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23 अक्तूबर, 2020|8:58|IST

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मथुरा के ‘श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका सिविल कोर्ट में खारिज

मथुरा के ‘श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका सिविल कोर्ट में खारिज

1 / 2श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर दायर याचिका सिविल जज सीनियर डिवीजन लिंक कोर्ट एडीजे एफटीसी (द्वितीय) छाया शर्मा ने खारिज कर दी। उन्होंने इसके पीछे पर्याप्त आधार न होने की बात कही। वहीं श्रीकृष्ण विराजमान...

मथुरा के ‘श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका सिविल कोर्ट में खारिज

2 / 2श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर दायर याचिका सिविल जज सीनियर डिवीजन लिंक कोर्ट एडीजे एफटीसी (द्वितीय) छाया शर्मा ने खारिज कर दी। उन्होंने इसके पीछे पर्याप्त आधार न होने की बात कही। वहीं श्रीकृष्ण विराजमान...

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श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर दायर याचिका सिविल जज सीनियर डिवीजन लिंक कोर्ट एडीजे एफटीसी (द्वितीय) छाया शर्मा ने खारिज कर दी। उन्होंने इसके पीछे पर्याप्त आधार न होने की बात कही। वहीं श्रीकृष्ण विराजमान के वकील विष्णुशंकर जैन का कहना है कि वे अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

बता दें कि श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट हरिशंकर जैन और विष्णुशंकर जैन द्वारा दायर याचिका में मुख्यतः 1968 में कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और ईदगाह ट्रस्ट के मध्य हुए समझौते को रद करने, ईदगाह को हटाए जाने और 13.37 एकड़ जगह का मालिकाना हक श्रीकृष्ण विराजमान के नाम करने की बात कही गई थी। 26 सितंबर को दायर 57 पेज के इस दावे में श्री कृष्ण विराजमान के अलावा रंजना अग्निहोत्री, प्रवेश कुमार, राजेश मणि त्रिपाठी, तरुणेश कुमार शुक्ला, शिवाजी सिंह, त्रिपुरारी तिवारी भक्त वादी थे। याचिका में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, कमेटी ऑफ मेनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को पार्टी बनाया गया था। ये याचिका सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दायर की गई थी। सिविल जज सीनियर डिवीजन के अवकाश पर होने के कारण लिंक कोर्ट एडीजे एफटीसी द्वितीय छया शर्मा की कोर्ट में इसकी सुनवायी हुई।

उच्च न्यायालय में देंगे चुनौती

याचिका के खारिज हो जाने के बाद याचिकाकर्ता के वकील विष्णु जैन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम लोग इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।

संकल्प अमर रहने के दावे को रखा था नजीर

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के रामलला फैसले के पैरा 117 में ‘संकल्प अमर रहने का उल्लेख किया है। याचिका के 57 पेज के दावे में बतौर नजीर रखा गया था। अयोध्या के अनुभव का लाभ श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामले में उठाने के लिए इतिहास, संस्कृति का समग्र अध्ययन किया गया है। कोर्ट में सुनवाई होने पर सभी साक्ष्यों को रखा जाएगा।

करीब 20 मिनट चली सुनवाई

बुधवार दोपहर करीब 2.35 बजे अदालत ने इस पर सुनवायी शुरू की। 20 मिनट चली सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील हरिशंकर जैन और विष्णुशंकर जैन द्वारा याचिका दायर करने के आधार रखे। उनका पक्ष जानने के बाद जज ने फैसला सुरक्षित रख लिया। शाम करीब 5:15 बजे एडीजे एफटीसी द्वितीय छाया शर्मा ने अपना निर्णय सुनाते हुए याचिका को आधारहीन होने का हवाला देते हुए खारिज कर दिया।

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  • Web Title:Mathura 39 s 39 Sri Krishna Virajman 39 s petition dismissed in civil court