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फैमिली प्लानिंग पर सास-बहुओं में खुलकर चर्चा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जनपद में सास-बहू सम्मेलन आयोजित कराए जा रहे हैं। जिले में ये सम्मेलन 31 जुलाई तक चलेंगे। इन सम्मेलनों से न केवल सास व बहू के बीच प्रेम व समन्वय स्थापित होता है, बल्कि बहू को सास के सामने फैमिली प्लानिंग की जानकारी मिल जाती है। इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। बहुओं को नई पहल कर किट भी प्रदान की जा रही हैं।

इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचम) की जिले की डीसीपीएम पारुल शर्मा का कहना है कि इन सम्मेलनों के परिणाम अच्छे सामने आ रहे हैं। इस प्रकार के सम्मेलन का उद्देश्य यही है कि घर में बहू को फैमिली प्लानिंग कैसे करनी है? पारुल बताती हैं कि गांव की आशा अपने पास के स्वास्थ्य उप केंद्र पर दस सास व बहुओं को लाती है। सम्मेलन में आशा के अलावा अन्य स्वास्थ्य कर्मी खासकर महिला स्वास्थ्य कर्मी के सामने बहुओं व सास के मध्य फैमिली प्लानिंग पर खुलकर चर्चा होती है। बहू की तमाम जिज्ञासाएं भी दूर की जाती हैं। सम्मेलन में ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से नई पहल किट बहु को नि:शुल्क प्रदान की जा रही है। जिसमें रूमाल, कंघा, साबुन, श्रृंगार के सामान के अलावा गर्भ निरोधक छाया गोली और निरोध के पैकेट रखे होते हैं। पिछले दिनों बरसाना में ये सम्मेलन हुआ जिसमें नई पहल किट प्रदान की गई।

मथुरा में जनसंख्या घनत्व 2.3

स्वास्थ्य मिशन (एनएचम) की जिले की डीसीपीएम पारुल शर्मा ने बताया कि मथुरा प्रदेश के उन 57 जिलों में शुमार है जहां हर दंपति पर दो से ज्यादा औसत लगभग तीन बच्चे हैं। जनसंख्या के आंकड़ों में जिले का टीएफआर 2.3 है। ये घटा कर 2 टीएफआर करना है। इस आंकड़े का आशय यही है कि हर दंपति पर दो बच्चे से ज्यादा न हों। मथुरा में इसके लिए मिशन परिवार विकास नाम से फैमली प्लानिंग की स्कीम चल रही है।

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