रात से सुबह तक हुआ होलिका दहन
मथुरा में होलिका दहन की परंपरा इस बार चन्द्र ग्रहण के कारण अलग रही। भक्तों ने होलिका का पूजन किया और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। हालांकि, ग्रहण के सूतक के चलते होली के रंग-गुलाल का खेल नहीं हुआ। बाजारों में सामान्य माहौल बना रहा और लोग खरीदारी करते दिखे।

मथुरा, होलिका की धधकती आग से भक्त प्रहलाद के सकुशल बच निकलने के पौराणिक घटनाक्रम से जुड़ा होलिका दहन बीती रात अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय पर हुआ। इससे पूर्व लोगों ने देर रात तक परिवार के साथ होलिका का पूजन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रही। कई जगह सुबह तक होलिका दहन किया गया। परंतु, चन्द्र ग्रहण के चलते होलिका दहन के बाद रंग-गुलाल की होली नहीं हुई। महानगर में होलिका दहन के लिए करीब 600 स्थानों पर होलिका स्थापित की गयी थीं। सोमवार को लोगों ने परिवार सहित होलिका का पूजन किया। होलिका दहन स्थलों पर लकड़ियों, कण्डों, होली, प्रहलाद, भगवान प्रतिमाएं पूजी गईं।
जगह-जगह मिलनोत्सवों में मस्ती धमाल किया गया। मुहूर्त के अनुसार घर की तथा सार्वजनिक स्थल पर पहुंचकर होलिका का पूजन किया। भक्तों ने होलिका की परिक्रमा लगाईं। सार्वजनिक होली से जो की बाली भूनी और वहां से आग लेकर घरों में रखीं होली प्रज्ज्वलित कीं। होलिका दहन का सिलसिला रात्रि 9 बजे से शुरु हो गया था। पुराने शहर के होली गेट से छत्ता बाजार, चौक बाजार, गऊ घाट, लाल दरवाजा, मंडीरामदास, बंगाली घाट व विश्राम घाट आदि क्षेत्रों में घरों में रखी गोबर की गुलरी की होलिका दहन रात 9 बजे से शुरु हो गया था। कुछ लोगों ने 10 बजे से रात 12 बजे बीच होलिका दहन किया। सार्वजनिक स्थलों पर भी दहन का यही सिलसिला चला। होली गेट पर रात्रि एक बजे होलिका दहन किया गया। इसके साथ ही जनरल गंज, जवाहर हाट, क्वालिटी चौराहा, पुराना बस स्टैंड, डेंपियर नगर, भरतपुर गेट, कोतवाली रोड, मसानी, सौंख अड्डा, नया बस स्टैंड, भूतेश्वर चौराहा, कृष्णानगर आदि स्थानों पर होलिका दहन हुआ। द्वारिकाधीश मंदिर में हुआ होलिका दहन पुष्टिमार्ग संप्रदाय के मंदिर ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में मंगलवार की सुबह करीब छह बजे होलिका दहन हुआ। यहां भक्तों ने होलिका दहन देखने के उपरांत ठाकुरजी के दर्शन किए। मंदिर में अबीर-गुलाल से होली भी खेली। --- होलिका दहन के बाद खुले बाजार, नहीं खेली होली मथुरा। चन्द्र ग्रहण की वजह से इस बार होलिका दहन के बाद नजारा बिल्कुल अलग रहा। सोमवार सुबह तक होलिका दहन के बाद महानगर में कहीं भी रंग की होली नजर नहीं आयी। ग्रहण के सूतक लगने की वजह से बाजारों में माहौल सामान्य रहा। मंगलवार को रोजाना की तरह बाजारों में दुकानें खुलीं। लोगों खरीददारी और रोजमर्रा के काम के लिए घरों से निकले। मंदिर क्षेत्रों को छोड़कर कहीं भी अबीर-गुलाल का खेल नहीं दिखा। महानगर के होली गेट, छत्ता बाजार, चौक बाजार, गोविंद गंज, कोतवाली रोड, भरतपुर गेट, आर्य समाज रोड, विकास बाजार, डेंपियर नगर, कृष्णा नगर, महोली रोड, धौलीप्याऊ, यमुनापार लक्ष्मी नगर हर जगह बाजारों में भीड़ रही। सूतक लगने की वजह से बच्चों ने भी होली नहीं खेली। ग्रहणकाल को देखते हुए हर किसी ने एक दिन बाद बुधवार को रंगों की होली खेलने का मन बना लिया था। इसके चलते माहौल सामान्य रहा।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


