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लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी को उमड़े लोग

हिन्दुस्तान टीम,मऊNewswrap
Tue, 06 Nov 2018 10:04 PM
लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी को उमड़े लोग

आधुनिकता के दौर में मिट्टी से निर्मित लक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमाओं की मांग कम नहीं हुई है। इस बार मिट्टी की बनी मूर्तियों की मांग काफी रही। मूर्तियों की खरीदारी के लिए मंगलवार को पूरे दिन लोग बाजार में उमड़े रहे।

दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा की परंपरा के चलते हर साल नई मूर्ति खरीदी जाती है। पूजा मिट्टी से बने गणेश-लक्ष्मी की होती है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है। इसी नाते मिट्टी से निर्मित खिलौनों की मिठास भले ही बदलते समय के साथ कम होती जा रही हो, लेकिन मिट्टी से बने लक्ष्मी-गणेश पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। उनकी बिक्री कम होने की बजाय बढ़ी ही है। बढ़ती महंगाई भी उनकी बिक्री को कम नहीं कर पाई है। शहर समेत ग्रामीण अंचलों में दीपावली पर्व पर मिट्टी से लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्ति की खरीदारी के लिए मंगलवार को बाजार में पूरे दिन चहल-पहल रही। शहर क्षेत्र के सहादतपुरा, मुंशीपुरा, रौजा बाजार, सदर चौक, संस्कृत पाठशाला, डीएवी, औरंगाबाद, मिर्जाहादीपुरा आदि स्थानों पर मिट्टी से बने लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियों के बाजार गुलजार रहे। लोग अपने बजट के अनुसार मूर्तियों की खरीदारी करते देखे गए। दीवाली से जुड़ी जहां अनेक परंपराओं को लोग भूल चुके हैं, वहीं मिट्टी से बने लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने की परंपरा आज भी अपनी जगह बनी हुई है। यही कारण है कि बाजारों में ही नहीं बल्कि कालोनियों में भी मिट्टी से बने लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियों के दुकान विभिन्न स्थानों पर लगे रहे।

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जाम के झाम से पूरे दिन परेशान रहे लोग

मऊ। निज संवाददाता

दीपावली पर लोगों द्वारा की जा रही सामानों की खरीदारी को देखते हुए मंगलवार को दूसरे दिन भी जाम के झाम से लोग काफी परेशान रहे। जाम के झाम के कारण सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को उठानी पड़ी। वहीं नवागत क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में पुलिस टीम पूरे दिन यातायात नियंत्रण को लेकर जूझती नजर आई। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस टीम यातायात पर नियंत्रण करने का प्रयास करती नजर आई।

शहर समेत ग्रामीण अंचलों में एक तरफ जहां दीपावली पर्व को लेकर लोगों में जबरदस्त जोश दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में सामानों की खरीदारी के लिए उमड़ रही भीड़ के कारण लोगों को जाम के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पूरे दिन जाम के झाम के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर क्षेत्र के बाल निकेतन, रोडवेज, आजमगढ़ मोड़, गाजीपुर तिराहा, मिर्जाहादीपुरा, औरंगाबाद, घास बाजार, संस्कृत पाठशाला आदि स्थानों पर लोग जाम के झाम में घंटों फंसे रहे। वहीं नवागत क्षेत्राधिकारी आलोक जायसवाल पुलिस टीम के साथ पूरे दिन यातायात को नियंत्रित करने में जुटे रहे। जाम के झाम के कारण सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को झेलनी पड़ी। बाजार में सामानों की खरीदारी करने आई महिला रेखा देवी, अंजू देवी, पार्वती, हेमवंती ने बताया कि भले ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यातायात नियंत्रण के लम्बे-चौड़े दावे किए जाते हों, लेकिन सच्चाई यह है कि त्योहार पर सामानों की खरीददारी के दौरान लोगों को जाम के झाम के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जाम के कारण लोग काफी मुश्किल से सामानों की खरीदारी कर पा रहे हैं।

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विद्युत झालरों व प्रकाश के उपकरणों की हुई बिक्री

प्रकाश पर्व दीपावली को धूमधाम से मनाने की तैयारी में लोगों के साथ दुकानदार भी जुट गए हैं। विद्युत झालरों व अन्य प्रकाश उपकरणों की बड़ी खेप बाजार में उतर चुकी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि इस बार विद्युत झालरों व प्रकाश के उपकरणों की काफी बिक्री होगी।

शहर समेत ग्रामीण अंचलों में प्रकाश के पर्व दीपावली को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। बाजार में इस बार भी चाइनीज सामान बहुतायत हैं। भारतीय झालर तो बहुत खोजने पर मिल रही हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष झालरों की कीमत में 10 से 20 प्रतिशत गिरावट आई है। बाजार में दुकानों पर तरह-तरह की चाइनीज झालरें ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सजाई गई हैं। 20 रुपये से लेकर सौ रुपये तक की झालर दुकानों पर हैं। इनमें तरह-तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। टिमटिमाती झालरें, पाइप झालरें, लच्छा झालरें, राइस, रोटर, एलईडी लड़ी, आरजीवी, लोटस रोटर, टेबल बाल, स्ट्रीप लाइट नेट व रोप लाइट सहित सजावट के अनेक चाइनीज सामान बाजार में मौजूद हैं। भारतीय सामान में बहुत खोजने पर किसी-किसी दुकान में झालर, च्रग स्वास्तिक व पट्टा झालर दिख रही है। कहीं-कहीं झालर भारतीय हैं तो उसमें बल्ब चाइनीज हैं। कहीं चाइनीज झालर कैप भारतीय लगा दिया गया है। ऐसी झालरें 45 रुपये में दस मीटर है। भारतीय स्वास्तिक 350 रुपये और पट्टा झालर 250 रुपये की कीमत में उपलब्ध हैं। इस बार चाइना ने कुछ नई चीजें बाजार में उतारी है जिसमें डीजे की जगह रोटर बल्ब आया है जिसे कमल के फूल के आकार का बनाया गया है। ये तीन-चार किस्म के हैं, सभी की कीमत सौ रुपये के आस-पास हैं। इस बार एलईडी लड़ी आई है जो 30 रुपये मीटर हैं। दीपमालाएं भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। इनकी मांग भी ज्यादा है। नेट व रोप की मांग बहुत कम हो गई है, इसलिए ये इस बार बाजार से लगभग गायब हैं।

