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23 नवंबर, 2020|3:17|IST

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गोपाष्टमी : भारतीय संस्कृति की जीवन प्राण हैं गाय

गोपाष्टमी : भारतीय संस्कृति की जीवन प्राण हैं गाय

मवाना। संवाददाता

हस्तिनापुर रोड स्थित श्री पिंजरापोल गोशाला में रविवार को कार्तिक शुक्ल अष्टमी गोपाष्टमी के रूप में मनाई गई। गोवंश का पूजन पंडित रोशनलाल ने संपन्न कराया।

गोशाला में आयोजित सादे समारोह में आए लोगों को जागरूक किया कि गाय भारतीय संस्कृति की जीवन प्राण हैं और संसार का सबसे पवित्र पशु है। इन्हें देवतुल्य माना जाता है। गाय के शरीर में सभी देवताओं का वास माना गया है। गाय के गोबर लिपी भूमि देव पूजा और यज्ञ के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। भगवान श्रीकृष्ण का गोविंद नाम इसलिए पड़ा क्योंकि उन्होंने गोपालन, गोसंरक्षण, गोसंवर्धन और गोसेवा के प्रति सभी लोगों को प्रेरित किया था। गोशाला में तीन दिन तक के लिए पर्याप्त चारा पहुंचाया गया। पालिका चेयरमैन मोहम्मद अय्यूब कालिया ने गोपूजन करते हुए गाय के माथे पर तिलक लगाया और पानी से धोकर चरण वंदना की। अधिशासी अधिकारी सुनील सिंह ने गायों के सिर में चुनरी बांधी और उन्हें सर्दी से बचाव के लिए गर्म झूल पहनाये। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इन्द्रजीत और डॉ.अतुल ने अतिथियों के साथ गोवंश को हरा चारा और गुड़ खिलाया। उसके पश्चात गोशाला में एक समारोह का आयोजन किया। इसमें अधिशासी अधिकारी ने जानकारी दी कि प्रदेश में सभी को गोवंश की रक्षा करनी चाहिए। उनके पालन-पोषण के लिए जागरूक और गंभीर होना जरुरी है। पशु चिकित्सा अधिकारी ने गाय के दूध और गोबर से मिलने वाले फायदे के बारे में बताया। बताया कि गोबर से बनी खाद खेती के लिए सर्वेत्तम मानी जाती है। पुराने समय में और कहीं-कहीं आज भी यदि गोवंश के गोबर से कच्ची जमीन को लीप दिया जाता है तो मिट्टी में उत्पन्न होने वाले कीटाणुओं का नाश हो जाता है। अध्यक्ष मोहम्मद अय्यूब ने प्रदेश सरकार द्वारा चलाई गई गो सेवा की इस मुहिम की सराहना की और कहा कि हम सभी को गोरक्षा करनी चाहिए जिससे लोगों में गोसेवा और गोरक्षा करने की भावना उत्पन्न हो। बताया कि गाय का दूध पौष्टिक, पाचक और बलवर्धक होता है। पालिका के सफाई निरीक्षक योगेश कुमार ने गोशाला की साफ-सफाई कराई। इस मौके पर हस्तिनापुर पिंजरा पोल गोशाला मवाना के उप सभापति मुकेश गुप्ता, गोशाला के अध्यक्ष फूलसिंह, जयप्रकाश गुप्ता, गोशाला कमेटी के मंत्री अशोक कुमार, सुनील गंगपुरी, अमरदीप, नामित सभासद सुभाष दीक्षित, सुधा चौहान, पालिका के सभी कर्मचारी आदि रहे।

भगवान श्रीकृष्ण के समय से हो रहा पूजन

ऐसा कहा गया है कि गोपाष्टमी पर्व भगवान श्रीकृष्ण के समय से ही मनाया जाता है। इंद्र के प्रकोप से ग्रामीणों और गायों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से अष्टमी तक गोवर्धन पर्वत को धारण किए रहे। अंत में इंद्र ने अपने अहंकार को त्यागकर भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की और कामधेनु नाम गाय ने भगवान श्रीकृष्ण का अपने दूध से अभिषेक किया। श्रीकृष्ण ने भी उस दिन कामधेनु गाय की स्तुति की और गायों की रक्षा एवं पालन करने की प्रतिज्ञा की। सभी ग्रामवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण की और सभी गायों की पूजा की। इस दिन को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा।

सपाइयों ने मुलायम सिंह का जन्म दिन मनाया

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मवाना। संवाददाता

पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि के आवास पर रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का 82वां जन्मदिन मनाया गया।

पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री देश की राजनीति के एक बेमिसाल धरोहर हैं। आज के समय में एक महान समाजवादी नेता के रूप में वे प्रख्यात हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री रहते हुए बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए। पूर्व मुख्यमंत्री का जन्मदिन पर केक काटा और लड्डू तथा फल का वितरण किया। इस मौके पर सपा कार्यकर्ता सुधीर कामिल, चौधरी नरेश पाल, मास्टर किशन पाल यादव, युवा नेता कम्बर ज़ैदी, बलजीत सिंह यादव, हारून कुरैशी, इकराम सैफी, आकाश, धीरू यादव, अरशद प्रधान, महमूद गजनवी, अजमल गाढ़ा, निर्मित यादव, गुड्डू यादव, अब्दुल वाहिद, तारा वाल्मीकि आदि रहे।

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  • Web Title:Gopashtami Cows are the life force of Indian culture