Mau News: नीलामी से पहले समिति की वैधता पर सवाल, जांच पूरी होने तक पोखरी आवंटन पर रोक

हिन्दुस्तान, मऊ
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Mau News: - परिवार रजिस्टर की नकल में बदलाव के आरोप, वीडीओ का वेतन रोकने से भी बढ़ा विवाद उठाते हुए आरोप लगाया है कि जांच के दौरान संयुक्त परिवारों के सदस्यों को

Mau News: नीलामी से पहले समिति की वैधता पर सवाल, जांच पूरी होने तक पोखरी आवंटन पर रोक

Mau News: मुहम्मदाबाद गोहना, हिन्दुस्तान संवाद। देवसीपुर की मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड के गठन को लेकर चल रही शिकायत और जांच के बीच अब परिवार रजिस्टर की नकल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ताओं ने समिति गठन में इस्तेमाल किए गए अभिलेखों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जांच के दौरान संयुक्त परिवारों के सदस्यों को अलग-अलग दर्शाने के लिए परिवार रजिस्टर की नई नकल तैयार कराने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो मूल अभिलेखों और बाद में तैयार नकल के आधार पर समिति की वास्तविक सदस्यता का सत्यापन मुश्किल हो सकता है।

देवसीपुर के ग्राम प्रधान वीरेंद्र राजभर, कमालपुर पहाड़पुर की ग्राम प्रधान देवंती देवी और भतरी चक भतरी के ग्राम प्रधान राजकुमार चौहान आदि ने प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार समिति गठन के दौरान एक ही परिवार के कई सदस्यों को सदस्य बनाए जाने, मृत व्यक्ति का नाम शामिल करने तथा दूसरे जनपद के लोगों को सदस्य बनाए जाने समेत कई गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की गई है। इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। विवाद के बीच परिवार रजिस्टर की नकल उपलब्ध नहीं कराने के मामले में ग्राम विकास अधिकारी संजय कुमार सहाय का एक दिन का वेतन रोककर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगे जाने से मामला और गरमा गया है। शिकायतकर्ताओं ने इसे जांच के दौरान दबाव बनाने की कार्रवाई बताया है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर वेतन रोकने की कार्रवाई को अभिलेख उपलब्ध न कराने और कार्यालय की ओर से संपर्क के बावजूद अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से जोड़कर देखा जा रहा है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि समिति गठन के समय इस्तेमाल किए गए मूल परिवार रजिस्टर, उस समय प्रस्तुत की गई नकल, सदस्यता सूची और वर्तमान में उपलब्ध नकल का आमने-सामने मिलान कराया जाए। उनका कहना है कि मूल अभिलेखों की जांच के बिना समिति की सदस्यता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती। साथ ही समिति के गठन में लगाए गए सभी दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच कराने की भी मांग की गई है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि 12 सितंबर को करहां और देवसीपुर के दो बड़े तालाबों की प्रस्तावित नीलामी होनी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समिति की वैधता को लेकर जांच चल रही है तो जांच पूरी होने तक उसे पोखरी का आवंटन नहीं किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि विवादित दस्तावेजों के आधार पर आवंटन होने की स्थिति में आगे चलकर मामला और उलझ सकता है। मुहम्माबाद गोहना के नव नियुक्त तहसीलदार सुधांशु शेखर ने कहा कि समिति की वैधता और अभिलेखों की जांच कराए बिना पोखरा आवंटित नहीं किया जाएगा। तहसीलदार के इस बयान के बाद अब जांच की निष्पक्षता और 12 सितंबर को प्रस्तावित नीलामी को लेकर प्रशासन के अगले कदम पर लोगों की नजर है।

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