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विषय के हिसाब से हों ग्राफिक्‍स और एमिमेशन

विषय के हिसाब से हों ग्राफिक्‍स और एमिमेशन

ग्राफिक्स एवं एनिमेशन का प्रयोग विषय वस्तु के हिसाब से होना चाहिए। इससे राजनीतिक रिपोर्टिंग की प्रभावशीलता बढ़ती है। आज डिजिटल का दौर है। ऐसे में स्टूडेंट कंटेंट को डिजिटली प्रस्तुत करने पर विचार करें। देश में जैसे-जैसे इंटरनेट यूजर बढ़ेंगे, डिजिटल का दायरा भी विस्तृत होता जाएगा।

सीसीएसयू कैंपस के पत्रकारिता विभाग में डिजिटल पत्रकारिता पर जारी वर्कशॉप के दूसरे दिन यह बात डॉ.वंदना यादव ने कही। उन्होंने छात्र-छात्राओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वेब रिर्पोटिंग, राजनीतिक एवं खेल रिर्पोटिंग तथा फिल्म स्टोरी लेखन की जानकारी दी। डॉ.यादव ने कहा कि फिल्म स्टोरी लेखन अन्य विधाओं के लेखन से बिल्कुल अलग है इसमें लेखक की सृजनशीलता सामन्य लेखक की अपेक्षा अधिक होनी चाहिए। लेखक के दिमाग में फिल्म से संबंधित पात्र तथा उनके डायलॉग में विकल्पों का होना फिल्म लेखन के लिए जरुरी है। शब्द चयन एवं भाषा में सरलता एवं सुगमता होनी चाहिए। लेखक के पास अपने विचारों को शब्दों में ढालकर नाटकीय ढंग से प्रस्तुत करने की कला आनी चाहिए।

डॉ.यादव ने कहा कि राजनीतिक रिपोर्टिंग में किसी भी पार्टी विशेष अथवा विचार से प्रभावित नहीं होना चाहिए। कई बार चुनावों से पूर्व होने वाले सर्वे एवं ओपिनियन पोल को रिपोर्टर अपनी राय के साथ प्रस्तुत करते हैं, लेकिन डिजिटल पत्रकारिता में राजनीतिक रिर्पोटिंग करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जनता की राय को स्पष्टता के साथ रखें ना कि अपनी निजी राय को। रिपोर्टर का नवीनतम तकनीक से परिचित एवं प्रयोग की जानकारी होनी चाहिए। डॉ.यादव के अनुसार टेक्स्ट, वीडियो, ग्राफिक्स एवं एनीमेशन का मिश्रण ही मल्टीमीडिया है। किसका कितना, किस समय, किस स्थान तथा किसके लिए प्रयोग करना है। इसकी सामान्य जानकारी मल्टीमीडिया के प्रयोगकर्ता को होनी चाहिए। डॉ.वन्दना ने छात्रों को अपने ब्लॉग को बिजनेस के रूप में विकसित करने का तरीका बताया। वर्कशॉप में डॉ.प्रशांत कुमार, डॉ.मनोज श्रीवास्तव, डॉ.दीपिका आदि रहे।

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