केवल सहायक के रूप में प्रयोग करें सूचना प्रौद्योगिकी

Newswrap हिन्दुस्तान, मेरठ
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कानूनी शोध में छात्रों को पुस्तकें मुख्य स्रोत के रूप में उपयोग करना चाहिए। प्रो.जॉर्ज इसहाक टोरस मैनरिक ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल सहायक उपकरण के रूप में काम कर सकती हैं। एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता में सुधार संभव है, लेकिन इसके लिए विधिक मापदंडों की आवश्यकता है।

केवल सहायक के रूप में प्रयोग करें सूचना प्रौद्योगिकी

कानूनी शोध में छात्रों को पुस्तकें मुख्य स्रोत के रूप में प्रयोग करनी चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी को मात्र सहायक रूप में ही प्रयोग करना होगा। यह कानूनी शोध का मुख्य स्रोत नहीं हो सकती। सूचना प्रौद्योगिकी के समकालीन विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल कानूनी अनुसंधान में सहायक उपकरण के रूप में ही किया जा सकता है। एआई द्वारा प्रस्तुत डेटा में पूर्वाग्रह होने की वजह से परिणाम गलत हो सकते है। सीसीएसयू कैंपस के विधि अध्ययन संस्थान में शिक्षा प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग के लाभ, हानियां और चुनौतियां विषय पर हुए व्याख्यान में यह बातें पेरू के चर्चित विधि विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता प्रो.जॉर्ज इसहाक टोरस मैनरिक ने कही।

प्रो.जार्ज ने कहा कि एआई से प्रशासनिक तंत्र की दक्षता में सुधार किया जा सकता है। प्रो.जार्ज ने एआई को शैक्षणिक दुनिया में फीडबैक प्राप्त करने का अच्छा साधन बताते हुए इसके बेहतर इस्तेमाल के लिए विधिक मापदंडों के निर्धारण की वकालत की। समन्वयक डॉ.विवेक कुमार ने वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया। आशीष कौशिक, डॉ. सुदेशना, डॉ.विकास कुमार, डॉ.अपेक्षा चौधरी, डॉ.धनपाल सिंह, डॉ.महिपाल सिंह, डॉ.सुनील शर्मा, डॉ.मीनाक्षी सहित सभी छात्र मौजूद रहे।

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