मेरठ: स्वास्थ्य सेवाओं में जिंदगी का हिस्सा बनने लगा एआई

Apr 09, 2026 11:21 am ISTNavneet Sharma हिन्दुस्तान, मेरठ
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Meerut News - - एआई तकनीक से आगे बढ़ रहा स्वास्थ्य विभाग - आंखों से लेकर टीबी और

मेरठ: स्वास्थ्य सेवाओं में जिंदगी का हिस्सा बनने लगा एआई

- डायबिटिक रेटिनोपैथी, टीबी और ऑपरेशन में एआई से हो रही मरीजों को स्क्रीनिंग- रोजाना एआई से स्क्रीनिंग की रिपोर्ट मधुमेह एआई व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की जा रहीमेरठस्वास्थ्य सेवाओं में एआई की अहम भूमिका दर्ज हो रही। मरीजों की स्क्रीनिंग कर बीमारियों का आसानी से एआई से पता लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में डायबिटिक रेटिनोपैथी, टीबी और ऑपरेशन में एआई से हो रही मरीजों को स्क्रीनिंग हो रही है। रोजाना एआई से स्क्रीनिंग की रिपोर्ट मधुमेह व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की जा रही है। इस ग्रुप में प्रदेश के सरकारी चिकित्सक जुड़े हैं, चिकित्सकों के लिए एआई जांच से उपचार करना आसान हुआ है।

शासन भी चिकित्सकों को एआई से जोड़ते हुए उन्हें जागरुक करने की पहल शुरू कर रहा है। इस वर्ष की थीम स्वास्थ्य के लिए एकजुट विज्ञान के साथ खड़े रहे हैं।शुगर मरीजों की आंखें कितनी होंगी खराब, बता रहा एआईएलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में एआई का प्रयोग कर शुगर मरीजों की आंखों की स्क्रीनिंग की जा रही है। डायबिटिक रेटिनोपैथी लेजर फोटो कोएगुलेशन द्वारा (लेजर, इंजेक्शन, सर्जरी) कर आंखों के पीछे की झिल्ली से जुड़ी बीमारी ठीक करने में एआई की मदद ली जा रही है। हर रोज दो शुगर मरीज की एआई से स्क्रीनिंग की जा रही है।टीबी की स्क्रीनिंग की जा रही हैजिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विपुल कुमार ने बताया कि जनवरी से एआई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। चार आधुनिक तकनीक एआई बेस्ड पोर्टेबल मशीनें मिली हैं। इन मरीजों से शहर, गांव-गांव में पहुंचकर स्क्रीनिंग कर टीबी के मरीजों की तलाश की जा रही है। टीबी के मरीजों खोजने में तेजी आई है। मशीन की खासियत है कि यह एआइ बेस्ड एक्स-रे मशीन छोटी और हल्की है, जिसे कहीं भी ले जाने में आसानी है। जो एक्स-रे होते ही चंद सेकेंड में फेफड़ों की संदिग्ध स्थिति का विश्लेषण कर देती है।एआई से सफल ऑपरेशन बढ़े, संक्रमण में आई कमीहेल्थ एआई विशेषज्ञ डॉ. अनुज त्यागी ने बताया कि एआई के उपयोग से ऑपरेशन करने में आसानी और सफलता दर में सुधार हो रहा है। रेडियोलॉजी जांच, लेप्रोस्कोपिक प्रक्रियाएं सर्जन को सूक्ष्मता से काम करने में मदद करती हैं, जिससे चीर-फाड़ कम होती है और रिकवरी तेज होती है।128 मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी मिलीजेआर डॉ. भावना चौधरी एवं डॉ. प्रियांशी जैन के अनुसार अक्तूबर से अब तक 256 मरीजों की स्क्रीनिंग एआई से की गई। जिसमें 128 मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी मिली। इन मरीजों में 102 मरीज ऐसे थे जो दूसरे विभागों से डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी की जांच को रेफर हुए थे। एआई से स्क्रीनिंग के बाद बीमारी पता करने में जो रिजल्ट सामने आए वह 95 फीसदी सही पाए गए।एआई जांच से आसान हो रहा उपचारडायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह की गंभीर जटिलता है, जो आंख के पीछे के प्रकाश-संवेदनशील ऊतक (रेटिना) की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। रोजाना एआई से स्क्रीनिंग की रिपोर्ट मधुमेह एआई व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की जा रही है। - डॉ. प्रियांक गर्ग, रेटिना सर्जन एलएलआरएम मेडिकल कॉलेजजांच में समय की बचतएआई से स्क्रीनिंग करने में डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी का पता करने में चंद मिनटों का समय लग रहा है। इसके परिणाम 95 फीसदी सटीक आ रहे हैं। एआई से एमबीबीएस चिकित्सक शुगर मरीजों का इलाज कर समय-समय पर जांच कर पता लगा सकता है कि शुगर का असर आंखों पर तो नहीं है। - डॉ. लोकेश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष नेत्ररोग विभाग

Navneet Sharma

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो:
नवनीत शर्मा पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान मेरठ में स्वास्थ्य विभाग बीट पर काम कर रहे हैं।

परिचय एवं अनुभव
नवनीत शर्मा भारतीय मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) स्वास्थ्य विभाग की बीट पर काम कर रहे हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।

कॅरियर का सफर
नवनीत शर्मा ने अपने कॅरियर की शुरुआत अमर उजाला अखबार से की। यहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2011 में हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। अमर उजाला, दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और हिन्दुस्तान तीनों ही समाचार पत्रों में उन्हें स्वास्थ्य विभाग, परिवहन और बीट पर काम करने का मौका मिला। हिन्दुस्तान में भी लगातार इन बीट को कवर कर रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीए, एमए भूगोल के साथ-साथ पत्रकारिता में स्नातकोत्तर होने से नवनीत शर्मा को हिन्दी और पत्रकारिता का विशेष संयोजन मिला। इसी वजह से वह स्वास्थ्य विभाग पर कमांड के साथ ही इनोवेशन, रिसर्च और डाटा विश्लेषण पर केंद्रित स्टोरीज़ लिख रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग और लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग और इससे जुड़े रिसर्च के विषयों पर नवनीत शर्मा की गहरी समझ है। स्वास्थ्य विभाग में उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। नवनीत शर्मा का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।

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