
बोले मेरठ : माधोनगर में सड़कें बदहाल, गलियों में गंदगी से बुरा हाल
Meerut News - मेरठ के माधो नगर में विकास के बावजूद समस्याएं बरकरार हैं। यहां सफाई व्यवस्था खराब है, नालियां चोक हैं और सड़कों की हालत भी दयनीय है। स्थानीय प्रतिनिधि की अनुपस्थिति से लोग अपनी समस्याएं बताने में असमर्थ हैं। लोग सफाई, नालियों की निकासी और सड़कें सुधारने की मांग कर रहे हैं।
मेरठ। शहर के पुराने इलाके जहां विकास तो हुआ, लेकिन समस्याएं आज भी बरकरार हैं। शहर के बीच मौजूद माधो नगर भी इन्हीं इलाकों में से एक है। जहां सभी गलियों में इंटरलॉकिंग टाइल्स लगी हैं, लेकिन उनको बार-बार कोई ना कोई उखाड़ डालता है। कभी गैस लाइन वाले तो कभी सीवर लाइन वाले। जिससे पूरी सड़क बदहाल स्थिति में पहुंच जाती है। वहीं इन इलाकों में सफाई और निकासी की व्यवस्था एकदम ठप है। नालियों में गंदगी बहती रहती है, और सीवर लाइन चोक पड़े हुए हैं। ऊपर से कुत्ते और बंदरों का आतंक रहता है। जिनसे लोग काफी परेशान हैं और इन समस्याओं से छुटकारा चाहते हैं।
शहर के पुराने इलाकों में गिने जाने वाले माधो नगर की तस्वीर भले ही विकास की कहानी कहती हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। नगर निगम के 67 नंबर वार्ड में आने वाला यह इलाका, जहां 900 से अधिक मतदाता और लगभग 2000 से ज्यादा की आबादी निवास करती है, आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। सबसे बड़ी समस्या इस क्षेत्र में कोई प्रतिनिधि नहीं है। जिससे लोग अपनी समस्याएं बता सकें और समाधान भी जो जाए। वहीं इस इलाके में कभी गैस पाइपलाइन के नाम पर, तो कभी सीवर लाइन के काम के बहाने, गलियों में लगीं इंटरलॉकिंग टाइल्स को बार-बार उखाड़ दिया जाता है। काम पूरा होने के बाद सड़क को पहले जैसी स्थिति में नहीं लाया जाता, नतीजा ये होता है कि गलियां ऊबड़-खाबड़ हो गई हैं। वहीं इस इलाके में नालियों की निकासी एकदम ठप पड़ी हुई है। बरसात में यहां जलभराव होने के साथ ही घरों में भी पानी भर जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का निकलना दूभर हो जाता है। इस इलाके के लोगों से हिन्दुस्तान बोले मेरठ टीम ने संवाद किया और उनकी समस्याओं को जाना। जो इलाके में सफाई के साथ बेहतर निकासी चाहते हैं। गंदगी हो साफ तो राहत की मिले सांस माधो नगर के लोगों का कहना है कि यहां सफाई व्यवस्था की स्थिति बहुत चिंताजनक है। गलियों में सड़क किनारे गंदगी पड़ी रहती है कोई सफाई वाला नहीं आता है, जो उसे उठाकर ले जाए। उस कूड़े से बदबू आती रहती और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। नालियों से निकला कूड़ा भी बहुत दिनों तक पड़ा रहता है और वह धीरे-धीरे फिर नालियों में चला जाता है। अगर इलाके में सफाई व्यवस्था बेहतर हो जाए तो लोगों को राहत की सांस मिले। ऊपर से कुत्ते गलियों को गंदा कर देते हैं, ऐसे में पूरा इलाका गंदगी से जूझता रहता है। जब से इलाके में प्रतिनिधि नहीं है, तब से ज्यादा दिक्कतें आने लगी हैं, जल्द ही कोई पार्षद बने तो