
बंधन में नही, कला संगीत को मन से सीखें : मालिनी
Meerut News - प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि तकनीक संगीत की आत्मा को नहीं समझ सकती। संगीत और नृत्य में जो तप और साधना है, वह केवल मन और अभ्यास से ही संभव है। उन्होंने युवाओं को संगीत को जीवन का हिस्सा बनाने और आलोचना से न डरने का संदेश दिया।
लोक और शास्त्रीय संगीत की आत्मा को तकनीक कभी पूरी तरह नहीं समझ सकती। एआई चाहे जितनी उन्नत हो जाए, वह गुरु-शिष्य परंपरा के भाव, घुंघरुओं की खनक और सुरों के जीवंत तालमेल को नहीं गढ़ सकती। संगीत और नृत्य में जो अनुभूति, तप और साधना है, वह केवल मन, अभ्यास और समर्पण से ही संभव है। यह विचार प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने व्यक्त किए। वह सोमवार को शिवांगी संगीत महाविद्यालय की शास्त्रीनगर स्थित नई शाखा के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए संगीत, कला और जीवन मूल्यों पर प्रेरक विचार साझा किए।
मालिनी अवस्थी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब शास्त्रीय संगीत के प्रति युवाओं की रुचि कम हो गई थी, लेकिन अब इसका दायरा फिर बढ़ता दिख रहा है। आज के दौर में संगीत केवल कला नहीं, बल्कि बेहतर मनुष्य बनने का माध्यम है। उन्होंने कहा आप डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस या किसी भी क्षेत्र से जुड़ें, यदि संगीत और लोककला से संबंध रहेगा तो जीवन में नैतिकता, अनुशासन और संतुलन बना रहेगा। संगीत व्यक्ति को शांत, संवेदनशील और अनुशासित बनाता है। एआई का उपयोग करें, गुलाम न बनें उन्होंने कहा आज संगीत के सामने एआई जैसी तकनीक की चुनौती है। तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उसका गुलाम बनना घातक है। एआई गुरु-शिष्य परंपरा के भाव, साधना की गहराई और मंच पर कलाकार के आत्मिक संवाद को नहीं समझ सकता। घुंघरू की खनक, सुरों का उतार-चढ़ाव और भावों की अभिव्यक्ति कलाकार को स्वयं अपने अभ्यास और तप से अर्जित करनी होती है। बच्चों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा किसी भी विधा को सीखने के लिए मन से जुड़ना जरूरी है। कला को बंधन में रहकर नहीं, बल्कि मन से सीखना चाहिए। अपनी प्रतिभा में ऐसी तपिश लाएं कि लोग आपको सुनें, देखें और आपकी कला सीधे जनता के मन में प्रवेश कर जाए। यदि बेहतर मनुष्य बनना है तो संगीत को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। आलोचना से घबराएं नहीं प्रश्नोत्तर संवाद में लक्ष्य निर्धारण पर मालिनी अवस्थी ने कहा लक्ष्य की राह में समस्याएं आएंगी। कोई प्रस्तुति को बेकार बताएगा, कोई हंसेगा या अपमान करेगा, लेकिन कलाकार को अपना हौसला स्वयं बनाए रखना होता है। आलोचना से टूटना नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। मेरठ की सबसे बड़ी विशेषता यहां का उत्साह उन्होंने कहा मेरठ की सबसे बड़ी विशेषता यहां का उत्साह है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। सीखने के समय पूरी निष्ठा से सीखें, संगीत को सुनें, अभ्यास करें और गुरु के निर्देशों का पालन करें। गीतों से बांधा समां मालिनी अवस्थी ने फिल्म हक का प्रसिद्ध गीत ‘झूम बावरे झूम’ का मुखड़ा सुनाया। इसके साथ ही उन्होंने ‘जहां सारी रैन जगे हो’ जैसे मनमोहक गीत प्रस्तुत किए और बच्चों के साथ सुर से सुर मिलाकर गायन किया। कला एक धरोहर और परंपरा : राजेंद्र गंगानी जयपुर घराने के प्रसिद्ध कथक कलाकार राजेंद्र गंगानी ने कहा कला हमारी धरोहर और परंपरा है। इसे जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। बच्चों के बीच आकर उन्हें सीखते देखना ऊर्जा से भर देता है और मंच पर प्रस्तुति के समय अलग ही शक्ति का अनुभव होता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी शाम कार्यक्रम में निर्देशिका ऋचा शर्मा, प्रधानाचार्य राजा बलूनी, रुचि बलूनी, डॉ. तनुश्री कश्यप शर्मा, डॉ. मीनाक्षी शास्त्री, अमित नगर, डॉ. मृणालिनी अनंत, सपना आहूजा, नेहा कक्कड़ उपस्थित रहे। शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत, तबला, हारमोनियम, कीबोर्ड, गिटार तथा कथक व लोक नृत्य में डिग्री, डिप्लोमा और हॉबी कोर्स के अंतर्गत 15 दिसंबर से प्रवेश लिए जाएंगे। कक्षाएं अपराह्न 3 बजे से 7:30 बजे तक संचालित होंगी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




