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मोहन स्वरूप भाटिया को मिला पद्मश्री सम्मान

साहित्यकार, पत्रकार और लोककला के लिए समर्पित मोहन स्वरूप भाटिया को मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। उनको यह सम्मान छह दशक के कार्यकाल में ब्रज संस्कृति एवं कलाकारों के उन्नयन को किए गए कार्यों तथा विशेष रूप से 5000 ऐसे ब्रज लोकगीतों के संग्रह को दिया गया है, जो आज विलुप्ति के कगार पर हैं।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गिरधरलाल भाटिया के पुत्र मोहन स्वरूप भाटिया का जन्म 1935 में हुआ। 22 वर्ष की उम्र से उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखे। वह छह दशकों से पत्रकारिता और लेखन कार्य से जुड़े हैं। 1969 में उन्होंने ज्ञानदीप स्कूल की स्थापना की। 1994 में उनको उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का वाइस चेयरमैन चुना गया। लोकगीतों पर उन्होंने सबसे ज्यादा काम किया है। वे पांच हजार ऐसे लोक गीतों का संकलन कर चुके हैं, जो आज विलुप्त होने के कगार पर हैं। मथुरा-वृंदावन आकाशवाणी से भी वे जुड़े रहे। जन्माष्टमी उत्सव सहित कई कार्यक्रमों के सीधे प्रसारण भी उन्होंने किए।

विशाल अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित

ब्रज के लोकनृत्यों, नाट्य विधा के साथ-साथ मोहन स्वरूप भाटिया मंच संचालन को भी जाने जाते हैं। उनके सम्मान में वर्ष 2013 में जमुनाजल संस्थान ने 1800 पृष्ठ का अभिनंदन ग्रंथ भी प्रकाशित किया। उनके द्वारा तमाम नाटक, पुस्तकें और रचनाएं लिखी गई हैं। 83 वर्ष की अवस्था में भी लेखन की उनकी यह यात्रा निरंतर जारी है। मंगलवार को दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने उनको पद्मश्री सम्मान से नवाजा।

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  • Web Title:Padma Shri honored to Mohan Swaroop