मेरठ जिले में कम हो गए 5.06 लाख वोटर

Rakesh Priyadarshi हिन्दुस्तान, मेरठ
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मेरठ जिले में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हुआ है, जिसमें 5.06 लाख की कमी आई है। एसआईआर से पहले 26,99,820 वोटर थे, अब फाइनल वोटर 21,93,637 रह गए हैं। मेरठ दक्षिण में सबसे अधिक 3,91,738 वोटर हैं, जबकि मेरठ शहर में 2,55,238 वोटर रह गए हैं।

मेरठ जिले में कम हो गए 5.06 लाख वोटर

जिले में एसआईआर से पहले वोटर थे 26,99,820 आज फाइनल वोटर रह गए 21,93,637 वोटरवोटर लिस्ट का हुआ फाइनल प्रकाशन, डीएम ने जारी किया ब्योरामेरठ, मुख्य संवाददाताभारत निर्वाचन आयोग के निर्देश के तहत शुक्रवार को प्रशासन ने मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया है। इस बार की सूची में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद जिले में कुल मतदाताओं की संख्या में 5.06 लाख की भारी कमी आई है। जिले में जहां एसआईआर से पहले 26,99,820 वोटर थे। वहीं अब फाइनल वोटर 21,93,637 रह गए हैं।डीएम व जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से शुक्रवार को आधिकारिक आंकड़े जारी किये गये।

अब मेरठ जिले की मतदाताओं की कुल संख्या 21,93,637 हो गई है, जो चार नवंबर 2025 को एसआईआर प्रारंभ होने के समय 26,99,820 थी। इस तरह एसआईआर के बाद जिले में मतदाताओं की संख्या में 5.06,183 की कमी आई है।मेरठ दक्षिण में सबसे अधिक 3,91,738 वोटरमेरठ शहर विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 2,55,238 वोटरमेरठ जिले में मेरठ दक्षिण में अब सबसे अधिक 3,91,738 वोटर हो गए हैं, जबकि मेरठ शहर सीट में अब वोटर की कुल संख्या 2,55,238 रह गई है। हालांकि सबसे अधिक 1,21,727 वोटर मेरठ कैंट क्षेत्र में कम हुए हैं।

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शॉर्ट बायो :

राकेश प्रियदर्शी पिछले 25 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में सेना और कैंट बोर्ड बीट को देख रहे हैं।


परिचय एवं अनुभव

राकेश प्रियदर्शी मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में पश्चिम उत्तर प्रदेश, मेरठ में सेना और कैंट बोर्ड टीम की लीड करते हैं। 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया में कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


कॅरियर का सफर

राकेश प्रियदर्शी ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2000 में हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख अखबार से की जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2007 से 2008 तक दैनिक जागरण में डिजिटल के साथ काम किया। 2008 से हिन्दुस्तान में शुरुआत की। यहां उन्होंने सेना, कैंट बोर्ड की खबरों की विशेष कवरेज की।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

बीए (आनर्स) और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा होने के साथ पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला। लगातार सेना, कैंट बोर्ड और राजनीति, प्रशासनिक खबरों को कवर कर रहे हैं। राजनीति, प्रशासन, सेना और कैंट बोर्ड बीट पर अच्छी पकड़ है।


विजन

सेना और कैंट बोर्ड के विषयों पर गहरी समझ है। उनका मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है। इस लक्ष्य के साथ ही पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।


विशेषज्ञता

मेरठ समेत वेस्ट यूपी की राजनीति पर अच्छी समझ
प्रशासनिक गतिविधियों पर अच्छी पकड़
सेना और कैंट बोर्ड की गतिविधियों की एक्सप्लेनर रिपोर्टिंग।

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