उलेमा की अपील : सड़क पर नमाज न खुले में कुर्बानी
Meerut News - ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने शांति बनाए रखने की अपील की। सार्वजनिक स्थानों पर नमाज न अदा करने और खुली जगह पर कुर्बानी न करने की सलाह दी। ईद 28 मई को मनाई जाएगी। कुर्बानी के अवशेषों का सही तरीके से निस्तारण करने और कानून व्यवस्था का पालन करने की आवश्यकता बताई गई।

ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं और उलेमा ने अमन-चैन बनाए रखने एवं शांतिपूर्वक आपसी भाईचारा सौहार्द्र कायम रखने की अपील की। कहा कि कोई भी व्यक्ति सड़कों या सार्वजनिक मार्गों पर नमाज अदा न करें और खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों की कुर्बानी करें। मुस्लिम धर्मगुरुओं और उलेमा ने बताया कि ईद-उल-अजहा 28 मई को मनाया जाएगा। विशेष नमाज केवल मस्जिदों, ईदगाहों या निर्धारित स्थानों पर ही अदा करें। यातायात बाधित न हो इसके लिए सड़कों पर नमाज पढ़ने से प्रदेश सरकार की सख्त मनाही है。
नमाज और कुर्बानी का स्थान
मौके पर सुबह विशेष नमाज होगी। तीन दिनों तक पशुओं की कुर्बानी का सिलसिला चलता है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अपील की है कि खुले में, सार्वजनिक स्थानों अथवा सड़क पर कुर्बानी न करें। सड़क पर नमाज अदा न करें। मस्जिद-ईदगाह में अंदर ही नमाज अदा करें। त्योहार के मौके पर ऐसा कोई काम न करें, ताकि किसी अन्य समुदाय की भावनाएं आहत हों।
कुर्बानी के नियम
वर्जन...
ईद-उल-अजहा के मौके पर ईदगाह-मस्जिदों में अंदर ही नमाज अदा करें। सड़क पर कतई नमाज अदा न करें। खुले में कुर्बानी न करें। कुर्बानी की वीडियोग्राफी या तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कतई न करें, कुर्बानी के अवशेषों (कचरे) को खुले में नहीं फेंके, इसका उचित तरीके से निस्तारण करें। नगर निगम की गाड़ी आए तो उसमे डाले। प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। कानून व्यवस्था में प्रशासन का सहयोग करें। - कारी शफीकुर्हमान कासमी
धार्मिक भावना का सम्मान
कुर्बानी के दिनों में हम खुले में कुर्बानी ना करें और हमेशा कोई ऐसा काम ना करें जिस से किसी भी व्यक्ति के जज़्बात को ठेस पहुंचे। ईद उल अजहा पर हम जो कुर्बानी करते हैं। वह अल्लाहतआला के आदेशों का पालन है और हज़रत इब्राहिम की सुन्नत है। ऐसे जानवर कि कुर्बानी जिससे हमारे प्यारे देश प्रेमी भाइयों की आस्था जुड़ी है, उसको बिलकुल न करें। हुकूमत की जानिब से जो हिदायत ईद उल अजहा की नमाज और कुर्बानी के लिए दी गई है। उसका पूरा ख्याल रखें। - मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी
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