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लाल निशान के करीब पहुंची घाघरा

इस समय हो रही बरसात के चलते घाघरा में उफान तेज हो गया है। नदी की लहरें निरंतर लाल निशान की तरफ अग्रसर हैं। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु से मात्र 44 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। लगातार जलस्तर में वृद्धि होने से नदी की धारा नवली में ठोकर काटने को आतुर दिख रही है। घाघरा का जलस्तर सोमवार को 69.46 मीटर था। जबकि रविवार को घाघरा का जलस्तर 69.42 मीटर था। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर के सापेक्ष नदी 44 सेमी नीचे बह रही है। लगातार जलस्तर में वृद्धि होने से नदी की धारा खतरा बिंदु के करीब पहुंचती जा रही है। घाघरा के उफान से तटवर्ती गांवों की भूमि जलमग्न हो गई है। 

लगातार जलस्तर में बढ़ाव होने के चलते नवली के समीप बने ठोकर पर लहरें टक्कर मार रही हैं। पानी लगातार बढ़ने से खाकी बाबा की कुटी पर दबाव बढ़ता जा रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती लोग दहशत में हैं। मुक्तिधाम पर दबाव बढ़ता जा रहा है। भारत माता मंदिर खतरे में है। श्मशान घाट घाघरा के जल में समाहित हो गई है। यहां शवदाह करने में काफी दिक्कतें उत्पन्न हो रही है। बारिश के दिनों में सब लोग खुले आकाश के नीचे शव को जला रहे हैं। भारी दिक्कतों का सामना श्राद्ध कर्म करने वालों को करना पड़ रहा है। श्मशान घाट डूब चुका है, श्मशान घाट के ऊपर जो सेट बना है वह क्षतिग्रस्त हो गया है। अगर कटान शुरू हुई तो गौरीशंकर घाट का भी जो अवशेष बचा है वह भी नदी में कटकर चला जाएगा। सिंचाई विभाग मुक्तिधाम बचाने में उदासीन दिखाई दे रहा है। जबकि नवली गांव में रामु मल्लाह, रामवृक्ष की गन्ने की फसल कट कट कर नदी में बह रही है। रामू मल्लाह व रामवृक्ष ने बताया कि लगभग दो वर्ष से हम लोगों के खेत लगातार कट कर नदी में विलीन हो रही है, लेकिन शासन प्रशासन मौन साधे हुए है। लगातार बारिश होने व रह-रहकर नेपाल द्वारा पानी छोड़े जाने से निकटवर्ती गांवों में बाढ़ आने व दुश्वारियों को लेकर दहशत फैल गई है।

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