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बड़े मंगल पर बजरंगबली के जयकारों से गूंजे मंदिर

जेठ माह के चौथे बड़े मंगलवार पर सभी हनुमान मंदिर बजरंग बली के जयकारों से गूंज उठे। सुबह ही मंदिरों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी...

बड़े मंगल पर बजरंगबली के जयकारों से गूंजे मंदिर
हिन्दुस्तान टीम,मऊTue, 18 Jun 2024 11:15 PM
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मऊ। जेठ माह के चौथे बड़े मंगलवार पर सभी हनुमान मंदिर बजरंग बली के जयकारों से गूंज उठे। सुबह ही मंदिरों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाकर हनुमान जी से बल, बुद्ध व विवेक प्रदान करने की कामना की। अंतिम बड़े मंगलवार को विभिन्न स्थानों पर सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ। वहीं कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भंडारे का आयोजन किया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर श्री बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त किया।
ज्येष्ठ मास के चौथे मंगलवार को भगवान हनुमान की भक्ति ने जमकर हिलोरे लिया। सुबह से ही मंदिरों को सजाया जाने लगा। पौ फटने के पहले ही मंदिरों में चहल पहल शुरू हो गई। नगर के साथ ग्रामीण क्षेत्र के हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का रेला उमड़ा। श्रद्धालुओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर मंगल की मनौती मांगी। इस दौरान कहीं पर सुंदरकांड शुरू हुआ तो कहीं पर हनुमान चलीसा का पाठ। पाठ समाप्त होने के बाद हनुमान जी की आरती के साथ ही भंडारे भी शुरू हो गए। मंदिरों के साथ ही लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर भी भांडारे का आयोजन किया। श्रद्धालुओं ने लोगों को शर्बत पिलाया तो किसी ने पूड़ी और हलुआ खिलाया। भंडारों में प्रसाद ग्रहण करने की भक्तों में होड़ रही। इस मौके पर कई जगह मेले जैसा नजारा रहा। भीषण गर्मी के बाद भी लोगों की आस्था शिखर रही। दोपहर तक मंदिरों में भीड देखते ही बन रही थी। शहर के हनुमान घाट, रेलवे फाटक, फातिमा चौराहा, भीटी समेत ग्रामीण अंचलों के दोहरीघाट, घोसी, अमिला, पहसा, मधुबन, रानीपुर, कोपागंज, नदवासराय, चिरैयाकोट समेत आदि स्थानों पर स्थित हनुमान मंदिर के अलावा जिले के छोटे-बड़े सभी हनुमान मंदिर पर सुबह से शाम तक यह सिलसिला चलता रहा।

इसी दिन पहली बार मिले थे श्रीराम-हनुमान

पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह में मंगलवार के दिन प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की पहली बार भेंट हुई थी। इसी वजह से ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले सभी मंगलवार को ‘बड़ा मंगल के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान राम भक्त प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और वे अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। इस माह में बजरंगबली की आराधना करने से सभी दुख, तकलीफ, भय, और बधाई दूर होती है।

हनुमानजी ने तोड़ा था भीम का घमंड

एक अन्य कथा के अनुसार, जब महाभारत काल में महाबली भीम को अपने बल पर घमंड हो गया था, तब उनके घमंड को समाप्त करने के लिए वीर बजरंगबली ने बूढ़े वानर का रूप धारण किया था। उनके घमंड को तोड़ा भी था, जिसके चलते इसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है।

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