
धोखाधड़ी से आवासीय प्लॉट को व्यावसायिक बताकर बेचा
Meerut News - आवास एवं विकास परिषद की योजना संख्या 7 के भूखंड पर मूल आवंटी वीर सिंह के वारिसों द्वारा दावा किए जाने पर व्यापारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें धोखे में रखकर आवासीय प्लॉट को व्यावसायिक बताकर बेचा गया था। यदि वारिसों ने अपना दावा नहीं छोड़ा, तो व्यापारी कानूनी कार्रवाई करेंगे।
आवास एवं विकास परिषद की योजना संख्या 7 के भूखंड संख्या 661/6 पर मूल आवंटी वीर सिंह के वारिसों द्वारा दावा किए जाने के बाद शुक्रवार को व्यापारियों ने भी प्रेस को जारी पत्र में अपना पक्ष रखा। इसमें व्यापारियों ने कहा कि मूल आवंटी ने व्यापारियों को धोखाधड़ी से आवासीय प्लॉट को व्यावसायिक बताकर बेचा था। आवंटी वीर सिंह द्वारा 1989 में 12 दुकानें बनाकर किराये पर दी गई थीं। व्यापारी दुकानों को किराये पर लेकर काबिज हो गए थे। इसके बाद 1994 से लेकर 2010 तक व्यापारियों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्यावसायिक बैनामे कराकर वीर सिंह से खरीद ली थी।
इसमें भी उन्हें धोखे में रखकर आवासीय भूखंड पर व्यवसायिक स्टांप शुल्क लेकर रजिस्ट्री कराई गई। इन दुकानों के पीछे भाग में कुछ भूमि रिक्त थी, जिसका मुख्तारनामा वीर सिंह द्वारा विनोद अरोड़ा को 2012 में कर दिया गया। विनोद अरोड़ा ने उक्त भूमि पर निर्माण कर बैनामे करके दुकान बेच दी। 1989 से 2025 तक सभी व्यापारी अपनी-अपनी दुकानों पर काबिज हैं और अपने-अपने बैनामे आवास एवं विकास परिषद कार्यालय में प्रस्तुत कर चुके हैं। व्यापारी किशोर वाधवा ने बताया कि नगर निगम कार्यालय में भी उक्त कॉम्पलेक्स व्यावसायिक में दर्ज है। मूल आवंटी के वारिसान द्वारा हम पर लगाया गया कब्जे का आरोप झूठा है। कॉम्पलेक्स सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ध्वस्त किया जा चुका है। मूल आवंटी के वारिस अमानत में खयानत की नीयत से इस तरह का दावा कर रहे हैं। अगर इन्होंने दावा नहीं छोड़ा तो व्यापारियों को मजबूरी में इनके खिलाफ वाद दायर कराना पड़ेगा। इस मौके पर रजत गोयल, राजीव गुप्ता, रजत अरोड़ा, हरेंद्र, राकेश मदान, मनदीप सिंह मौजूद रहे।

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