राहत मिले। चोक नालियां और सीवर लाइन हों दुरुस्त लोगों का कहना है कि क्षेत्र में नालियां गंदगी से अटी रहती हैं। कुछ जगह तो नाली ही खत्म हो गई है। नालियों में जमी गंदगी निकल नहीं पाती, जिससे बदबू और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। कई जगह सीवर लाइन चोक पड़ी है, ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़क पर आ जाता है। साथ ही लोगों के घरों की गंदगी नालियों में बहती है, जिससे बदबू फैलती है। नालियों की निकासी भी एकदम खराब है, हापुड़ रोड पर मुख्य नाले तक नालियों का गंदा पानी ही नहीं पहुंच पाता है। निकासी नहीं होने से कई बार नालियों का पानी ऊपर तक आ जाता है। वहीं बरसात हो जाए तो घुटनों तक पानी भर जाता है। इलाके में नालियों का निर्माण हो और उनकी निकासी को सुधारा जाए। बदहाल सड़कों का कैसे हो समाधान लोगों का कहना है कि माधो नगर की गलियों में कभी इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई गईं थीं। इससे लाोगों को कीचड़, गड्ढों और टूटी सड़कों से निजात मिली। लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा दिन टिक नहीं सकी। अब इलाके में कभी गैस पाइपलाइन के नाम पर तो कभी सीवर लाइन डालने के बहाने, इन टाइल्स को बार-बार उखाड़ दिया गया। गैस पाइप लाइन डालने वाले आते हैं और गड्ढा खोदने के बाद काम अधूरा छोड़कर निकल जाते हैं। जिससे इलाके में गलियां ऊबड़ खाबड़ हो गई हैं। हालत यह है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है, कई बार लोग गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। अगर कोई गली रास्ता खोदता है तो वह उसे पूरी तरह से ठीक करे। कुत्ते और बंदरों के आतंक से लोग परेशान इलाके में लोगों का कहना है कि पूरे क्षेत्र में बंदरों के झुंड लोगों को बहुत परेशान करते हैं। घरों से सामान उठाकर ले जाते हैं, अगर भगाओ तो घुड़की देते हैं और काटने के लिए आते हैं। लोग तो डर के मारे छतों पर भी नहीं जा पाते। घरों में जालियां लगवा ली हैं, ताकि बंदर घर के अंदर ना घुस पाए। वहीं सड़कों पर कुत्ते चैन नहीं लेने देते, जो किसी के भी पीछे दौड़ पड़ते हैं। रात में तो और भी ज्यादा डर लगता है, गलियों में कुत्ते काटने के लिए दौड़ते हैं। छतों के ऊपर बंदरों का आतंक रहता है और नीचे कुत्तों का। ऐसे में बच्चे बाहर जाने से भी डरते हैं और खेलने भी नहीं जाते। इन कुत्ते और बंदरों का नगर निगम कुछ करे। कौन सुने समस्या, प्रतिनिधि ही नहीं है इस इलाके में सबसे बड़ी समस्या प्रतिनिधि का नहीं होना है। करीब छह महीने पहले वार्ड के पार्षद का देहांत हो गया था, जिसके बाद से अभी तक यहां की बागडोर किसी के हाथ में नहीं है। ऐसे में लोगों का कहना है कि अब वे अपनी समस्याओं के लिए किसके पास जाएं, कोई सुनने वाला नहीं है। गंदगी की समस्या हो या फिर सड़क की, सीवर चोक हो या नालियों की दिक्कत, अब किससे कहें। प्रतिनिधि होता है तो अपनी समस्याएं रख दी जाती हैं, उस पर जोर देकर काम भी करा लिया जाता है। लेकिन जब कोई होगा ही