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पद्मश्री से सम्मानित होंगे मोहन स्वरूप भाटिया

जिले के नामचीन साहित्यकार, पत्रकार और लोककला एवम ब्रज संस्कृति को दशकों से समर्पित मोहन स्वरूप भाटिया को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उनके नाम की दिल्ली में घोषणा हुई। इस पर ब्रजवासियों में हर्ष का माहौल है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गिरिधर लाल भाटिया के पुत्र मोहन स्वरूप भाटिया का जन्म 1935 में मथुरा में हुआ। उन्होंने किशोरी रमण डिग्री कॉलेज से स्नातक किया। 83 वर्षीय भाटिया ने 22 वर्ष की उम्र से ही वर्ष 1957 में पत्रकारिता की शुरुआत की। महादेवी वर्मा और अमृतलाल नागर के काल में उन्होंने लेखन कार्य किया। पिछले छह दशक से अधिक समय से पत्रकारिता और लेखन कार्य से जुड़े हैं। विभिन्न समाचार पत्र में पत्रिकाओं में लेखन कार्य कर चुके हैं। यह सिलसिला इस उम्र में भी अनवरत जारी है।

1969 में उन्होंने ज्ञानदीप शिक्षण संस्थान की स्थापना की। 1994 में उप्र संगीत नाटक एकेडमी के वाइस चेयरमैन रहे। लोकगीतों पर उन्होंने बहुत काम किया है। साइकिल से वे लोकगीतों के संकलन को गांवों में निकल जाते थे। वह 5000 लोकगीतों का संकलन कर चुके हैं। मथुरा आकाशवाणी व दूरदर्शन से भी जुड़े रहे। जन्माष्टमी और होली जैसे अवसरों पर सीधा प्रसारण भी किया। इस समय देहदान के पुनीत कार्य से जुड़े हैं। ब्रज साहित्य और संस्कृति में उनके योगदान को उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया जा रहा है। इसकी जानकारी मिलते ही उन्हें बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। देर रात तक उनके पास फोन आते रहे। हिंदुस्तान से बातचीत में मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि यह ब्रज की संस्कृति का सम्मान है।

रचनाएं

मोहन स्वरूप ने रंगमहल नाटक, हंसते चलिए के अलावा ब्रज साहित्य पर ढेरों किताबें, रचनाएं की हैं।

1800 पृष्ठ का वृहद अभिनंदन ग्रंथ

मोहन स्वरूप भाटिया के सम्मान में वर्ष 2013 में जमुना जल संस्थान ने लगभग 1800 पृष्ठ का अभिनंदन ग्रंथ दो वॉल्यूम में प्रकाशित किया। उन्होंने बताया कि यह ग्रंथ सभी अभिनंदन ग्रंथों से वृहद है।

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  • Web Title:Mohan Swaroop Bhatia will be honored with Padma Shri