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बोले मथुरा-आखिर कब रुकेगा पराली दहन

बोले मथुरा-आखिर कब रुकेगा पराली दहन

संक्षेप: Mathura News - मथुरा जिले में धान की पराली जलाने की समस्या गंभीर हो गई है। अधिकारियों की कोशिशों के बावजूद, पराली दहन की घटनाएं बढ़ रही हैं। अब तक 93 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और किसानों पर जुर्माना लगाया गया है। पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

Thu, 6 Nov 2025 06:02 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मथुरा
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जिले में धान की पराली जलाने की समस्या बेहद गंभीर रूप लेती जा रही है। पिछले कई वर्षों में पराली दहन की घटनाओं में मथुरा जनपद उत्तर प्रदेश का अव्वल जिला साबित हुआ है। इस बार भी यहां शुरु से ही कमोवेश यही स्थिति बनी हुई है। लाख प्रयासों के बावजूद यहां पराली दहन की रोकथाम नहीं हो पा रही। अधिकारी दौड़ भाग कर रहे हैं लेकिन पराली दहन की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां किसानों को जागरूक कर पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति तो नष्ट हो ही रही है वहीं पराली की गुणवत्ता का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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देश के कई राज्यों में धान की फसल के अवशेष पराली दहन की समस्या गंभीर रुप ले चुकी है। फसल कटाई के बाद खेतों में पराली दहन की समस्या मथुरा में इस बार भी विकराल हो गई है। प्रशासन की सख्ती, जुर्माने एवं कार्रवाई के बावजूद पराली दहन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यहां अब तक पराली दहन के 93 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं 53 किसानों पर कुल 3.47 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें से 2.67 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है। पराली जलाने के मामलों में सात किसानों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है, जबकि 116 किसानों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। इनमें से 23 किसानों के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई की। वहीं अन्य को हिदायत देकर छोड़ दिया गया। पराली दहन रोकने में लापरवाह एक लेखपाल, एक पंचायत सचिव एवं एक कृषि सहायक को निलंबित भी किया जा चुका है। पराली दहन से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है, वातावरण प्रदूषित होता है एवं स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी को इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई मशीनों एवं योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को लगातार जागरूक कर रहे है। इसके बाद भी खेतों में पराली दहन का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसका असर वायु गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। बीते दिनों शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक सामान्य स्तर से काफी अधिक हो गया था। इससे वातावरण में धुंध और प्रदूषण बढ़ने लगा है। इसका धुआं हवा को जहरीला बना रहा है। इसके सूक्ष्म कण फेफड़ों में जमकर सांस की बीमारियों में वृद्धि कर रहे हैं। बच्चे एवं वृद्धों के लिए यह काफी खतरनाक है। उधर कुछ किसानों का कहना है कि पराली निस्तारण के लिए आवश्यक मशीनें जैसे हैप्पी सीडर, रोटावेटर या बैलर गांवों में उपलब्ध नहीं हैं। मजदूरों की कमी एवं बढ़ती लागत के कारण खेतों की सफाई मुश्किल हो जाती है। ऐसे में पराली दहन ही सबसे आसान विकल्प लगता है। डी-कंपोजर या सब्सिडी योजनाओं की जानकारी तो दी जाती है, पर जमीन पर उनका सबको लाभ नहीं मिल पाता। पराली दहन की रोकथाम की मशीनें गांवों तक नहीं पहुंचती है। हैप्पी सीडर या रोटावेटर जैसी मशीनें किराए पर बहुत महंगी हैं। जब तक हर छोटे किसान तक ये सुविधाएं आसान नहीं होंगी। तब तक पराली दहन बंद नहीं होगा। हम भी नहीं चाहते कि धुआं उठे। - चंद्रपाल सिंह फसल कटने के बाद खेत जल्दी तैयार करना एक बड़ी चुनौती है। गेहूं बुवाई का समय बहुत सीमित होता है, इसलिए पराली हटने का इंतजार मुश्किल हो जाता है। मजदूर मिलते नहीं या बेहद मंहगे मिलते हैं। ऐसे में पराली जलाना किसानों को आसान लगता है। - राजकुमार तौमर धान कटाई के बाद बमुश्किल दस दिन में गेहूं बोना होता है। इस छोटे समय में खेत साफ करने का और कोई और तरीका नहीं बचता। किसानों के पास कम संसाधन हैं, इसलिए मजबूरी में आग लगानी पड़ती है। सरकार संसाधन उपलब्ध कराए तो रोकथाम हो सके। - हाकिम सिंह पराली खेत में ही मिलाने की कोशिश भी की, लेकिन ट्रैक्टर से रोटावेटर चलाने में तेल, मजदूर एवं समय तीनों में भारी लागत आई। सरकार अगर इस तकनीक पर सब्सिडी बढ़ा दे और समय पर भुगतान हो, तो किसान खुद-ब-खुद पराली नहीं जलाएंगे। - गणेश तौमर आस पास पराली दहन का धुआं पूरे गांव में फैल जाता है। इससे बच्चे एवं वृद्धों को सांस लेने में परेशानी होती है। लेकिन जब तक गांव के सब लोग एक साथ निर्णय नहीं लेंगे, कोई कुछ नहीं कर सकता। यदि पराली प्रबंधन का प्रशिक्षण मिले, तो हालात बदलें। - लाल सिंह तौमर सरकार जुर्माने तो लगाती है लेकिन इसका कोई वैकल्पिक उपाय नहीं बताया जाता। गोशालाओं में पराली भेजने के संसाधन कोई नहीं देता है। मानते हैं पराली दहन ठीक नहीं है, लेकिन किसानों को दंड के बजाय समाधान देने से समस्या सुलझेगी। - जयवीर सिंह