DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दुख बोओगे तो दुख ही काटोगे : प्रणम्य सागर

दुख बोओगे तो दुख ही काटोगे : प्रणम्य सागर

पर्यूषण पर्व के नौंवे दिन जैन मुनियों ने उत्तम अकिंचन धर्म की भावपूर्ण व्याख्या की। अर्हम योग प्रणेता जैनमुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज ने ऋषभ एकेडमी में प्रवचन में बताया कि प्रत्येक व्यक्ति हर समय ध्यान में लगा रहता है, जिस विषय में उसकी एकाग्रता है वही उसका ध्यान है। परंतु जैन दर्शन के अनुसार जो तत्वों से अनजान है, चित्त राग द्वेष से पीड़ित है और जिसकी प्रवृत्ति स्वतंत्र है वह ध्यान योग्य नहीं है। आत्मा की तृप्ति के लिए जो भीतर भरा हुआ है वह हटाने पर ही शुभ ध्यान होगा।

प्रणम्य सागर महारजा ने कहा कि दुख बोओगे तो दुख ही काटोगे। आज का मनुष्य यह नहीं सोचता कि हम देश के लिए उसकी उन्नति के लिए सुरक्षा के लिए कुछ करें अपितु अपने लिए भोग की सामग्री एकत्र करने में लगा रहता है। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को को आत्म शुद्धि व निरोगी शरीर के लिए अर्हम योग कराया और इस योग को भविष्य में अपनाये रखने का संदेश दिया। इस मौके पर रंजीत जैन, दिनेश जैन, मीडिया प्रभारी विनेश जैन, सुनील जैन, मृदुल जैन, संदीप जैन आदि का विशेष सहयोग रहा ।

दूसरी ओर शान्तिनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में सुबह श्रीजी का अभिषेक हुआ। शान्तिधारा एवं सौधर्म इन्द्र का सौभाग्य राकेश जैन, रचित जैन, श्रेयांस जैन, प्रिंस जैन को मिला। मध्य प्रदेश से आए पंडित अजित शास्त्री ने नित्य पूजन एवं नवग्रह विधान करवाया। जिसमे 130 अर्घ्य चढ़ाए गए। मुनि जिनांनद जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अकिंचन्य धर्म हमसे पूछ रहा है कि तुमने किसको अपना मान रखा है । ऐसा तो नहीं कि जो अपना है वो ही छूट रहा है और जो तुम्हारे साथ है वह असल में तुम्हारा है ही नहीं। आखिर इस जन्म से अगले जन्म के बीच हम कितने आत्मनिष्ठ हो पाए। जो हम व्यर्थ का बटोर रहे हैं, क्या वह तुम्हारी चिता के साथ जाएगा । नहीं ना तो फिर त्याग धर्म कहता है कि फिर क्यों जोड़ रखी है इतनी माया में और मेरे पन का भाव जब तक अंतरंग में रहेगा तब तक मैं आत्म स्वरूप को नहीं पहचान सकूंगा। जीवन में संन्यास आ जाए और उस संन्यास का भी अहंकार हो जाए तो मेरे भगवान महावीर कहते हैं कि ऐसा संन्यास तुम्हारे आत्म कल्याण में कभी सार्थक नहीं होगा। अकिंचन्य धर्म जीवन की सच्चाई का अहसास कराते हुए कहता है कि तुम सब कुछ पा लेते हो और सब कुछ पाने के अहंकार की चादर भी ओढ़ लेते हो, ऐसा व्यक्ति सब कुछ पाकर भी खाली हाथ ही रहता है। शाम को मंगल ज्योति एवं आरती हुई। पंडित अजित शास्त्री जी द्वारा तत्वचर्चा एवं प्रश्नमंच कराया गया। सोनिया जैन द्वारा ‘एक शाम शहीदों के नाम बच्चों सौम्या, सम्पदा, शिल्पी, तान्या, मुसकान द्वारा मंचन किया गया। विशिष्ठ धार्मिक तम्बोला (दशलक्षण धर्म पर आधरित) आभा शोभा एवं पूनम द्वारा करवाया गया। मुख्य अतिथी रविन्द्र भड़ाना, संजीव जैन सिक्का रहे। धार्मिक तम्बोला की प्रस्तुति का ढंग देखकर सभी ने उसे सराहा । श्रेयांस जैन, सुभाष, रमेश, अनिल, विपिन, मयंक, अतुल, जे.के.जैन, शशि जैन, श्वेता जैन, राकेश जैन (पी.एन.बी.) मनीष जैन , नवीन जैन, शालनी जैन, विपुल आदि का सहयोग रहा।

उधर, आनंदपुरी जैन मंदिर में चतुविशंति विधन में 222 अर्घ्य इंद्रों ने भक्तिभाव से चढ़ाए। विधानाचार्य स्वप्निल ने धर्म की व्याख्या की। प्रवक्ता सुनील जैन, प्रदीप, मनीष, रचित, अभिषेक, अचल, मौलिक, संजीव, गौरव, वैभव, राहुल आदि उपस्थित रहे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Jain muni pranamya sagar ne kaha dukh bowoge to dukh hi katoge