DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जिले में रोजाना पांच लाख लीटर दूध उत्पादन, फिर भी संकट

गोपालकों की नगरी में आज भी दूध की कमी नहीं है। यहां दूध का उत्पादन रोजाना पांच लाख लीटर से अधिक हैं, जबकि ऑफ सीजन में भी एक लाख लीटर से अधिक दूध उत्पादित होता है। दूध उत्पादन से जुड़े लोगों का कहना है कि थोड़ा ध्यान दिया जाए तो आज भी यहां दूध-दही की नदियां बहने की कहावत चरितार्थ हो सकती है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में दूध संग्रहित करने के लिए अकेले पराग डेयरी की 209 पंजीकृत समितियां हैं। लेकिन पराग डेयरी का सिस्टम गड़बड़ाने से वर्तमान में मात्र 25 समितियों से ही दुग्ध का संकलन हो रहा है। ये समितियां रोजाना करीब ढाई हजार लीटर दूध पराग को सप्लाई कर रही हैं। पराग की मजबूरी यह है कि उसके पास इससे ज्याद क्षमता का चिलर प्लांट नहीं है। यही वजह है कि ढाई हजार लीटर दूध भी रोजान आगरा भेजना पड़ रहा है। यदि चिलर प्लांट सही हो जाते हैं तो यह क्षमता 30 हजार लीटर तक पहुंच सकती है। आंकड़ों के अनुसार जनपद में साढ़े नौ लाख दुधारू पशु हैं। अकेले रमेश बाबा की गौशाला में 30 हजार गाय हैं। तीन हजार से अधिक दूध डेयरियां संचालित हो रही हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो रोजाना 2 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। वहीं जुलाई व अगस्त में सीजन के समय उत्पादन बढ़कर पांच लाख लीटर तक पहुंच जाता है। दिल्ली हो रही दूध की आपूर्ति जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में करीब तीन हजार दूध की डेयरियां एवं दूधिया हैं। जिले से काफी मात्रा में दूध दिल्ली एवं अन्य बड़े सेंटरों पर सप्लाई हो रहा है। गांवों से सस्ते में दूध खरीदकर ये बड़े सप्लायर ले जाते हैं। इस कारण जनपद में भी दूध की कमी हो रही है। बड़े सेंटरों पर दूध पैक करके इधर से उधर भिजवाया जाता है। इस बार नहीं मिला गोकुल पुरस्कार पराग डेयरी द्वारा प्रतिवर्ष सबसे ज्यादा दूध की सप्लाई करने वाले पशुपालक को गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इसमें 25 हजार रुपये नगद और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। परंतु, इस वर्ष यह पुरस्कार किसी पशुपालक को नहीं दिया गया, जबकि गत वर्ष फरह के नगला विसू के भिक्की को 13 हजार लीटर दूध सप्लाई करने पर यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। कान्हा की नगरी में हो रही दूध में मिलावट मथुरा। हिन्दुस्तान संवाद भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में कभी दूध की नदियां बहा करती थीं, लेकिन वर्तमान में दूध में मिलावट का खेल जारी है। दूधिया दूध में पानी मिला उसमें से क्रीम निकाल रहे हैं। कभी ब्रज भूमि में शुद्ध दूध और दही मिला करता था लेकिन अब स्थिति विपरीत है। मुनाफाखोरी के लिए दूधिया गांवों से दूध निकलवा कर लाते हैं और फिर उसमें दूध के हिसाब से पानी मिला देते हैं। इसके अलावा काफी लोग दूध से क्रीम भी निकलवाते हैं। क्रीम निकला दूध स्वास्थ्य को लाभ नहीं पहुंचाता है। दूध कारोबारियों पर खाद्य विभाग की टेड़ी हुई नजर मथुरा। हिन्दुस्तान संवाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने बुधवार को दूध कारोबारियों पर टेड़ी नजर कर दी। विभिन्न क्षेत्रों से दूध के 10 नमूने भरे गए। एक सैंपल क्रीम का भी लिया गया। एक डेयरी के बिना पंजीकरण संचालन पर चालान किया गया। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीके राठी के निर्देशन में टीम ने कार्रवाई की। शेरगढ़ स्थित मिल्क सेंटर, जघांवली स्थित अकबर मिल्क सेंटर, पैंगांव में भूरा डेयरी से, कृष्णानगर में श्याम डेयरी, अग्रवाल मिष्ठान भंडार मोतीकुंज, मोहन स्वीट सेंटर कृष्णानगर, कामधेनु डेयरी, गोकुल क्षेत्र में मिल्क वेंडर सतीश, सतेन्द्र सिंह एवं महावन में बिजेन्द्र यादव से दूध का एक-एक नमूना लिया गया। भूरा डेयरी पैगांव से क्रीम का नमूना लिया और बगैर पंजीकरण पर चालान भी किया। कार्रवाई से मिलावटखोरों में हड़कंप मचा रहा। कुछ दूधियों ने तो अपने रास्ते बदल लिए। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरविंद कुमार, ओपी सिंह, शैलेन्द्र रावत, नंद किशोर, मुकेश कुमार, सविता शर्मा, मनीषा शर्मा के अलावा ताराचन्द्र आदि शामिल थे। 57 नमूने भरे, 23 में मिली मिलावट खाद्य सुरक्षा विभाग ने गत वर्ष अभियान चलाकर विभिन्न क्षेत्रों से दूध के 57 नमूने भरे। मिलावटी दूध में 23 के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर कराया गया। न्यायालय ने 20 मामलों में निर्णय सुनाया और मिलावटखोरों पर 3 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना किया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Milk production in five lakh liters daily, yet crisis in mathura