गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए : जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी
अखिल भारतीय कौमी एकता एवं सद्भावना समिति ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। ईद-उल-अजहा के अवसर पर शरीयत और सरकारी गाइडलाइन का पालन करने की अपील की गई है। कुर्बानी के लिए पशुओं की खरीद के दौरान व्यापारियों का उत्पीड़न न हो, इसके लिए भी ज्ञापन दिया गया।

अखिल भारतीय कौमी एकता एवं सद्भावना समिति के अध्यक्ष जैनुर राशिद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। ईद-उल-अजहा के मौके पर शरीयत एवं सरकारी गाइड लाइन का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईदगाहों एवं मस्जिदों में ही नमाज अदा करें। सड़क पर नमाज बिल्कुल नहीं पढ़ें और कुर्बानी खुली जगह पर न करें। प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न करें। ऐसे कोई काम न करें, जिससे दूसरे मजहब के लोगों को किसी भी तरह से परेशानी हो।
कुर्बानी के लिए पशुओं की खरीद
वहीं, ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश यूथ विंग के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद इमरान कुरैश एडवोकेट ने डीएम को ज्ञापन दिया। मांग की है कि कुर्बानी के लिए पशुओं की खरीद होती है। जो व्यापारी, किसान पशुओं को बिक्री के लिए ला रहे हैं, उनका रास्ते में उत्पीड़न न हो। पुराना कमेले के पास पशु पैठ लगती है। वहां सुविधा दी जाए। जानवरों की देखभाल के लिए डॉक्टर की तैनाती की जाए।
हज मानव मूल्यों का प्रेरक और रक्षक
मेरठ। मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने कहा कि अल्लाह के नेक बंदे के लिए हज एक महान कर्तव्य है, जो अल्लाह ने इस्लामी दुनिया पर लागू किया है। इसकी अदायगी पवित्र नगरी मक्का की पाक सर जमीन पर की जाती है। इंसानियत से प्रेम करना एवं मानवता की सेवा करनी चाहिए। हज करने वाला व्यक्ति गुनाहों से पाक एवं साफ हो जाता है। हज करने के बाद अल्लाह से प्रेम करने वाला और अल्लाह के बंदों से प्रेम करने वाला बन जाता है। ईद उल अजहा की कुर्बानी हजरत इब्राहिम की सुन्नत है और इसका मतलब गरीब मजलूम की मदद अपनी-अपनी कुर्बानियों के जरिए से करना है।
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