बालश्रम में खप रहा बचपन, जागरुकता बढ़े तो मिटे कलंक

हिन्दुस्तान, मेरठ
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सरकार और श्रम विभाग के प्रयासों के बावजूद, गरीब परिवारों के बच्चे स्कूल ना जाकर काम में लगे हैं। पिछले दो वर्षों में 518 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है। अटल आवासीय विद्यालय में श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिल रही है। बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है।

बालश्रम में खप रहा बचपन, जागरुकता बढ़े तो मिटे कलंक

सरकार एवं श्रम विभाग के साथ ही विभिन्न संस्थाओं, संगठनों का पूरा फोकस जिले को बालश्रम मुक्त बनाने का है लेकिन इसके बावजूद शहर ही नहीं बल्कि देहात में भी गरीब परिवारों के बच्चे-किशोर स्कूल जाने के बजाए विभिन्न उद्योगों एवं दुकानों पर औजार थामे नजर आते हैं। वह अपना बचपन कमाई के लिए कामकाज में खपा रहे हैं। शहर-कस्बों में चाय, वाहन रिपेयरिंग सेंटरों में बाल श्रमिक एवं किशोर आज भी नजर आ जाते हैं। कुछ बच्चे तो खतरनाक उद्योगों तक में हैं। दो वर्षों में बालश्रम से मुक्त कराए 518 बच्चे

बाल श्रम से मुक्ति

श्रम विभाग की ओर से चलाए गए अभियान के आंकड़ों को देखें तो दो सालों में बाल श्रम से कई बच्चों को मुक्त कराया गया। पिछले साल श्रम विभाग ने 58 बाल श्रमिक एवं 431 किशोरों को मुक्त कराया। वहीं 246 सेवायोजकों के खिलाफ बाल-किशोर श्रम मामलों में मुकदमा कराया। इस वर्ष अभी तक श्रम विभाग ने 23 निरीक्षण किये, जिनमें पांच बाल श्रमिक एवं 24 किशोर श्रमिकों को चिह्नित करते हुए मुक्त कराया गया।

अटल आवासीय विद्यालय एवं बाल श्रमिक विद्या योजना

बाल श्रम से मुक्त किए गए बच्चे बाल श्रमिक शिक्षा योजना के तहत जीवन संवार रहे हैं। अटल आवासीय विद्यालय एवं बाल श्रमिक योजना श्रमिकों के बच्चों के लिए संजीवनी बन गई। अटल आवासीय विद्यालय कोंदू सिंकदराबाद (बुलदशहर) में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों, कोविड-19 महामारी में अनाथ हुए बच्चों और निराश्रितों के मेधावी बच्चों (बालक-बालिकाओं) को मुफ्त उच्च गुणवत्ता वाली सीबीएसई पैट्रन पर शिक्षा प्रदान की जा रही है। छात्रों को मुफ्त शिक्षा, छात्रावास, पौष्टिक भोजन, किताबें और स्टेशनरी मुफ्त प्रदान की जाती है। चालू शैक्षिक सत्र के लिए कक्षा छह में 160 एवं कक्षा नौ में 65 बच्चों को प्रवेश मिला।

संयुक्त कार्रवाई

जनहित फाउंडेशन एवं जेआरएफ की संयुक्त कार्रवाई

2025 : 292 बच्चे मुक्त कराए

2026 : 318 बच्चे मुक्त कराए

बालश्रमिक विद्या योजना से जोड़े : 24 बच्चे

बालश्रमिक सेवा योजना से जोड़े : 38 बच्चे

पढ़ाई के लिए हर माह मिलती है बच्चों को धनराशि

बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत बाल श्रम में लिप्त बच्चों को मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा से जोड़ा जाता है। योजना के तहत पात्र लड़कों को प्रति माह एक हजार रुपये एवं बालिकाओं को प्रति माह 1,200 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में दी जाती है।

हितलाभ वितरण

आज लाभार्थी बच्चों को दिया जाएगा हितलाभ

सहायक श्रमायुक्त अवद्येश वर्मा एवं श्रम प्रवर्तन अधिकारी संदीप यादव ने बताया कि आज विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के मौके पर कार्यक्रम होंगे। इसमें बतौर मुख्य अतिथि जिला जज शिरकत करेंगे। जनहित फाउंडेशन की निदेशिका अनीता राणा ने बताया कि कार्यक्रम में बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को बालश्रमिक विद्या एवं बाल श्रमिक सेवा योजना के तहत हितलाभ दिया जाएगा। स्कूल जाने वाले बच्चों को बैग एवं पाठ्य सामग्री वितरित की जाएगी।

जागरुकता अभियान

इनका कहना

श्रम विभाग लगातार जागरुकता अभियान के जरिए बच्चों को बालश्रम में धकेलने के बजाए उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए अभिभावकों को प्रेरित कर रहा है। श्रम विभाग का अभियान जारी है। बाल श्रम उन्मूलन का दृढ़ संकल्प लेकर नए भविष्य का निर्माण करें। बच्चों को औजारों की जगह किताबें देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने हेतु प्रदेश सरकार निरंतर प्रयासरत है।

राजेश मिश्रा, उपश्रमायुक्त मेरठ-बागपत

जनहित फाउंडेशन एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरपी) दोनों संयुक्त रूप से कार्य करते हुए बालश्रम में फंसे बच्चों को श्रम विभाग के साथ मिलकर बालश्रम से मुक्त कराते हैं। बच्चों को शिक्षा से जोड़ते हैं। बच्चों के परिजनों की काउंसिलिंग करके सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाते हैं। दो सालों में 610 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया एवं 60 बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा।

अनीता राणा, निदेशिका जनहित फाउंडेशन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार ने कितने बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया?
सरकार ने पिछले दो वर्षों में 518 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया है।
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