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खाता ना बही, पुलिस जो कहे वो सही

खाता ना बही पुलिस जो कहे वो सही। पुलिस की इस तरह की कार्यप्रणाली का एटीवी के पीछे बनी पुष्प विहार कॉलोनी में रहने वाला जीतू उर्फ जितेन्द्र शिकार हो गया है। वह दुराचार का प्रयास और देह व्यापार अधिनियम के एक मामले में पिछले एक वर्ष से जेल में बंद है। जिस दिन का यह मामला था, उस दिन वह एक दूसरे मामले में जिला कारागार में निरुद्ध था। आश्चर्यजनक बात यह है कि सीओ द्वारा की गई जांच के बाद इसमें आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है, जिसमें उसे आरोपी दिखा दिया गया है। निचली अदालत से उसकी जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है।

कोतवाली पुलिस को धौलीप्याऊ क्षेत्र स्थित एक गेस्टहाउस में देह व्यापार होने की सूचना 20 मई 2018 की रात को मिली थी। पुलिस ने यहां छापा मारकार एक किशोरी के साथ कई लोगों को गिरफ्तार किया था। गोहाटी असम निवासी किशोरी ने इस मामले की रिपोर्ट कोतवाली में अपराध संख्या 675/18 पर दर्ज कराई थी, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें हाईवे थानांतर्गत एटीवी के पीछे पुष्प विहार कॉलोनी निवासी जीतू का नाम भी शामिल था। तत्कालीन सीओ सिटी ने इस मामले की विवेचना की और सभी सात आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया। आरोप पत्र में जीतू उर्फ जितेन्द्र पुत्र राधेश्याम का नाम भी शामिल कर दिया। जबकि जिस दिन पुलिस ने गेस्ट हाउस पर छापा मारा था उससे दो दिन पूर्व यानी 18 मई 2018 को जीतू एक अन्य मामले में पोक्सो कोर्ट में सरेंडर कर जेल जा चुका था। अब सवाल यह पैदा होता है, कि जो व्यक्ति घटना से दो दिन पूर्व जेल चला गया, तो पुलिस ने कैसे उसे देह व्यापार का आरोपी बना दिया। इतना ही नहीं जांच अधिकारी ने उसके खिलाफ आरोप पत्र भी न्यायालय में प्रेषित कर दिया।

जीतू के पिता सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हेडकांस्टेबल राधेश्याम और भाई राकेश ने अरोप लगाया है कि पुलिस ने जीतू को झूठे मामले में फंसाया है। घटना से दो दिन पूर्व वह जेल जा चुका था। उसके बाद भी पुलिस ने उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कैसे कर दिया। जबकि पूर्व के मामले में उसको जमानत मिल चुकी है। इस मामले में कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

इस मामले में किया था सरेंडर

हाईवे थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति की नाबालिग पुत्री को 24 मई 2017 को कुछ नामजद लोग बहला फुसला कर भगा ले गए थे। किशोरी के पिता ने हाईवे थाने में इस ममाले की रिपोर्ट 25 मई 2017 को अपराध संख्या 529/17 पर दर्ज कराई थी, जिसमें जीतू को भी नामजद किया था। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए तभी से दबिश दे रही थी। पुलिस की दबिश के बाद जीतू ने 18 मई 2018 को कोर्ट में सरेंडर किया था।

यह था मामला

गोवाहटी निवासी किशोरी द्वारा कोतवाली पुलिस को दी गई तहरीर में लिखा गया था कि जीतू 20 मई 2018 को उसे दिल्ली से काम दिलाने के बहाने मथुरा लेकर आया था। वह उसे धौलीप्याऊ स्थित गेस्ट हाउस में लेकर पहुंचा। जहां पहले से ही कुछ लोग मौजूद थे। जीतू उनसे सौदेबाजी करने लगा और कुछ देर बाद रुपये लेकर वहां से चला गया था। अब सवाल यह पैदा होता है कि जीतू जिसे दो दिन पहले यानी 18 मई 2018 को अपराध संख्या 529/17 में अदालत द्वारा जेल भेजा जा चुका था तो वह रात को कैसे गेस्ट हाउस पहुंचा और किशोरी का सौदा कर पैसे लेकर वहां से कैसे चला गया? पुलिस ने विवेचना के दौरान इस पर गौर क्यों नहीं किया? कैसे जांच अधिकारी ने जीतू को गेस्ट हाउस कांड का आरोपी मानते हुए उसके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया?

लापता हो चुकी है किशोरी

इस मामले में जिस किशोरी की तहरीर पर मामला दर्ज हुआ था, वह किशोरी लापता हो चुकी है। किशोरी को पुलिस ने नारी निकेतन भेजा था। नारी निकेतन भेजे जाने के कुछ दिन बाद ही वह किशोरी नारी निकेतन से गायब हो गई। बताया गया कि वह नारी निकेतन से भाग गई।

जिस मामले में गया जेल, उसमें मिल चुकी है बेल

किशोरी को बहला फुसला कर भगा ले जाने के जिस मामले में जीतू कोर्ट में सरेंडर कर जेल गया, उसमें उसकी जमानत हो चुकी है। कोतवाली में दर्ज अपराध संख्या 675/18 में जीतू की जमानत अर्जी निचली अदालत से खारिज हो जाने पर जमानत के लिए उसने उच्च न्यायालय में अपील की है।

मामला क्या है, इसे दिखवाया जाएगा और जांच कराई जाएगी। जो भी इसमें दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

-लव कुमार, डीआईजी आगरा परिक्षेत्र।

जीतू नाम का बंदी 18 मई 2018 से जेल में दाखिल है। वह तभी से जेल में है।

-शैलेन्द्र कुमार मैत्रेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक।

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