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भगवान गोदारंगमन्नार ने स्वर्ण जड़ित पूर्णकोठी में दिए दर्शन

हिन्दुस्तान टीम,मथुराNewswrap
Tue, 06 Mar 2018 07:27 PM
भगवान गोदारंगमन्नार ने स्वर्ण जड़ित पूर्णकोठी में दिए दर्शन

रंगजी मंदिर में दक्षिण भारतीय धर्म परंपराओं के अनुसार मंगलवार को ब्रह्मोत्सव (रथ का मेला) का शुभांरभ हुआ। पहले दिन भगवान गोदारंगमन्नार ने स्वर्णजड़ित पूर्ण कोठी विमान में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। शाम को सिंह की सवारी पर पुन: दर्शन दिए।

उत्तर एवं दक्षिण भारतीय धर्म परंपराओं का अदभुत संगम देखने को मिला। मंगलवार को रंग मंदिर में प्रात: दर्जनों आचार्यगणों ने वेदमंत्रोंच्चारों के मध्य भगवान गोदारंगमन्नार का पंचामृत से अभिषेक किया। इसके बाद भगवान को दक्षिण भारतीय शैली में सस्वर धर्म ग्रंथों का पाठन तुरई की धुनों के साथ स्वर्ण जड़ित पूर्णकोठी विमान पर विराजमान किया गया। प्रभु की सवारी रंगजी मंदिर से चुंगी चौराहा होकर रंगजी का बगीचा पहुंची। भक्तों में प्रभु की एक छवि पाने की होड़ मच गई। मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने सवारी का स्पर्श कर पुण्यलाभ अर्जित किया। स्थानीय एवं दक्षिण भारत से आए भक्तों ने आराध्य के स्वागत में सवारी के मार्ग पर जगह-जगह रंग-बिरंगी रंगोली सजाई और उत्सव मनाया। शाम को सिंह वाहन पर पुन: भगवान गोदारंगमन्नार ने दर्शन दिए।

नौ दिन तक देंगे दर्शन

मंदिर के प्रबंधक राजकुमार सूद ने इन सवारियों का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान का सबकुछ दिव्य होता है। उनका विमान भी दिव्य ही है। विद्युत के समान भास्कर वर्ण माना जाता है। भगवान स्वर्ण विमान पर पधारते हैं। भक्त भगवान के दर्शन कर पूर्ण मनोरथ प्राप्त करते हैं। इसलिए इसे पूर्णकोठी कहा जाता है। ब्रह्मोत्सव को ही रथ का मेला कहा जाता है। नौ दिन तक सुबह और शाम प्रभु नित नई पारंपरिक सवारी पर भक्तों को दर्शन देंगे।

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