बोले मेरठ : नम आंखों से बोले व्यापारी, कल्पना से परे है ये बर्बादी
Meerut News - - आवास विकास परिषद की कार्रवाई से सहमे दिखे व्यापारी - दिनभर दुकाने-शोरूम तोड़ते और

सेंट्रल मार्केट की हर गली में आज टूटते सपनों की आवाज गूंज रही है। यहां हर दुकान के पीछे एक परिवार है, हर काउंटर के पीछे एक संघर्ष की कहानी है। हर शटर के गिरने के साथ किसी का भविष्य अंधेरे में डूबता नजर आ रहा है। सेंट्रल मार्केट की चहल-पहल के बीच इन दिनों एक अजीब सी खामोशी और डर का माहौल पसरा है। हर दुकान, हर गली मानो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यहां दुकान मालिकों से लेकर काम करने वालों की आंखों में आंसू हैं, लेकिन दिल में अपने बच्चों के भविष्य की चिंता उससे भी ज्यादा गहरी है।
यही बाजार उनके जीवन का सहारा बना हुआ है। अब जब इस बाजार पर संकट मंडरा रहा है, तो उन्हें अपने बच्चों का भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सीलिंग की कार्रवाई के आदेश को लेकर हिन्दुस्तान बोले मेरठ टीम ने यहां व्यापारियों और काम करने वाले कर्मचारियों से संवाद किया। उनके दर्द को जाना, जो अब इस जद्दोजहद में हैं कि भविष्य में क्या हो होगा।अक्सर ग्राहकों से गुलजार रहने वाला सेंट्रल मार्केट आज वीरान सा हो गया है। जहां भीड़ तो है, दुकानदार भी हैं, साथ में पुलिस है, लेकिन रौनक नहीं है। हालात ऐसे हैं कि जिस मार्केट में दुकानदार सामान बेचते थे, ग्राहकों की भीड़ होती थी, आज उसी बाजार में यही दुकानदार अपनी दुकानों पर हथौड़ा चलवा रहे हैं। अब बाजार में ग्राहक नहीं बल्कि उस बाजार की हालत देखने वालों की भीड़ नजर आती है। पिछले एक माह के दौरान सेंट्रल मार्केट में करीब 200 व्यापारियों ने अपनी कॉमर्शियल गतिविधियां बंद करके उसे पुन: आवासीय रूप दे दिया। सेंट्रल मार्केट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद सीलिंग की कार्रवाई को लेकर यह सब हो रहा है। अब सभी व्यापारी सेंट्रल मार्केट में रात-दिन अपने सामान समेटने में लगे हैं। बाजार में पुलिस की बढ़ती गश्त के साथ ही व्यापारियों की धड़कनें भी बढ़ी हुई हैं। व्यापारियों का कहना है कि हम लोग इतना पैसा लगाकर भी मझदार में फंस गए हैं। पूरा बाजार बंजर हो गया है, जो पहले जगमग और रौनक से भरा रहता था, अब बेजार नजर आने लगा है। बस किसी तरह सीलिंग से पहले अपना सामान बचा रहे हैं। लाखों रुपये लगाकर दुकानें तैयार की थीं, अब सबकुछ खत्म सा हो गया है। सोच रहे थे किसी तरह बच जाएगी, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। हिन्दुस्तान बोले मेरठ टीम द्वारा संवाद के दौरान व्यापारियों का पीड़ा सामने आई। जो अब तक अपने व्यापार को बचाने की जुगत में थे, लेकिन अब दुकानों से सामान समेटने में लगे हुए हैं, ताकि सीलिंग की कार्रवाई से पहले उनका सामान बच जाए। व्यापारियों ने खाली की दुकानें-शोरूमसेंट्रल मार्केट में व्यापारी सीलिंग की कार्रवाई से पहले ही अपना सामान बाहर निकाल रहे हैं। जेसीबी से बड़े-बड़े अलमारी और लॉकर उठवाकर बाहर ले जा रहे हैं। सोमवार दोपहर बाद से ही दुकानों, शोरूम को खाली करते दुकानदारों की आंखें भर आईं। आंखों में आंसुओं के साथ मंगलवार को दुकानें, शोरूम खाली कर दिये। अस्पतालों के बोर्ड हटवाकर वहां डॉक्टर आवास लिखवा दिया गया। अन्य व्यापारियों ने भी अपनी दुकानों को आवास में बदलने की तैयारी तेज कर दी है। कई स्थानों पर दुकानों के शटर हटाकर उनकी जगह गेट लगाए जा रहे हैं और उन्हें मकान का रूप दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर बोर्ड लगाकर स्पष्ट रूप से ‘निवास’ भी लिखा जा रहा है।