मेरठ: नदी-तालाब नहीं हस्तिनापुर में सड़क पर घूमता मगरमच्छ गांव की बस्ती में पहुंचा

Salim Ahmad हिन्दुस्तान, मेरठ
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Meerut News - हस्तिनापुर के चामरोद गांव में एक विशाल मगरमच्छ सड़क पर घूमता मिला, जिससे ग्रामीण भयभीत हो गए। वन विभाग और पुलिस ने मिलकर उसे रेस्क्यू किया और गंगा नदी में छोड़ा। मगरमच्छ की लंबाई 2.25 मीटर और वजन 150 किलोग्राम था। रेस्क्यू में करीब दो घंटे लगे, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

मेरठ: नदी-तालाब नहीं हस्तिनापुर में सड़क पर घूमता मगरमच्छ गांव की बस्ती में पहुंचा
हस्तिनापुर क्षेत्र के चामरोद गांव में शुक्रवार आधी रात बाद एक विशालकाय मगरमच्छ सड़क पर घूमता मिला। वह बस्ती तक आ पहुंचा। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अफसर, कर्माचारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्रीय वन अधिकारी खुशबू उपाध्याय के नेतृत्व में करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को रेस्क्यू कर गंगा नदी में छोड़ा गया। मगरमच्छ की लंबाई 2.25 मीटर एवं वजन 150 किलोग्राम था। सड़क पर घूमते हुए गांव की बस्ती तक पहुंचे मगरमच्छ को देकर ग्रामीण भयभीत हो गए। रात में भी लोग एकत्र होकर नजारा देखते रहे। मगरमच्छ इतना विशालकाय था कि वनकर्मियों को भी रेस्क्यू करने में लगभग डेढ़ से दो घंटे लगे। वन कर्मियों द्वारा उसका सफल रेस्क्यू कर गंगा में छोड़ा गया। इसके बाद ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। रेंजर खुशबू उपाध्याय ने बताया कि संभवत: आसपास की झील, तालाब आदि से निकाल कर यह मगरमच्छ बस्ती में घुस गया है। टीम में सेक्शन प्रभारी अंकित यादव, ऋषभ सिंह वन दरोगा, नितिन कुमार वन रक्षक, अतुल स्वामी वन रक्षक, नितिन त्यागी रहे। डीएफओ वंदना ने बताया कि मेरठ वन प्रभाग यह संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र एक-दूसरे जीव एवं पर्यावास पर निर्भर है। जैव-विविधता संरक्षण हेतु रेस्क्यू ऑपरेशंस, प्रजाति संवर्धन एवं शिकार पर रोकथाम करते हुए लगातार तत्पर है।

झाड़ियों में घुसकर गया ता मगरमच्छ:

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मगरमच्छ झाड़ियों के अंदर पूर्णतया छिप (कैमोफ्लेज) गया था, जिससे रेस्क्यू कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया। टीम द्वारा झाड़ियों की कटाई कर तथा रणनीतिक तरीके से घेराबंदी करते हुए उसे एक पशु आवास (घेर) की ओर नियंत्रित किया गया। मगरमच्छ पूर्णतः वयस्क एवं आक्रामक अवस्था में था, तथा पीछे से पकड़ने का कोई सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं था, इसलिए टीम को मौके की स्थिति देखते हुए सामने से ही अत्यंत सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन करना पड़ा। सामने से नियंत्रित कर पकड़ना पड़ा। ऐसे ऑपरेशन अत्यंत जोखिमपूर्ण होते हैं जिसमें मगरमच्छ को सामने से नियंत्रित कर पकड़ना पड़ता है, क्योंकि चौकन्ना और आक्रामक मगरमच्छ अचानक हमला करता है।

Salim Ahmad

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो: सलीम अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान मेरठ में उद्योग, व्यापार और कारोबार बीट कवर कर रहे हैं।

परिचय एवं अनुभव
सलीम अहमद मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान, मेरठ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में उद्योग, व्यापार और कारोबार पर केंद्रित खबरें करते हैं। उन्होंने प्रिंट एवं डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।

कॅरियर का सफर
सलीम अहमद ने कॅरियर की शुरुआत 1996 में राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रमुख अखबार से की जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। इसके बाद 2000 से 2006 तक अमर उजाला के साथ जुड़े रहे। 2006 में हिन्दुस्तान से जुड़कर काम शुरू किया और वर्तमान में उद्योग, व्यापार और कारोबार क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीए और मास कम्युनिकेशन में डिग्री हासिल की। सलीम कारोबार, उद्योग, व्यापार बीट पर कमांड होने के साथ बिजली, वन विभाग और अन्य जुड़े विषयों पर अच्छी पकड़ रखते हैं।

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विशेषज्ञता
उद्योग और कारोबार पर मजबूत पकड़ है। निर्यात और खेल उद्योग की खबरों में उन्हें महारत हासिल है।

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