Srikkanth meets German woman Soodie on Padma Shri - पद्मश्री मिलने पर जर्मन महिला सुदेवी से मिले श्रीकांत DA Image

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पद्मश्री मिलने पर जर्मन महिला सुदेवी से मिले श्रीकांत

पद्मश्री मिलने पर जर्मन महिला सुदेवी से मिले श्रीकांत

ब्रजभूमि पर निस्वार्थ भाव से गोसेवा कर रहे संत रमेश बाबा और जर्मन की फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग सुदेवी दासी को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा के बाद बुधवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा उनका सम्मान करने राधाकुंड पहुंचे। उन्होंने सुदेवी दासी को गुलदस्ता देकर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने ब्रज के दो ऐसे लोगों को पद्मश्री सम्मान दिया है जो निस्वार्थ भाव से गो सेवा कर रहे हैं।

फ्रेडरिक इरिना ब्रूनिंग वर्ष 1978 में जर्मनी से ब्रज दर्शन के लिए आई थीं। सुदेवी दासी ने बताया कि ब्रज भ्रमण के दौरान उन्होंने सड़क किनारे एक बछड़े को तड़पते देखा। यह देख उन्हें काफी तकलीफ हुई। इस दृश्य ने उनके जीने का मकसद बदल दिया। उन्होंने बेसहारा व बीमार गोवंश की सेवा करने का संकल्प किया। सुदेवी दासी ने कौन्हई गांव में गोशाला शुरू की। इसमें 1400 से अधिक गोवंश हैं। इनमें से करीब 800 गाय घायल एवं बीमार हैं। जिनका गोशाला में उपचार किया जा रहा है। बीमार और घायल गोवंश को लाने के लिए गोशाला की दो एंबुलेंस भी हैं। इस मौके पर सूर्यकांत शर्मा, एसडीएम नागेंद्र सिंह, सीओ विनय सिंह, एक्सईएन सिद्धार्थ रंजन, एसडीओ राजकुमार, जेई सुधीर कुमार पटेल, थाना प्रभारी एसपी सिंह, चौकी प्रभारी सुनील कुमार पांडे, चेयरमैन टिमटू, भाजपा मंडल अध्यक्ष श्यामसुंदर उपाध्याय, भाजपा नेता मोहनलाल शर्मा, सुशील अग्रवाल मंत्री, उमेश कुमार, भरत सिंह, सभासद छत्तर सिंह आदि मौजूद थे।

पैतृक संपत्ति के किराए व दानदाताओं का मिलता है सहयोग

सुदेवी जर्मनी स्थित अपनी पैतृक संपत्ति के किराए से आने वाली धनराशि और दानदाताओं के सहयोग से गोशाला का संचालन कर रही हैं।

पिता जर्मन दूतावास में रहे बड़े अधिकारी

सुदेवी के पिता जर्मनी के एक बड़े अधिकारी रहे थे। उनके पिता ने दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में भी कार्य किया।

सांसद हेमा मालिनी ने बढ़वाई वीजा की अवधि

सुदेवी दासी का हाल ही में वीजा खत्म हो गया था। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने वीजा की अवधि बढ़वाई थी। पद्मश्री सम्मान मिलने पर सुदेवी दासी ने कहा कि वह बेहद खुश हैं। उन्हें सेवा और तपस्या का फल मिला है। उन्होंने कहा कि वह यहां रहकर पूरे जीवन गोसेवा करना चाहती हैं।

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