सेंट्रल मार्केट समेत आसपास के बाजार रहे बंदसेंट्रल मार्केट, नई सड़क समेत आसपास के तमाम बाजार मंगलवार को बंद रहे। गोल मंदिर तक दुकानें बंद थीं। बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। सेंट्रल मार्केट एवं आसपास के बाजारों के व्यापारिक संगठन पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लेकर ऐलान किया कि आगामी फैसले तक बाजार बंद रखे जाएंगे। वहीं सेंट्रल मार्केट के व्यापारी व्यापार-कारोबार उजड़ने को लेकर गम में डूबे हैं। 40 सालों से भी अधिक समय से जमे व्यापार के उड़जने को लेकर व्यापारियों के परिवारजनों का रो-रोककर बुरा हाल है। लोग एक-दूसरे के संभालते नजर आए। ...तो बस अब नाम भर रह जाएगा सेंट्रल मार्केटशहर के दिल कहे जाने वाला बेगमपुल हो अथवा आबूलेन मार्केट, उन्हें टक्कर देने वाले सेंट्रल मार्केट के भविष्य को लेकर व्यापारी ही नहीं बल्कि आम लोग भी आपस में चर्चाएं कर रहे है। व्यापारी कहते नजर आए कि अब तो सेंट्रल मार्केट का अस्तित्व खत्म ही हो जाएगा। बस सेंट्रल मार्केट नाम भर रह जाएगा। व्यापारी किशोर वाधवा ने कहा कि इस बाजार से अपनी अलग पहचान थी, जो खत्म होती जा रही है। सेंट्रल मार्केट में दुकानदार अलका मखीजा का कहना है कि 32 साल की मेहनत से खड़ी की गई दुकान आज खत्म होने के कगार पर है। अब हर वक्त अपनी दुकान की चिंता सताती रहती है। बना बनाया व्यापार खत्म होने पर है। ------------------------------------स्कूलस्कूलों पर भी लटकी तलवार, संचालकों की बढ़ी चिंता सेंट्रल मार्केट में होने वाली कार्रवाई को लेकर जहां संचालकों की चिंता बढ़ी है, वहीं अभिभावक भी अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान हैं। सबसे बड़ी चिंता बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने की है, जो परिजनों और स्कूल संचालकों के चेहरों पर साफ झलकती दिख रही थी। मंगलवार को तीन स्कूल बंद मिले, जहां बोर्ड भी हटा हुआ था। जो स्कूल अभी सीलिंग की चपेट में नही आए उनसे भी बोर्ड उतार लिए गए। बहरहाल सीलिंग की कार्रवाई के आदेश के बाद से स्कूलों में खलबली मची है। वहीं दूसरी ओर अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंचे तो स्कूल बंद के कारण वापस लौटना पड़ा। इस कार्रवाई से बच्चे व अभिभावक खुद को अधर में महसूस कर रहे हैं। अभिभावकों ने अपनी समस्याएं जाहिर कीं, बच्चों को दूर नही भेजना चाहते हैं और बजट के अनुसार इन स्कूलों में डाला था। निकल पड़े आंसू, चेहरे पर दिखी चिंता इस कार्रवाई को लेकर लिटिल फ्लावर स्कूल की प्रधानाचार्य पूजा खरबंदा भावुक हो गईं और स्कूल के बारे में बताते हुए उनके आंसू निकल आए। बताया कि जब वह शादी करके आई थीं, तब से इस स्कूल को देख रही हैं और आज ऐसा आदेश सुनकर मन भारी हो गया है। बच्चों की चिंता हो रही है, यहां करीब 100 बच्चे पढ़ते हैं। अब इनको शिफ्ट करने में परेशानी आएगी, क्योंकि दूसरी शाखा में कैसे बच्चे जाएंगे। उधर ऑल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कंवल जीत सिंह का कहना है कि अमेरिकन किड्स, हैप्पी आवर्स, मार्डन मास्टर्स, डीआरएस स्कूल में बेसिक शिक्षा कार्यालय से फोन आया था, कि स्कूल को बंद कर बच्चों को फिलहाल घर भेज दें। इसी क्रम में एमपीजीएस स्कूल में हाफ डे कर दिया गया।