प्रजातंत्र में अच्छे प्रतिनिधि लाना जरूरी, यह तभी संभव जब हम अच्छे होंगे : भागवत
Mathura News - संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वृंदावन में कहा कि प्रजातंत्र में अच्छे प्रतिनिधियों के लिए खुद को अच्छा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की आत्मा है और हमें वेदों के अनुसार चलना चाहिए। भागवत ने गो हत्या पर जनभावना को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

वृंदावन, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि हमें प्रजातंत्र में अच्छे प्रतिनिधि लाने के लिए खुद अच्छा बनना होगा। हम अगर बुरे बने रहेंगे तो हमारे प्रतिनिधि भी बुरे ही रहेंगे। हम जितना अच्छा बनेंगे, उतने अच्छे लोग प्रतिनिधि के रूप में आयेंगे। मंगलवार को वंशीवट स्थित मलूक पीठ में आयोजित संत मलूकदास के 552 में जयंती महोत्सव में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अपना प्रजातंत्र है तो अच्छे लोग उसमें आने चाहिये। जो अच्छा है अच्छा ही करेगा। हम अगर बुरे बने रहेंगे तो हमारे प्रतिनिधि बुरे ही रहेंगे। भागवत ने कहा कि भारत वर्ष विश्व की आत्मा है।
भारतवर्ष रहेगा तो विश्व रहेगा। भारत पूर्ण वैभव के साथ होगा तभी विश्व पूर्ण वैभव के साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में हम देखते हैं अपनी आत्मा को विश्व ने खो दिया है। आत्मा तो अमर है, रहेगी लेकिन विश्व ने खो दिया है। तो क्या गति हो रही है, हम देख रहे हैं।वेदों के अनुसार चलकर दिखायेंसंघ प्रमुख ने कहा कि वेदों का शब्दार्थ जानने वाले बहुत होंगे लेकिन वेदों का जो बास्तविक अर्थ है, वह हम जानते हैं तो उसके अनुसार चलकर दिखायें। संतों का अविर्भाव इसीलिए होता है। हम लोग भौतिक दुनिया को जानते हैं, वह बदलती है, नश्वर है लेकिन एक दुनिया है, जिसे अमरत्व प्राप्त है, वह बास्तव में है और वह रहेगी। उसका अभाव कभी नहीं होगा। जो बदलने वाला है, उसका प्रभाव कभी नहीं रहेगा। लेकिन जिस स्तर पर हम लोग हैं, सामान्य लोग हैं, हमें इस दुनिया से पार जाना है, भव सागर पार करना है। कैसे हो पार? इस आभास में से स्मर्ण करना है कि यह तो सपना है, जो चला जाएगा, जो नित्य है, वह नित्य रहेगा। नित्य को ध्यान में रखते हुए अनित्य को पार करना होगा। संत नित्य निरंतर नित्य के संपर्क में रहते हैं।भारत के 142 करोड़ संतत्व को प्राप्त होंगे, ये संभव नहीं है। लेकिन उस दिशा में सतत जीवन जीते रहना, सतत प्रयास करना जरूरी है। छोटी-बड़ी जितनी अच्छाई बनती हैं, वे विश्व के मंगल में कार्य में आने वाली हैं। उसका वर्धन करना, ये हमको करना है। ये जितना होगा, उतना अच्छा है। क्योंकि व्यवस्था से प्रश्नों का हल नहीं होगा। व्यवस्था मानने वाले व्यवस्था को मानते हैं, इससे प्रश्नों का हल होगा।जनभावना दिखने पर बंद होगी गो हत्याभागवत ने कहा कि लोगों ने तय किया, नहीं मानना तो कोई कुछ नहीं कर सकता। पुलिस प्रशासन सब नाकाम हो जाएगा। लोगों का सामर्थय है, समय का सामर्थय है, समाज को आप गो भक्त बनाओ, गो हत्या अपने आप रुक जाएगी। व्यक्ति जो बैठे हैं संस्थान में, उनके मन में तो है डर, उनको करना है, करने में दस बातें आती हैं। उनको (सरकार को) एक साहसी कदम उठाना है, उसके पहले समाज में ये बात नहीं की गई कि भाई हम गाय रखेंगे। शहरों में रख नहीं सकते, जगह नहीं रहती, कई गोशाला रहेंगी उनमें रखेंगे। गोशालाओं की मदद करेंगे। जनभावना खड़ी हो गई तो व्यवस्था को मानना ही होगा। उन्होंने कहा कि 2014 से 19 में राम मंदिर का निर्माण नहीं हुआ लेकिन 2019 से 24 में राम मंदिर का निर्माण हुआ, क्योंकि जन भावना राम मंदिर निर्माण के प्रति पूरे देश में दिखने लगी थी। ऐसे ही जन भावना गो हत्या प्रतिबंध के लिए देश में दिखाई दे, इसके लिए हमें प्रयास करना है। समाज जैसा बनेगा, वैसा ही देश बनेगा। इस भावना के साथ हम सभी को प्रयास करना है। हम तो प्रयास कर ही रहे हैं, संत भी प्रयास कर रहे हैं, आप सबको भी प्रयास करना है। लोगों में करुणा चाहिए, बिना करुणा के धर्म नहीं रहभागवत ने किया गो पूजनमलूकपीठ आश्रम में मंगलवार को सुबह संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संत शिरोमणि मलूकदास महाराज की समाधि पर पूजा अर्चना करने के साथ गो पूजन भी किया। वहीं उन्होंने ब्रज के संतो के साथ भेंट वार्ता करते हुए आध्यात्मिक चर्चा भी की। गीता मनीषी ज्ञानांद महाराज ने उन्हें मलूकदास महाराज के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मलूकदास महाराज दिव्य संत थे। उन्होंने संघ प्रमुख का मलूकपीठ आश्रम में प्रथम बार आगमन पर स्वागत किया ।वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत को मलूकपीठाधीश्वर महंत राजेंद्रदास महाराज ने ठाकुरजी की छवि भेंट की। इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव, पीपाद्वाराचार्य महंत बलराम दास, महंत लाड़िली शरण दास, महंत किशोर दास, महंत राधा माधव दास, महंत गंगा दास आदि उपस्थित थे।
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