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ज्वेलरी व बर्तन के सामानों की हुई खरीदारी

धनतेरस के एक दिन के बाद मंगलवार को भी ज्वेलरी, बर्तन व बाइक की दुकानों पर खरीदारी की काफी भीड़ दिखाई दी। लोगों ने अपने बजट के अनुसार बाजार में जमकर सामानों की खरीदारी की। ज्वेलरी की दुकानों पर सबसे ज्यादा लोगों ने शुभ के तौर पर चांदी के सिक्कों की खरीदारी की। इस बार सामानों की खरीदारी को लेकर लोगों में खासा जोश दिखाई दिया।

शहर समेत ग्रामीण अंचलों में धनतेरस के एक दिन बाद भी मंगलवार को बाजारों में सामानों की खरीद के लिए लोगों की भीड़ दिखाई दी। लोगों द्वारा जमकर खरीदारी किए जाने से बाजार में लक्ष्मी जी की झमाझम बारिश हुई। बर्तन, इलेक्ट्रानिक आइटम, आभूषण, वाहन की दुकानों पर धनतेरस के एक दिन के बाद भी ग्राहकों की काफी भीड़ देखी गयी। सुबह से शुरू हुई खरीदारी देर शाम तक चली। धनतेरस पर चांदी की तस्तरी, चांदी के गिलास, सोने की माला, अंगूठी, सोने व चांदी के सिक्के विभिन्न कीमतों के साथ प्रदर्शित किए गए थे। लोगों ने अपनी-अपनी हैसियत के अनुसार खरीदारी की। मध्यम वर्ग के लोग ने बर्तन खरीदे तो उच्च वर्ग के लोगों ने सोने व चांदी के जेवरात खरीदकर धनतेरस की रस्म पूरी की। गरीब तबके के लोगों ने चम्मच व गिलास से ही काम चला लिया। बर्तन व्यवसायी सर्वदानंद के अनुसार दीपावली की बाजार इस साल अच्छा रहा है। दुकानदारों ने बताया कि इस साल लोग अपनी परंपरा के अनुसार खरीदारी किए हैं। लोगों को अपनी संस्कृति व त्योहार का अहसास हो रहा है। यह शुभ संकेत हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष दो पहिया की बिक्री भी काफी अधिक रहा। इसकी अपेक्षा चार पहिया एवं तीन पहिया की खरीदारी थोड़ा नरम रही।

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वंचित समाज की बस्ती में भाजपा नेत्री ने बांटे दीपक

घोसी। हिन्दुस्तान संवाद

नगर के मझवारा मोड़ के निकट स्थित रामलीला मैदान के पास सड़क के किनारे रह रहे दलित और वंचित समाज की बस्ती में मंगलवार को पहुंचकर भाजपा गोरखपुर क्षेत्र की क्षेत्रीय समिति की मंत्री शकुन्तला चौहान ने दीपावली मनाने के लिए महिलाओं को मिट्टी से बने दीपों, मिठाई तथा बच्चों के बीच मिठाई व पटाखे वितरित किया। दीपावली पर महत्वपूर्ण सामग्री मिलते ही बस्ती की महिलाओं व बच्चों में खुशी की लहर छा गयी।

इस अवसर पर भाजपा गोरखपुर क्षेत्र की क्षेत्रीय समिति की मंत्री शकुन्तला चौहान ने चीनी झालरों का विरोध करते हुए कहा कि देश की पारम्परिक मिट्टी के दीपकों का ही दिवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर महत्व है। मिट्टी के दीपक एवं अन्य सामाग्री बनाने के काम में जुटे कुम्हार समाज के दश्तकारों की रोजी रोटी को बढ़ावा दिये जाने का काम सदियों से भारतीय समाज करता चला आ रहा है। वर्तमान समय में चीन जैसा भारत विरोधी देश हमारी परम्परागत सामाग्रीयों एवं कामों में लगे लोगों की रोजी रोटी पर हमला करते हुए पूरे बाजार में अपना कचरा पाट रहा है। यह हमें आर्थिक रूप से कंगाल बनाये जाने का कुचक्र है। इससे सावधान रहने तथा अपनी परम्परागत थाती को समेटकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों से सुरक्षित ढंग से कम आवाज के पटाखे विशेष कर फुलझरी आदि छोड़ने की अपील की। इस अवसर पर मिट्टी के बर्तन बनाने के सफल कारीगर तूफानी प्रजापति, पूर्व प्रधान मनिराम सिंह, डा. जयशंकर प्रसाद, परमहंश, दिनेश मिश्रा, नगीना सिंह आदि मौजूद रहीं।

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