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मेरठबुद्ध पूर्णिमा कल: कम होगी महामारी लेकिन आपदाओं का रहेगा डर

हिन्दुस्तान टीम,मेरठPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 03:41 AM
बुद्ध पूर्णिमा कल: कम होगी महामारी लेकिन आपदाओं का रहेगा डर

मेरठ। कार्यालय संवाददाता

हिंदू धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है। वैशाख माह में पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था, इसलिए इसे बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। 26 मई यानि कल यह त्योहार मनाया जाएगा। बुद्ध पूर्णिमा सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग में मनेगी और स्नान-दान की पूर्णिमा भी रहेगी। यह योग किसी शुभ कार्य को करने का शुभ व लाभदायी मुहूर्त होता है। इस दिन की गई पूजा और खरीदारी शुभ और समृद्धिदायी रहेगी।

चतुर्ग्रही योग: वृष राशि में रहेंगे बुध, सूर्य, शुक्र और राहु

इस दिन वृष राशि में चार ग्रह बुध, सूर्य, शुक्र और राहु की युति रहेगी। पाप ग्रह राहु को कूटनीति, राजनीति, धोखा और मानसिक रोग का भी कारक माना गया है। शुक्र और बुध भी वृषभ राशि में हैं। इन ग्रहों की युति के फलस्वरूप संक्रामक रोगों में कमी आएगी। कोरोना महामारी में जून के अंतिम सप्ताह तक कमी की उम्मीद है। हालांकि, प्राकृतिक प्रकोप, तूफान, वर्षा से बड़े नुकसान की आशंका है।

विष्णु भगवान के 9वें अवतार

ज्योतिषाचार्य भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के केंद्र समन्वयक आचार्य मनीष स्वामी कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों और पवित्र सरोवरों में स्नान के बाद दान-पुण्य करना पुण्यकारी होता है। भगवान बुद्ध का जन्म इसी दिन हुआ था। उन्हें विष्णु भगवान का नौवां अवतार माना जाता है। इस दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी है। यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा और समस्त भारत में नहीं दिखाई देगा।

मानसिक कष्टों से है मुक्ति

मान्यता है कि बुद्ध पूर्णिमा पर चंद्रमा पूर्णिमा पर पृथ्वी और जल तत्व को पूर्ण रूप से प्रभावित करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्रमा पूर्णिमा तिथि के स्वामी माने जाते हैं। हर तरह की मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है।

शुभ मुहूर्त:

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ

25 मई 2021 रात 8 बजकर 30 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समापन

26 मई 2021 शाम 4 बजकर 44 तक

वैशाख पूर्णिमा का महत्व

वैशाखी पूर्णिमा के दिन शक्कर और तिल दान करने से अनजान में हुए पापों का भी क्षय हो जाता है। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी से भरा हुआ पात्र, तिल और शक्कर स्थापित कर पूजन करना चाहिए। तिल के तेल का दीपक जलाएं।

-पितरों के निमित्त पवित्र नदियों में स्नान कर हाथ में तिल रखकर तर्पण करने से पितरों की तृप्त होते हैं।

-ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। ओम विष्णवे नम:, ओम नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात् का जाप भी करना चाहिए। श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र, श्री विष्णु की आरती लाभप्रद मानी जाती है।

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