DA Image
29 मार्च, 2020|3:06|IST

अगली स्टोरी

त्याग-तपस्या व भक्ति की प्रतिमूर्ति थे रामप्रियदास

default image

हरिवंश नगर स्थित अभिराम कुंज सत्संग भवन में शिव शक्तिपीठ परमार्थ सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में महामंडलेश्वर रामप्रियदास परमहंस का साकेत प्रवेशोत्सव मनाया गया, जिसमें संतों द्वारा हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ व हवन यज्ञ कर विश्व शांति की कामना की गई।डा. गोविंद कृष्ण पाठक ने कहा कि रामप्रियदास परमहंस ने जीवन पर्यंत धर्म निष्ठा एवं धाम निष्ठा को सर्वोपरि माना। वे त्याग, तपस्या और भक्ति की प्रतिमूर्ति थे। कहा कि संपूर्ण भारतवर्ष से संतों ने वृंदावन की इस पवित्र धरा पर साधना के साथ धर्म व राष्ट्र रक्षा का कार्य किया। मानस प्रवक्ता नंदिनी ने कहा कि आज देश में जो वैचारिक विकृति उत्पन्न हो रही है, उसका मूल कारण तथाकथित आधुनिकता है, जिससे आज की पीढ़ी भ्रमित हो रही है। डा. अजय त्रिपाठी ने कहा कि वृंदावन प्रेम की भूमि है। यदि यह संदेश पूरा विश्व समझे तो कहीं अशांति नहीं रह सकती। इससे पूर्व महंत हरिबोल बाबा महाराज एवं प्रीतमदास महाराज ने ठा. बांकेबिहारी एवं सदगुरुदेव के चित्रपट पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने निर्धनों व असहायों को कंबल भी वितरित किए। इस अवसर पर स्वामी महेशानंद, स्वामी सेवानंद, संजय पांडे, जगदीश शर्मा गुरु, ऋषभदेव पांडे, प्रयागदास, शांतिदास, वृंदावन दास, रामप्रकाश दास, पठारी वाले बाबा आदि थे।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Rampriyadas was a symbol of sacrifice penance and devotion