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मेरठशर्मनाक : जिस दूसरे मरीज हाल बताते रहे डॉक्टर, उसकी भी हो चुकी थी मौत

हिन्दुस्तान टीम,मेरठPublished By: Newswrap
Mon, 10 May 2021 03:21 AM
शर्मनाक : जिस दूसरे मरीज हाल बताते रहे डॉक्टर, उसकी भी हो चुकी थी मौत

मेरठ। वरिष्ठ संवाददाता

एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित मरीज संतोष कुमार की मौत के मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दूसरी मरीज संतोष कपूर की मौत भी 27 अप्रैल को हो गई थी। बावजूद इसके कंट्रोल रूम का स्टाफ दोनों के जीवित होने की खबर देता रहा। पूरे मामले में जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट सोमवार को प्राचार्य को सौंप सकती है।

मूल रूप से बरेली की आशुतोष सिटी निवासी संतोष कुमार (64) एमईएस से रिटायर थे। 21 अप्रैल को वह मेरठ मेडिकल के कोविड वार्ड में भर्ती हुए। 23 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। कोविड वार्ड का कंट्रोल रूम उनकी बेटी व दामाद को उनके ठीक होने की खबर देता रहा। परिजनों को 15 दिन बाद पता चला कि संतोष कुमार नहीं रहे।

मेडिकल प्राचार्य डॉक्टर ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया, कोविड वार्ड में संतोष कपूर नामक महिला भर्ती थी। वह मेरठ की रहने वाली थीं। संतोष कुमार के परिजन जब भी कंट्रोल रूम को फोन करते तो वह सिर्फ संतोष नाम लेकर हाल-चाल पूछते थे। एक जैसे दो नाम होने की वजह से कंट्रोल रूम वाले संतोष कपूर का हाल संतोष कुमार के परिजनों को तीन मई तक बताते रहे। जबकि संतोष कुमार की मौत 23 अप्रैल और संतोष कपूर की मौत 27 अप्रैल को हो चुकी थी। इससे यह प्रतीत होता है कि संतोष नाम के दोनों मरीजों की मौत होने के बावजूद कंट्रोल रूम से उनके जिंदा होने का झूठ बोला जाता रहा।

आज मिल सकती है जांच रिपोर्ट

मेडिकल प्राचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रकरण में जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी से 24 घंटे में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। रविवार को अवकाश होने की वजह से जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाई। उम्मीद है कि सोमवार को यह रिपोर्ट उन्हें मिल जाएगी। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कई डॉक्टर कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

कोविड वार्ड की एसओपी में बदलाव

मेडिकल प्राचार्य ने बताया कि इस प्रकरण के सामने आने के बाद कोविड वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों की एसओपी में कुछ बदलाव किए गए हैं। प्रत्येक डॉक्टर अपने वार्ड के जवाबदेह होंगे। यदि किसी मरीज की मौत हो जाती है तो उसका शव मोर्चरी से दिया जाएगा। कोविड वार्ड से किसी परिजन को सीधे शव नहीं मिलेगा। कई और भी बदलाव किए गए हैं।

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