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कुधर्म को पूजने वाले का कभी कल्याण नहीं होगा : भाव भूषण महाराज

कुधर्म को पूजने वाले का कभी कल्याण नहीं होगा : भाव भूषण महाराज

श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया गया। बुधवार को शांतिधारा करने का सौभाग्य शांति देवी जैन को प्राप्त हुआ। विधान के 17वें दिन 115 परिवारों ने भाग लेकर पुण्य संचय किया।

विधानपाठ की शुरूआत भगवान शांतिनाथ के अभिषेक के साथ हुई। तदोपरांत मुनि श्री भाव भूषण महाराज ने धर्मसभा में कहा कि यह जीव अनादि काल से संसार रूपी समुंद्र में गोते खाता आ रहा है और खाता रहेगा। जब तक वह जिनेंद्र भगवान की वीतरागता को छोड़कर अन्यत्र कुगुरु, कुदेव और कुधर्म को पूजता रहेगा। जिससे हमारा अर्थात जीव का कदाचित भी कल्याण होने वाला नहीं है। कमलेश जैन शास्त्री ने बताया कि जिस प्रकार से सिद्ध भगवान ने अपने आठों कर्मों को नष्ट कर दिया है और मोक्ष रूपी लक्ष्मी को प्राप्त कर लिया है। उसी प्रकार से हमें उसी मार्ग पर चलना चाहिए और मोक्ष रूपी लक्ष्मी को प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। सांयकाल में भगवान की मंगल आरती की गई। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम में गुरुकुल के बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत कर मन मोह लिया। विधान में अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष सुनील जैन, सतेंद्र जैन, अजीत प्रसाद जैन, प्रद्युमन जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, अशोक कुमार जैन, उमेश जैन, मणिचंद जैन, अतुल जैन, कमल जैन, सुदर्शन जैन आदि का सहयोग रहा।

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