नहीं तो अपनी व्यथा किसे सुनाएं। सीवर से लेकर नालियां तक खुद ही साफ कराते हैं। जल्द ही वार्ड में पार्षद चुना जाना चाहिए, ताकि समस्याओं के निदान को कह सकें। समस्या - गलियों में गंदगी की भरमार रहती है, कूड़ा नहीं उठता है - गैस पाइप लाइन के लिए खुदाई के बाद रास्ते खराब हो गए - नालियों में गंदगी अटी रहती है, सीवर लाइन चोक पड़ी हैं - छतों पर बंदर परेशान करते हैं और सड़कों पर कुत्ते काटते हैं - इस पूरे इलाके में पार्षद या कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं है सुझाव - गलियों में सफाई व्यवस्था सुधारी जाए, कूड़ा रोज उठे - गैस पाइप लाइन के लिए खोदे गए रास्ते ठीक किए जाएं - नालियों की रोज सफाई हो और सीवर लाइन भी साफ हो - बंदरों और कुत्तों को पकड़ा जाए, जंगलों में छोड़ा जाए - जल्द ही क्षेत्र में पार्षद या किसी प्रतिनिधि की नियुक्ति हो हमारी भी सुनो कोई कूड़ा उठाने नहीं आता है, गलियों में सफाई भी नहीं होती है, लोग खुद ही सफाई करते हैं, नाली साफ करते हैं। - रेखा गुप्ता नालियों की निकासी ठप पड़ी हुई है, आगे पानी ही नहीं जाता है, नालियां दुबारा बनाई जाएं और निकासी ठीक हो। - महेशचंद गुप्ता सीवर लाइन भी चोक पड़ी रहती हैं, लोग खुद ही अपने खर्चे से उनको साफ कराते हैं, कोई सुनने वाला ही नहीं है। - नितिन शर्मा नालियों की निकासी ठीक नहीं है, गंदगी नालियों में भरी पड़ी रहती है, सफाई भी नहीं होती है, लोग परेशान हैं। - नवनीत रघुवंशी नालियों की स्थिति ऐसी है कि बरसात हो जाए तो लोगों के घरों में पानी घुस जाता है, इनकी सफाई भी नहीं होती। - हरिओम शर्मा पूरे इलाके में गंदगी रहती है, सफाई नहीं होती है, जिससे लोगों को बहुत परेशानी होती है, संक्रमण का डर रहता है। - पुनित गुप्ता नालियों में गदंगी रहती है, पानी आगे नहीं जाता है, नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं, जिनको साफ किया जाना चाहिए। - बीना शर्मा पूरे इलाके में सफाई तो होती ही नहीं है, गंदगी पड़ी रहती है, जिसकी सफाई नहीं होती, कूड़ा उठाने वाला नहीं आता। - इंद्रा देवी नाली भरी पड़ी रहती हैं, जिनकी सफाई नहीं होती, कूड़ा भी उठाने वाला कोई नहीं आता है, लोग खुद ही सफाई करते हैं। - कमलेश रघुवंशी नालियों में लोगों के घरों की गंदगी बहती है, सीवर लाइन चोक पड़ी हुई है, जिसकी काफी समय से सफाई नहीं हुई। - शिल्पा श्रीवास्तव पूरे इलाके में बंदरों और कुत्तों की भरमार है, बंदर लोगों का सामान उठाकर ले जाते हैं, बहुत सारा नुकसान कर देते हैं। - अर्चना सिंह गैस पाइप लाइन डालने वालों ने सारी सड़कें खोद डाली हैं, ऊबड़ खाबड़ हो गई हैं, जिससे कई बार लोग गिर जाते हैं। - परवेज पूरी सड़कें खराब हुई पड़ी हैं, कुछ जगह तो गड्ढे हो गए हैं, गैस पाइप लाइन वाले गड्ढा खोद देते हैं, फिर सही नहीं करते। - हितेश गुप्ता दुकान से बंदर सामान उठाकर ले जाते हैं, अगर कोई आसपास ना बैठा हो तो बहुत ज्यादा नुकसान कर देते हैं। - कपिल गुप्ता

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