दो दिन बंद रहेंगे इस क्षेत्र के स्कूलसीलिंग की इस कार्रवाई को देखते हुए इस क्षेत्र में जो स्कूल चिह्नित किए गए हैं, वहां फिलहाल दो दिन का अवकाश कर दिया गया है। कंवलजीत सिंह ने बताया कि हम भी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। आरटीई के अनुसार स्कूल ज्यादा दूर नहीं होना चाहिए। ऐसे में अभिभावकों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है कि वह अपने छोटे बच्चों को दूर कैसे भेज पाएंगे। एमपीजीएस शास्त्रीनगर की प्रधानाचार्या सपना आहूजा का कहना है कि जिस भवन को चिह्नित किया गया है, वहां पर कोई कक्षाएं नहीं चलती हैं। एक से 12वीं तक की कक्षाएं नियमों के अनुसार बनाए गए भवन में ही चलती हैं। अभिभावकों से कहा कि वे तनाव में ना आएं। स्कूल में कक्षा एक से पांच तक की चलेगी।------------------------------------अस्पतालछह अस्पतालों से मरीज शिफ्ट, आवास के लगाए बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शास्त्रीनगर की योजना संख्या-7 में आवास विकास को जिन छह अस्पतालों पर सीलिंग की कार्रवाई करनी है, मंगलवार को उन अस्पतालों में से भर्ती मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। इसके साथ ही इन भूखंडों पर संचालकों के नाम के बोर्ड उतारकर आवास होने के बोर्ड लगा दिए हैं। वहीं सीएमओ की ओर से इन अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्रवाई भी की गई है। आलाधिकारियों का कहना है कि आवास विकास ने जिन 44 आवासीय क्षेत्र में कॉमर्शियल गतिविधि करने पर सीलिंग करने की जो सूची जारी की है, इनमें डॉ. तिवारी अल्ट्रासाउंड सेंटर, डॉ. अशोक गर्ग नर्सिंग होम, जनप्रिय नर्सिंग होम, सुधा हॉस्पिटल, वर्धमान हॉस्पिटल और सन फोर्ड हॉस्पिटल शामिल हैं।दिनभर शिफ्ट होते रहे मरीजइन अस्पतालों में 50 से ज्यादा मरीज भर्ती थे, और अन्य मरीज इलाज करने के लिए पहुंचे हुए थे। इन मरीजों से अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई के डर से इलाज करने, परामर्श देने और जांच करने से इनकार कर दिया। इन अस्पतालों के मरीजों को दिनभर एंबुलेंस से शिफ्ट करने का काम होता रहा। इनमें कई मरीज गंभीर थे, इनको क्रिटिकल केयर एंबुलेंस से मरीज के परिवार की इच्छा के अनुसार वाले अस्पतालों में पहुंचाया गया। लोगों को कहना है कि इन अस्पतालों के बंद होने से इनमें काम करने वाले सैकड़ों की संख्या में हेल्थ वर्कर बेरोजगार हो जाएंगे। इन अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ, टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, वार्ड आया, फार्मासिस्ट, फार्मेसी स्टाफ, लैब अटेंडेंट, साफ-सफाई कर्मचारी समेत अन्य शामिल हैं।