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28 नवंबर, 2020|1:46|IST

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दिवाली से पहले दमघोंटू हवा, गैस चेंबर बना मेरठ

दिवाली से पहले दमघोंटू हवा, गैस चेंबर बना मेरठ

मेरठ। वरिष्ठ संवाददाता

दिवाली से 14 दिन पहले ही मेरठ की हवा दमघोंटू हो गई है। शुक्रवार की रात दो बजे से शनिवार सुबह दस बजे तक मेरठ प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने से गैस चैंबर में बदल गया। आठ घंटे तक मेरठ की हवा जहर बनी रही और प्रदूषण उच्चतम सीमा के खतरनाक स्तर को छूता रहा। पल्लवपुरम केंद्र सुबह के वक्त दो घंटे बंद रहने से प्रदूषण का स्तर फाइलों में सुधरा। गंगानगर, जयभीम नगर और पल्लवपुरम तीनों ही केंद्रों पर प्रदूषण के पांच सौ तक पहुंचने से चिंता बढ़ने लगी है। मेरठ की हवा स्वस्थ लोगों के लिए भी नुकसानदेह है।

एक्यूआई पहुंचा पांच सौ, खतरनाक है यह स्तर

वर्ष 2019 में 31 अक्तूबर को मेरठ का एक्यूआई 459 दर्ज हुआ था। यह 24 घंटे का औसत था जबकि शाम से रात तक इस दिन यह सूचकांक पांच सौ तक पहुंच गया था। प्रदूषण निगरानी केंद्रों पर मेरठ में यह मापन की अंतिम सीमा है। यानी इससे अधिक प्रदूषण की स्थिति में भी एक्यूआई 500 ही प्रदर्शित होगा। 2019 में यह स्थिति दिवाली के ठीक बाद की थी। लेकिन इस वर्ष शनिवार को प्रदूषण ने दिवाली से ठीक 14 दिन पहले ही हालात बेकाबू कर दिए। गंगानगर केंद्र पर शुक्रवार रात दो से शनिवार सुबह दस बजे तक पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर पांच सौ दर्ज हुआ। जयभीम नगर में भी इसी अवधि में पीएम-2.5 का स्तर पांच सौ और पीएम-10 भी 453 दर्ज हुआ।

पल्लवपुरम क्षेत्र में हालात बेकाबू

पल्लवपुरम केंद्र पर प्रदूषण के हालाब बेकाबू रहे। इस केंद्र पर शुक्रवार रात दो बजे से सुबह दस बजे तक पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर पांच सौ तक पहुंच गया। केंद्र पर प्रदूषण लगातार बढ़ता रहा। इसी बीच अप्रत्याशित ढंग से इस केंद्र पर दो से तीन घंटे के लिए निगरानी बंद हो गई। यानी सेंटर ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद जैसे ही सेंटर पुन: चालू हुआ तो पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर घटकर क्रमश: 421 एवं 431 पर पहुंच गया।

रात में फिर घुला हवा में जहर

रात में नौ बजे पूरे शहर की हवा फिर से जहरीली हो गई। गंगा नगर का एक्यूआई 389, जयभीम नगर पर 373 और पल्लवपुरम का 398 दर्ज हुआ। तीनों ही केंद्रों की हवा बेहद खराब स्तर पर थी, जबकि पल्लवपुरम में यह अत्यधिक खराब के स्तर के करीब पहुंच गई।

हवा रेड जोन में

शहर एक्यूआई

बागपत 364

बुलंदशहर 379

दिल्ली 367

गाजियाबाद 363

ग्रेटर नोएडा 368

हापुड़ 315

मेरठ 367

मु.नगर 364

नोएडा 356

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2020 के दस महीनों में अक्तूबर की हवा सबसे खराब

वर्ष 2020 के दस महीनों में मेरठ में अक्तूबर की हवा सबसे खराब रही है। इस महीने एक भी दिन शहरवासियों को साफ हवा नहीं मिल सकी। अक्तूबर की शुरुआत एक्यूआई 135 से हुई थी जो मध्यम श्रेणी में था। इसके बाद प्रदूषण बढ़ता गया और आखिरी दिन यानी 31 अक्तूबर को यह 367 तक जा पहुंचा। यह स्तर बेहद खराब श्रेणी का है। औसत एक्यूआई के आधार पर इस वर्ष के दस महीनों में अक्तूबर ऐसा महीना है जिसमें हवा सर्वाधिक प्रदूषित रही। जनवरी में औसत एक्यूआई 225, फरवरी में 212, मार्च में 118, अप्रैल में 140, मई में 138, जून में 121, जुलाई में 72, अगस्त में 46, सितंबर में 123 और अक्तूबर में 268 दर्ज हुआ। जुलाई और अगस्त ही ऐसे दो महीने रहे जिसमें शहरवासियों को साफ हवा मिली। इस वर्ष अक्तूबर के हालात बीते वर्ष दिसंबर से भी ज्यादा खराब हैं। दिसंबर 2019 में औसत एक्यूआई 266 था और इस वर्ष दो महीने पहले ही यह 268 के स्तर पर है।

दिन का पारा लुढ़का, 72 घंटे में और फिसलेगा

शनिवार को मेरठ का अधिकतम तापमान 30.3 और न्यूनतम 14.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। शुक्रवार के सापेक्ष दिन के तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई जबकि रात का पारा 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया। दिन-रात का तापमान सामान्य से एक-एक डिग्री सेल्सियस कम बना हुआ है। आने वाले 72 घंटे में तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस फिसलेगा। दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने के आसार हैं।

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  • Web Title:Before Diwali stifling air gas chamber became Meerut