नहर शाखाओं में पानी नहीं आने से सूख रही धान की नर्सरी
- महंगे दामों पर डीजल खरीद नर्सरी तैयार करने में जुटे किसान नहर शाखाओं में पानी नहीं से सूख रही धाननहर शाखाओं में पानी नहीं से सूख रही धाननहर शाखाओं म

चिरैयाकोट, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र स्थित शारदा सहायक खंड-32 आजमगढ़ की नहर शाखाओं में इस समय पानी की जगह धूल उड़ रही है। जिसके चलते नहर के पानी पर आश्रित किसानों के धान की नर्सरी का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही गन्ना, मूंग, पशुओं के हरे चारे आदि की फसलें झुलस रही हैं। नहर में पानी न होने की वजह से जिन किसानों के पास ट्यूबवेल का साधन है वो महंगे दामों पर डीजल की खरीदारी कर जैसे-तैसे धान की नर्सरी डालने की जुगत में लगे हैं। लेकिन, ऐसे किसान जो खेती के लिए नहरों पर आश्रित रहते हैं, उन्हें धान की नर्सरी डालने और नर्सरी को बचाने के लिए नहर में पानी आने का इंतजार है। समुचित जानकारी नहर विभाग को होने के बावजूद भी मौन साधे हुए है। जिसके चलते किसानों में काफी आक्रोश व्याप्त है। क्षेत्रीय किसानों ने मंडलायुक्त का ध्यान आकृष्ट कराते हुए उपरोक्त नहर शाखा सहित माइनरों में अविलंब पानी छोड़े जाने की मांग की है。
शारदा सहायक नहर और कुशाडीह माइनर में उड़ रही धूल
पहसा। जून का महीना शुरू हो चुका है, धान की नर्सरी (बेहन) डालने का समय तेजी से निकल रहा है, लेकिन रतनपुरा क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली शारदा सहायक नहर और कुशाडीह माइनर अब तक सूखी पड़ी हैं। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। किसानों की मेहनत, उम्मीदें और आजीविका सब कुछ सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की उदासीनता किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। समाजवादी नेता निसार अहमद, राकेश सिंह नरेंद्र सिंह बघेल अनिल यादव, संतोष कुमार सिंह उर्फ संतु सिंह, सुजीत कुमार सिंह, महेंद्र राजभर आदि किसानों ने प्रशासन एवं सिंचाई विभाग से तत्काल नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की है, ताकि समय रहते धान की नर्सरी तैयार हो सके और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो खरीफ की खेती गंभीर रूप से प्रभावित होगी।