शास्त्रीनगर में जिन अस्पतालों को सिलिंग के दायरे में रखा गया इन सभी छह अस्पतालों का लाइसेंस निरस्त कर दिए गए है। साथ ही इनमें भर्ती मरीजों को अन्य अस्पतालों शिफ्ट करा दिया गया है। इन अस्पतालों में डॉ. तिवारी अल्ट्रासाउंड सेंटर, डॉ. अशोक गर्ग नर्सिंग होम, जनप्रिय नर्सिंग होम, सुधा हॉस्पिटल, वर्धमान हॉस्पिटल और सन फोर्ड हॉस्पिटल शामिल है। - डॉ. अशोक कटारिया, सीएमओ---------------------------------------हमारी भी सुनोपूरे मार्केट का नाश हो गया है, शहर में जिस मार्केट का अच्छा खासा नाम था, अब वह खत्म हो गया है। कभी जंगल था और एक बड़ा मार्केट बना, लेकिन अब फिर उसी स्थिति में आ गया। - गीतिकाहमारी दुकान तो 24 मीटर वाली रोड पर है, फिर भी हमें राहत नहीं मिली है। बहुत सालों से दुकान करते-करते यह समय आ गया, राहत की उम्मीद थी लेकिन कुछ हुआ नहीं। - निशांत रावलबहुत साल इस बाजार में हो गए, कॉम्पलैक्स में हमारी दुकान गिरा दी गई तो इसके बाद चार माह पहले ही यहां दुकान किराए पर ली थी, अब यहां से भी जाना पड़ रहा है। - राजीव गुप्ताइस मार्केट में 1993 से हमारी दुकान है, लेकिन अब स्थिति यह आ गई है कि कुछ कर नहीं सकते, सारा जमा-जमाया काम खराब हो गया, बहुत सारे व्यापारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। - विभेश त्यागीपिछले 35 साल से दुकान है इस मार्केट में, लोगों का पूरा जीवन इस जगह गुजर गया, सभी को दुख भी है और परेशानी भी। अब जाएं तो कहां, बना बनाया व्यवसाय ही उजड़ रहा है। - अमृत लाल जुनेजा, व्यापारीबहुत सालों से यहां दुकान पर नौकरी कर रही थी, उससे घर का खर्चा चलता था, लेकिन अब बहुत सारे लोगों की नौकरी पर आ गई है, जिनके घरों के खर्चे यहां से चलते थे, सब परेशान हैं। - अंजलि, कर्मचारीपिछले 32 साल से दुकान कर रहे थे, अच्छा खासा मार्केट था लेकिन कोई नेता नहीं आया। एक करोड़ दस लाख रुपये भी दिए, लेकिन फिर भी राहत नहीं मिली, अब रोजी-रोटी पर बन आई है। - अलका मखीजा, दुकानदारपिछले 35 साल से दुकान है, किसी तरह तो यह काम शुरू किया था, परिवार में बच्चे हैं, उनका खर्चा अब कहां से चलेगा, पूरा जीवन इस बाजार में ही बीत गया, अब बीच मझदार में फंस गए हैं। - साधना शर्मा, दुकानदार-----------------------------------जो निर्देश मिले, उनके तहत सभी मरीजियों को शिफ्ट करा दिया है। कुछ रोगी मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराए हैं। 50 से ज्यादा अस्पताल स्टाफ के सामने रोजगार का संकट आ गया। - डॉ. सुभाष, निदेशक सनफोर्ड हॉस्पिटल गुरूद्वारा रोडस्कूलों को भी बंद करने का आदेश आ गया। प्राइमरी एवं कक्षा आठ तक के स्कूलों में क्षेत्र के आसपास के बच्चे पढ़ते है। ऐसे में यह बच्चे पढ़ने कहां जाएगे? शिक्षा प्रभावित होगी। ऐसे में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। - डॉ. देवेश शर्मा, शिक्षाविद्स्कूल में हाफ डे था, इसलिए छुट्टी कर दी। स्कूल, अस्पताल, बैंक, सेंट्रल मार्केट में बाजार को बंद नहीं करने चाहिए। सभी के हित के बारे में सोचें और फैसला लें। - आरोही, छात्रास्कूल में हाफ डे का कल शाम ही मैसेज आ गया था। जैसा सेंट्रल मार्केट के बारे में सुन रहे है कि अब यह खत्म हो जाएगा, ऐसा न हो, बल्कि सब कुछ बचे और चलता रहे। - दिव्यांशी, छात्रास्कूल बंद होने की सूचना से चिंता हो गई है। बच्चे घर के पास के स्कूल में आराम से पढ़ रहे हैं। ऐसे में तनाव बढ़ रहा है, साथ ही स्कूल भी बजट में था। - सुजाता चौधरीस्कूल सील होने पर चिंता का विषय बन गया है। ऐसे में समस्या तो होगी, क्योंकि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार बच्चे पढ़ाता है।