बोले मथुरा-सच के आधार पर लड़ें अधिकारों की लड़ाई
Mathura News - महिला कानूनों का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा और राहत प्रदान करना है, लेकिन कई मामलों में इनका दुरुपयोग हो रहा है। मिशन जागृति अभियान के तहत महिलाओं को झूठे मुकदमे दर्ज कराने से रोकने के लिए जागरूक किया जा रहा है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहना आवश्यक है और कानून का सही उपयोग करना चाहिए।

महिला कानून बने तो महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने और उन्हें राहत देने के लिए थे। मगर कई मामलों में इनका दुरुपयोग हो रहा है। ऐसे में कानून की आड़ में झूठे मुकदमे लिखवाने के मामलों को रोकने को अब मिशन जागृति अभियान के तहत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के बाद भी कहीं न कहीं से झूठे मुकदमे लिखवाने के नये मामले सामने आ रहे हैं। घरेलू हिंसा जैसे मामलों के कानून का भी कई बार दुरुपयोग सामने आता रहता है। ऐसा किए जाने की मुख्य वजह अशिक्षा को माना जा रहा है। ऐसे में अब महिलाओं का अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना तो जरूरी है ही।
इसके साथ ही अपने अधिकारों की रक्षा के साथ ही कानून के उपयोग में सच के रास्ते पर चलना भी जरूरी है। ऐसे में किसी को सबक सिखाने जैसी प्रवृत्ति से बचते हुए सच के आधार पर ही अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए। इससे कानूनों की आड़ में दर्ज कराए जा रहे मुकदमों की संख्या में कमी आ सकेगी। कई मामलों में कानून का दुरुपयोग एक बेहद ही गंभीर मुद्दा है, जिस पर हाल के वर्षों में अधिक ध्यान दिया जा रहा है। भारत में महिलाओं के साथ कई परिवारों में अक्सर भेदभाव किया जाता है और उन्हें समान अधिकार और अवसर नहीं दिए जाते, जिससे जीवन के कई पहलुओं में लैंगिक पूर्वाग्रह पनपता है। मगर कानून के दुरुपयोग से यह लैंगिक पूर्वाग्रह और भी बढ़ जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां कानून का दुरुपयोग अपने फायदे के लिए किया जाता है। यह प्रथा न केवल अनैतिक है बल्कि असंवैधानिक भी है। संविधान में कई संशोधन किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाओं के साथ कानून के अनुसार समान व्यवहार किया जाए। महिलाओं को सभी प्रकार के भेदभाव से सुरक्षा एक मौलिक अधिकार माना जाता है। इसके बावजूद, महिलाओं के साथ जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भेदभाव जारी है, जिनमें विवाह, शिक्षा, रोजगार और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। भारत में कई मामलों में कानून का दुरुपयोग मुख्य रूप से घरेलू हिंसा और दहेज से संबंधित मामलों में देखा जाता है और ये कानूनन द्वारा दंडनीय अपराध हैं। हालांकि, कई बार तलाक या संपत्ति विवाद में लाभ प्राप्त करने के लिए अपने पति या ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के मामले भी दर्ज करा दिए जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे मिशन जागृति अभियान के तहत महिला पुलिस द्वारा गांव-गांव जाकर महिलाओं को झूठे मुकदमे दर्ज कराने और झूठे आरोप-प्रत्यारोपों से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है। फिर भी ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान द्वारा बोले मथुरा के तहत आयोजित संवाद में समाज की शिक्षित व कामकाजी महिलाओं ने कहा कि उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना और दोषी को दंडित कराना महिलाओं का अधिकार है। सरकार इसे लेकर गंभीर भी है। वहीं इसके लिए सख्त कानून भी बनाए गए हैं। पंरतु किसी के बहकावे में आकर अपने हित के लिए बनाए कानून की आड़ में किसी को निर्दोष को नहीं फंसाया जाना चाहिए। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि बिना सोचे समझे किसी भी पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर उस पर कार्रवाई करवा दी जाएं। कई मामलों में कानून की आड़ में ब्लैकमेल किए जाने का भी खुलासा हुआ है। पंरतु, अब झूठी शिकायत या झूठी रिपोर्ट लिखवाने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सकती है। प्रदेश की पुलिस भी अब ऐसे मामलों की पूरी पड़ताल कर रही है। महिला कानून हमारी सुरक्षा और सम्मान के लिए बने हैं न कि किसी को डराने या गलत उद्देश्य के लिए। इनका सही उपयोग ही न्याय की शक्ति को बनाए रखता है। सशक्त महिला वही है, जो अधिकारों के साथ जिम्मेदारी को भी समझे। महिलाओं को खुद की समझ से सही निर्णय लेने चाहिए। साथ ही ऐसे कानूनों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। - निधि शर्मा यह जरूरी है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो। साथ ही कानूनी प्रावधानों का गलत इस्तेमाल न हो, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। महिलाओं को चाहिए कि वे सच्चाई के साथ किसी भी समस्या का समाधान न निकालें। वहीं किसी भी विवाद को लेकर ऐसे ही रिपोर्ट न लिखवाई जाए। - रश्मि महिला कानून शक्ति है, हथियार नहीं। इनका सही उपयोग महिलाओं को सुरक्षित और समाज को न्यायपूर्ण बनाता है। इनका गलत प्रयोग नहीं, सही प्रयोग ही सच्चा सशक्तीकरण है। वर्तमान में चाहे घरेलू हिंसा हो या कार्य स्थल पर शोषण जैसे मामले। महिलाओं को अपनी बात रखनी चाहिए। किसी के बहकावे में आकर झूठी रिपोर्ट नहीं लिखवानी चाहिए। - मनीषा जैन महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून जैसे घरेलू हिंसा से संबंधित कानून का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। ये कानून न्याय और सुरक्षा देने के लिए बनाए गए हैं न कि व्यक्तिगत बदले या झूठे आरोपों में किसी को फंसाने के लिए। ऐसे कानूनों का गलत उपयोग करने से वास्तविक पीड़ितों के मामलों की गंभीरता कम होती है। - ममता अग्रवाल सरकार ने महिलाओं को सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा को कानून दिए हैं। इन कानूनों को प्रयोग भी सच्चाई के साथ करना चाहिए। अक्सर देखने में आता है कि कानून की आड़ में झूठी शिकायत और रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है, जो कि गलत है। सच्चाई के साथ अपनी बात रखें और अपने आत्मसम्मान की रक्षा को आगे आएं - नम्रता सिंह कुछ मामलों में अधिकारों का दुरुपयोग, सच्ची पीड़ित महिलाओं की आवाज कमजोर करता है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें इस कानून का प्रयोग कर कई निर्दोषों के खिलाफ कार्रवाई करा दी। महिलाएं अन्य महिलाओं को भी इसके लिए जागरूक करें, ताकि किसी भी निर्दोष को फंसने से बचाया जा सके। - संगीता अग्रवाल

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