवार्य है। इस जीत की रकम पर करीब 320 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी बनती थी, जिसे आरोपियों ने जमा नहीं किया। काला धन सफेद करना और ग्राहकों से ठगी डीजीजीआई की प्रारंभिक जांच पड़ताल में यह मामला सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग जीएसटी फ्रॉड तक सीमित नहीं है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोप है कि दोनों कंपनी मालिक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के लिए कर रहे थे। वह अवैध स्रोतों से आए पैसों को गेमिंग की जीत के रूप में दिखा रहे थे। जांच में यह भी पता चला है कि इन लोगों ने गेम खेलने वाले ग्राहकों के खातों से अवैध तरीके से पैसे काटे। यानी सरकार के साथ-साथ आम जनता के साथ भी फर्जीवाड़ा किया गया। गेमिंग सेक्टर पर सख्ती हाल ही में भारत सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो और घुड़दौड़ पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने का फैसला किया था। इसके बाद से ही जीएसटी इंटेलिजेंस विंग सक्रिय है। मेरठ जोन की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि गेमिंग की आड़ में टैक्स चोरी करने वालों पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी और भी कड़ियां जुड़ सकती हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस सिंडिकेट में और भी लोग शामिल हैं और पैसों का ट्रेल कहां तक जाता है।