यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल गन्ने की फसल पर भारी, लागत बढ़ी

हिन्दुस्तान, मेरठ
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भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के सर्वे में पता चला है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल को यूरिया के अधिक प्रयोग से नुकसान हो रहा है। किसान प्रति हेक्टेयर 10 से 12 हजार रुपये उर्वरकों पर खर्च करते हैं, जबकि 325 किलो यूरिया ही पर्याप्त है। वैज्ञानिकों ने संतुलित पोषण प्रबंधन की सलाह दी है।

यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल गन्ने की फसल पर भारी, लागत बढ़ी

भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम द्वारा वर्ष 2026 के लिए कराए सर्वे में सामने आया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल को यूरिया के अंधाधुंध प्रयोग से नुकसान हो रहा है। किसान जहां प्रति हेक्टेयर ₹10 से 12 हजार उर्वरकों पर खर्च करते हैं, वहीं कीट व रोग नियंत्रण पर ₹15 से 25 हजार तक खर्च कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार गन्ने में 325 किलो प्रति हेक्टेयर यूरिया पर्याप्त है, लेकिन अधिकांश किसान इसकी दोगुनी मात्रा का प्रयोग कर रहे हैं। इससे फसल में चोटी वेधक, पोखा बोइंग और लाल सड़न जैसे रोग बढ़ रहे हैं, जिससे दवाइयों का छिड़काव 4 से 6 बार तक करना पड़ रहा है।संस्थान

के वैज्ञानिक डॉ. चंद्रभानु ने बताया कि यूरिया का अत्यधिक प्रयोग फसल को कमजोर बनाता है और कीट-रोगों का खतरा बढ़ाता है। उन्होंने किसानों से संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने, साथ ही फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म तत्वों के संतुलित उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जैविक खाद, हरी खाद और बायोफर्टिलाइजर के इस्तेमाल से लागत कम की जा सकती है और उत्पादन बेहतर होगा। संस्थान “मेरा गांव, मेरा गौरव” अभियान के तहत किसानों को जागरूक भी करेगा।

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