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मेरठकविता पाठ से हुआ झरती ओस कहानी संग्रह का विमोचन

हिन्दुस्तान टीम,मेरठPublished By: Newswrap
Mon, 05 Apr 2021 03:23 AM
कविता पाठ से हुआ झरती ओस कहानी संग्रह का विमोचन

श्रीराम भवन लालकुर्ती मेरठ में डा. यशोधरा शर्मा की पुस्तक झरती ओस कहानी संग्रह का विमोचन संस्कार भारती की साहित्यिक इकाई स्वामी विवेकानंद के तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम से पूर्व हवन किया गया। पुस्तक का विमोचन डोली गुप्ता, डा. शंभू दत्त धीमान, लता बंसल, डॉ. जयभगवान सिंह, सुरेश छाबड़ा, डॉ. अरूणा पंवार, डॉ. रेखा गिरीश सहित सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया। चर्चित लेखिका डॉ. यशोधरा शर्मा ने अपनी कहानियों की अनूठी शृंखला झरती ओस पाठकों तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया है। उन्होंने अपनी कहानियों में दादा-दादी, नाना-नानी और मां द्वारा सुनाए जाने वाले किस्से-कहानियों के नैतिक मूल्यों के मनोरम दृश्य को पुन: आखों के सामने जीवंत कर दिया।

काव्य गोष्ठी की शुरुआत में मां शारदे की वंदना डा. सुदेश यादव दिव्य ने प्रस्तुत की। डॉ. शोभा रतूड़ी ने कहा, उनकी घनी अलकों की मनहर छटा, श्यामल मेघों की अद्भुत घटा। रचना वानिया ने सुनाया, सोना चांदी हीरे मोती हमारे किस काम के, हम तो दीवाने हैं बस तुम्हारे नाम के।

बीना मंगल ने सुनाया, हो जाती इस समाज में मेरी भी कभी ऊंची सोहरत, यदि कर लेता मैं भी उस बड़े आदमी की बेटी से शादी। डा. प्रज्ञा शर्मा ने सुनाया, बद से बदतर बात हो गई, आज उनसे मुलाकात हो गई। अकांक्षा यादव ने पर्यावरण की रक्षा के लिए जनमानस को जागृत करने का संदेश देते हुए कहा, आज अगर हम न संभले तो कल हमको फिर रोना होगा। सब कुछ बदला बदला होगा मौसम नहीं सलौना होगा। राज रानी ने सुनाया, भटकती फिर रही है क्यूं तुझे क्या जिंदगानी चाहिए। स्वाति भाटिया ने सुनाया, रुठ जाए अगर दोनों अभी...प्यारी मुस्कान से फिर मनाएगा कौन।

चित्रा त्यागी ने सुनाया, जमी हंस रही, आसमां रो रहा है, जमाने में ये क्या, सितम हो रहा है। रेखा गिरीश ने सुनाया, नहीं खिलाड़ी हों जब तक दो, कैसे खेला हो सकता है। कविता मधुर ने सुनाया, एक दुनिया दिलों की बसाया करो पास बैठो ज़रा गुनगुनाया करो।

डॉ. कशिश मुरादाबादी ने सुनाया, होली पर भर लाई खुशियां हाथों में रंग लिए, सुबह से ही मैं बैठ गई हूं, चंदन जैसी गंध लिए। स्वाति सिंह ने सुनाया, ज़िंदगी पुकारती है, आओ हम तुम भी मिलकर पुकारे। चित्रा मित्तल ने सुनाया, रंगों की सौगात लिए होली आई है। प्यार भरी कोई बात लिए होली आईं है। इनके अलावा ओमवती सिंह, नीलम सिंघल, स्वाति सिंह अलका गुप्ता 'भारती', अरुणा पंवार, नीलम मिश्रा तरंग, कोमल रस्तोगी, माला सिंह कविता कुसुमाकर, सर्वेश पुंडीर, ऊषा भिडवारिया सरगम, सीमा सिंह ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में जगदीश प्रसाद, मंगल सिंह मंगल, विजय प्रेमी, रामअवतार त्यागी, विनेश कौशिक, वीरेंद्र अबोध, सुनील शर्मा, गायत्री शर्मा, श्रीराम भट्ट व सुदेश दिव्य आदि कवियों ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम संचालन नीलम मिश्रा व कवि सुदेश दिव्य ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम संयोजन रचना वानिया ने किया।

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