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श्रील प्रभुपाद ने जगाई श्रीकृष्ण भक्ति की अलख

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रमणरेती स्थित श्रीकृष्ण बलराम इस्कॉन मंदिर परिसर में इस्कॉन के संस्थापक श्रील एसी भक्तिवेदांत प्रभुपाद का आविर्भाव महोत्सव धूमधाम से मनाया गया, जिसमें देश-विदेश से आए भक्तों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उनके जीवन से प्रेरणा लेकर भक्ति मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

इस्कॉन वृंदावन के अध्यक्ष पंचगौड़ा दास ने बताया कि 1896 में कोलकाता में जन्मे श्रील प्रभुपाद की 1922 में भक्ति सिद्धांत सरस्वती गोस्वामी से मुलाकात हुई। उनसे प्रभावित होकर उन्होंने वैदिक ज्ञान के प्रचार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 1950 में गृहस्थ जीवन त्याग सन्यास ले लिया और अध्ययन व लेखन के कार्य में जुट गए। इसी दौरान वे वृंदावन आए और राधादामोदर मंदिर में निवास करने लगे। यहां प्रवास के दौरान ही श्रील प्रभुपाद ने 18 हजार श्लोक वाले श्रीमद्भागवत पुराण का अनेक खंडों में अंग्रेजी अनुवाद किया, जिसके प्रथम तीन खंड प्रकाशित होने के बाद वे 1965 में संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए रवाना हो गए। जहां उन्होंने 1966 में अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) की स्थापना की। उन्होंने संघ से लाखों विदेशी भक्तों को जोड़ा। 14 नवंबर 1977 में वृंदावन में श्रीकृष्ण बलराम इस्कॉन मंदिर की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने दुनिया भर में 100 मंदिरों की स्थापना कर सनातन धर्म की पताका फहराई।

मंदिर निदेशक त्रिकालांगना दास ने बताया कि प्रभुपाद ने सात समंदर पार भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की अलख जगाकर पाश्चात्य संस्कृति में डूबे लाखों लोगों को भारतीय संस्कृति और सभ्यता से जोड़कर भगवद् भक्ति का मार्ग दिखाया। फिलीपिंस से आए जर्नादन स्वामी ने कहा कि श्रील प्रभुपाद सही मायने में भगवान श्रीकृष्ण के सच्चे भक्त थे। उनके द्वारा बताए गए भक्ति मार्ग पर चल कर आज करोड़ों लोगों के जीवन की राह सुगम एवं सुख समृद्धि से भरपूर हो गई है।

इससे पूर्व मंदिर में सुबह श्रील प्रभुपाद के विग्रह का पंचगव्य से महाभिषेक कर व्यास गद्दी का पूजन किया गया। वहीं सैंकड़ों शिष्य भक्त व अनुयायियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। देश-विदेश से आए भक्तों द्वारा महामन्त्र हरेकृष्ण हरेराम का जाप किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धांजलि सभा में अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर, थाईलैंड, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, कैलीफोर्निया, श्रीलंका, जर्मनी, मलेशिया, हॉलेंड समेत दिल्ली, मुम्बई, हैदराबाद, आसाम, चैन्नई, तमिलनाडु, कनार्टक, उड़ीसा आदि प्रदेशों के भक्तों द्वारा प्रमुपाद के साथ बिताए गए क्षणों के संस्मरण सुनाए गए।

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  • Web Title:Srila Prabhupada awakened Shri Krishna devotion beyond the seven seas