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‘गुरु पूर्णिमा धैर्य और संकल्प का दिव्य महोत्सव

‘गुरु पूर्णिमा धैर्य और संकल्प का दिव्य महोत्सव

आशुतोष महाराज की संस्था दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रविवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। चौ. चरण सिंह विवि के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में गुरुभक्ति की ऐसी छटा बिखरी कि हर कोई मुग्ध हो गया। मधुर भक्ति गीतों से अध्यात्म का संचार हुआ और भक्तिरस की वर्षा से अनुयायी निहाल हो उठे।

आशुतोष महाराज के चित्र के सम्मुख आरती व पूजन से गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। संस्थान की मेरठ शाखा की संयोजिका साध्वी लोकेशा भारती ने बताया कि बहुत समय पहले से कार्यक्रम की तैयारियां की जा रही थीं। उन्होंने बताया कि विश्वभर में संस्थान की ओर से जुलाई में इस उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गुरु की पूजा, उनकी आराधना, उनके आदर्शों को शिष्यों के दिलों में एक बार फिर से उजागर किया गया। सभी श्रद्धालुओं ने आशुतोष महाराज के दिव्य गुरुप्रेम से ओतप्रोत होकर भाव अर्पित किए। आशुतोष महाराज की शिष्या विदुषी पदम्हस्ता भारती ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास भी गुरु की महिमा का व्याख्यान करते हुए कहते हैं कि उन गुरु के चरण कमलों की वंदना करता हूं, जो कृपा का सागर हैं और नररूप में श्री हरि ही हैं। यानि जो परम सत्ता जो सगुण रूप में धरा पर अवतरित हैं, इतना ही नहीं हैं, गुरु की पहचान बताते हुए कहते हैं कि पूर्ण गुरु वही है जो अपने शिष्य को ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्रदान करते समय तत्क्षण ईश्वर का दर्शन करा दे।उन्होंने कहा कि एक शिष्य के जीवन में गुरु के बिना कुछ भी नहीं है। गुरु का स्थान एक शिष्य के जीवन में सर्वोपरि हुआ करता है। इसलिए शिष्य अपने गुरु की पूजा वंदना करता है। जीवन में पूर्ण गुरु की पूजा ही शिष्य के लिए सबसे बड़ा वरदान होती है। संस्था के युवा, शिक्षित एवं योग्य संत समाज ने मधुर एवं भावपूर्ण भजनों से संगत को भक्ति से ओतप्रोत कर दिया।कार्यक्रम में जेएस एकेडमी की प्रिंसिपल पूनम शर्मा, डीफ एंड डंब स्कूल की प्रिंसिपल अमिता कौशिक, बेटी फांउडेशन की अंजू पांडे, राधा गोविंद के डायरेक्टर डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, बिजनौर शुगर मिल के यूनिट हैड अजय शर्मा आदि रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शिरडी के साईं बाबा द्वारा ली गई तीन दिन लंबी निर्विकल्प समाधी का रहस्योद्घाटन करती हुई रही। इसमें साईं का समाधी उपरान्त फिर से अपने शरीर में लौट आने पर धरती लोक के दुर्लभ एवं आलौकिक दृश्य पर आधारित एक दिव्य नृत्य नाटिका रही, जिसे देख सभी रोमांचित हो उठे।कार्यक्रम में संस्थान के सामाजिक प्रकल्प ‘संरक्षण के तहत वृक्षारोपण जागरूकता अभियान का आयोजन भी हुआ। इसमें लोगों ने वृक्षों के संरक्षण के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को निभाने की शपथ ली।

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  • Web Title:'Divya Mahotsav of Guru Purnima Grit and Resolution'