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19 अक्तूबर, 2020|9:20|IST

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प्रेम की नगरी में शांति बनी रहे : जेड हसन

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शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जेड हसन ने बताया कि वह करीब 55 वर्ष पूर्व देवबंद सहारनपुर से यहां केआर डिग्री कॉलेज में नौकरी करने आए थे। रसखान की नगरी में रहने वाले दोनों समुदायों के बीच प्रेम को देख कर मैंने यहां बसने का मन बना लिया। यहां के मंदिरों, मठों और वनों में प्रेम का वास है।

दोनों ही धार्मिक स्थल अपनी अपनी जगह कायम हैं। मंदिर से भजन कीर्तन और मस्जिद से अजान की आवाज आती है। ऐसा नहीं की एक की आवाज पूर्व और दूसरे की पश्चिम को जाती हो। दोनों ही समुदाय के लोग एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। ठाकुर जी और राधाजी की पोशाकें मुस्लिम कारीगर बनाते हैं। यहां से निकला प्रेम का संदेश पूरे विश्व में गूंजता है। 1968 में दोनों के बीच समझौता हो गया था। विवाद पैदा करने के लिए याचिका डाली गई थी। कुछ भू-भाग मुसलमानों को मस्जिद के लिए दिया गया था। यहां सभी लोग एक साथ और शांति के साथ रहते हैं।

सच्चाई की हुई है जीत : तनवीर

मथुरा। श्रीकृष्ण विराजमान याचिका के खारिज हो जाने के बाद शाही ईदगाह मस्जिद के सचिव तनवीर अहमद ने इसे सच्चाई की जीत बताया है।

उन्होंने बताया कि आधारहीन और तथ्यहीन याचिका का यही हाल होना था। वर्ष 1991 में बने कानून में यह स्पष्ट है कि वर्ष 1947 से पूर्व बने सभी धार्मिक स्थल यथा स्थिति में रहेंगे। कुछ बाहरी लोग यहां की फिजा को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों ही धार्मिक स्थल अपनी अपनी जगह कायम हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान में नियमित पूर्जा अर्चना होती है और मस्जिद में नमाज होती है। यहां दोनों ही समुदाय के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। दोनों ही धार्मिक स्थलों को लेकर स्थानीय तौर पर कोई विवाद नहीं है। यहां के लोग शांति प्रिय हैं। समझौता हो जाने के बाद दोनों ट्रस्टों के बीच कभी भी कोई विवाद उत्पन्न नहीं हुआ। गलत तथ्यों के साथ न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने जो निर्णय दिया है उसका हम स्वागत करते हैं।

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  • Web Title:Peace be in the city of love Jade Hasan