- सुषमाबच्चे का प्रवेश अभी कराया था। ऐसे में समस्या तो आनी तय है। अब स्कूल बंद हो जाएगा तो आगे क्या करेंगे, कहां एडमिशन होगा। - रेशु --------------------------------------सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के लिए यह कठिन समय है। न्यायालय के साथ प्रदेश सरकार को व्यापारी हित में सोचते हुए निर्णय लेना चाहिए, ताकि व्यापार-व्यापारी बचा रहे। - अरुण वशिष्ठ, संरक्षक संयुक्त व्यापार संघसुप्रीम कोर्ट का आदेश है, लेकिन सरकार-प्रशासन को मिलकर कोई रास्ता निकालना चाहिए। संकट की घड़ी में सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान है, लेकिन व्यापार-व्यापारी उजड़ना नहीं चाहिए। - अजय गुप्ता, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघसुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते है, लेकिन कोर्ट के साथ ही प्रदेश सरकार मावनीय पहलू को देखते हुए कोई रास्ता निकाले। व्यापार-व्यापारी को उजड़ने से बचाएं। - नवीन गुप्ता, अध्यक्ष संयुक्त व्यापार संघआवास विकास के अधिकारी हठधर्मिता कर रहे हैं। दोषी अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं की। व्यापारियों को बर्बाद कर रहे हैं। व्यापारी दुकान बंद आत्महत्या करने को मजबूर है। - जितेंद्र अग्रवाल, अध्यक्ष, सेंट्रल मार्केट व्यापार संघसंयुक्त व्यापार संघ (निर्वाचित), मेरठ, हर परिस्थिति में शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ खड़ा है। व्यापारी समाज के हितों की रक्षा के लिए हम पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ संघर्ष करेंगे। - अपार मेहरा, मंत्री - संयुक्त व्यापार संघ (निर्वाचित), मेरठआवास विकास परिषद ने अपने अफसरों को बचाया और व्यापारियों पर ही कार्रवाई की जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने भी व्यापारियों से मुंह मोड़ लिया। व्यापारियों को बचाएं।- पवन ठेकेदार, अध्यक्ष जागृति विहार व्यापार संघसेंट्रल मार्केट के भविष्य को लेकर सभी चिंतित है और हालात बन रहे है कि कहीं यह नाम भर ही न रह जाए। कोर्ट के साथ ही सरकार विभिन्न पहलुओं को देखे और राहत दें। - मनोज गर्ग, अध्यक्ष तिरंगा चौक व्यापार संघ सेंट्रल मार्केटसेंट्रल मार्केट के मामले में जिस तरह से कोर्ट के अभी तक रुख दिखा है, ऐसे में किसी को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रहा है। व्यापार-व्यापारी उजड़ना नहीं चाहिए। - किशोर वाधवा, पूर्व अध्यक्ष सेंट्रल मार्केट व्यापार संघसेंट्रल मार्केट में सीलिंग के लिए 44 भवनों में अस्पताल, स्कूल भी शामिल कर लिये। अब बच्चों को पढ़ाने क्या कश्मीर भेजें? बीमारों को इलाज के लिए कहां लेकर जाएं। - सरदार जीतू सिंह नागपाल, जिलाध्यक्ष मेरठ व्यापार मंडलपुलिस-प्रशासन और आवास विकास परिषद के अधिकारी व्यापारियों पर दबाव बनाने, उन्हें डराने-धमकाने, कार्रवाई करने में जुटे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। - शैंकी वर्मा, महानगर अध्यक्ष मेरठ व्यापार मंडल
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