घर के अंदर ही छह महीने तक सड़ती रही युवती की लाश, परफ्यूम छिड़कता रहा पिता

Yogesh Yadav मेरठ, प्रमुख संवाददाता
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड कर्मचारी पिता अपनी बेटी की लाश के साथ 3 महीने तक घर में रहा। बदबू छिपाने के लिए वह शव पर परफ्यूम और रूम फ्रेशनर छिड़कता रहा। लाश के कंकाल बनने पर वह मकान बंद कर देहरादून फरार हो गया।

घर के अंदर ही छह महीने तक सड़ती रही युवती की लाश, परफ्यूम छिड़कता रहा पिता

UP News:यूपी के मेरठ में मानवता और रिश्तों को शर्मसार करने वाली सनसनीखेज वारदात हुई है। छह माह पहले अक्टूबर में बेटी की मौत के बाद अंतिम संस्कार करने की जगह पिता ने लाश को घर में ही पड़ा रहने दिया। दुर्गंध छिपाने के लिए तीन महीने तक लाश पर परफ्यूम छिड़कता रहा। दिसंबर में लाश को मकान में ही छोड़कर देहरादून चला गया। शुक्रवार को पिता को उनके ही परिवार के लोगों ने भैंसाली डिपो पर कुछ रिक्शा चालकों के साथ देखा और बेटी को लेकर पूछताछ की। पिता लोगों को लेकर घर पहुंचा और छह माह से बंद मकान खुलवाया तो दिल दहला देने वाली वारदात का खुलासा हुआ। मौके पर पहुुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। आरोपी पिता को हिरासत में लिया गया है। वारदात में तंत्र-मंत्र और तांत्रिक क्रिया का भी एंगल सामने आया है। इसे लेकर जांच की जा रही है।

बताया जाता है कि सदर बाजार के तेली मोहल्ला निवासी उदय भानू विश्वास शिक्षा विभाग (बोर्ड ऑफिस) से रिटायर्ड है। इनकी पत्नी शर्मिष्ठा ने वर्ष 2013 में फांसी लगाकर जान दे दी थी। पत्नी की मौत के बाद उदय भानू विश्वास इसी मकान में अपनी 32 साल की अविवाहित बेटी प्रियंका के साथ रह रहे थे। जुलाई 2025 से प्रियंका की तबीयत अचानक से खराब रहने लगी थी और पीलिया हो गया। प्रियंका के पैरों में परेशानी रहने लगी। 2 अक्टूबर 2025 को दशहरे वाले दिन रिश्तेदारों ने आखिरी बार प्रियंका को देखा था। इसके बाद प्रियंका का घर से बाहर निकलना बंद हो गया और उदयभानू विश्वास बीमारी की बात कहता रहा।

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तीन माह तक बेटी की लाश पर छिड़कता रहा परफ्यूम

प्रियंका की अक्टूबर 2025 में घर के अंदर ही मृत्यु हो गई। शव का अंतिम संस्कार करने और रिश्तेदारों को बताने की जगह आरोपी उदय भानू ने बेटी की मौत की खबर छिपा ली। तीन माह तक बेटी की लाश को घर के अंदर ही रखा और शव सड़ने की दुर्गंध दबाने के लिए परफ्यूम छिड़कता रहा। इसलिए आसपास किसी को भी शक नहीं हुआ। 25 दिसंबर के आसपास जब लाश पूरी तरह से कंकाल में बदल गई तो मकान बंद कर उदयभानू विश्वास देहरादून भाग गया।

परिजनों को बताया, बेटी का देहरादून में चल रहा इलाज

परिवार के लोगों ने जनवरी 2026 में कई बार उदय भानू को कॉल किया। पूछा कि मकान बंद कर कहां चले गए हो। उदय भानू ने बताया कि देहरादून में बेटी का उपचार करा रहा हूं। इसके बाद जब भी रिश्तेदारों ने कॉल किया तो उदय भानू ने फोन नहीं उठाया। ऐसे में परिजनों को अनहोनी की आशंका होने लगी थी।

बेगमबाग में चाय के खोखे पर पकड़ा, तब खुला प्रियंका की मौत का राज

शुक्रवार देर शाम बेगमबाग में एक एक चाय की दुकान पर कुछ रिक्शावालों के साथ उदय भानू को उनके चचेरे भाई सुनील ने देख लिया। इसके बाद बाकी परिजनों को बुला लिया। प्रियंका को लेकर पूछताछ की तो उदय भानू ने कहा कि देहरादून में उपचार चल रहा है और अस्पताल में भर्ती है। परिजन उदय को घर पर बैठकर बातचीत करने की बात कहकर घर ले आए। घर का दरवाजा खोला तो अंदर प्रियंका का कंकाल बेड पर पड़ा मिला। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया। फोरेंसिक टीम को बुलाया गया और कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस अधिकारियों की माने तो करीब छह माह पुरानी लाश है। मृत्यु का कारण पता करने के लिए डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। वहीं पुलिस ने पिता उदय भानू को हिरासत में लिया है और पूछताछ की जा रही है।

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने अनुसार करीब छह माह पूर्व प्रियंका की मौत हो गई थी। तीन माह तक आरोपी पिता घर में ही लाश को रखकर परफ्यूम और रूम फ्रेशनर छिड़कता रहा। दिसंबर 2025 में मकान बंद कर उदयभानू देहरादून फरार हो गया और वहां रिक्शा चलाता रहा। शुक्रवार को कुछ परिजनों ने उदय भानू को बेगमबाग में चाय की दुकान पर देखा और पकड़कर घर ले आए। मकान खोला तो अंदर प्रियंका का कंकाल मिला है। प्रकरण में जांच की जा रही है औ उदयभानू को हिरासत में लिया गया है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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