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उच्च न्यायालय के आदेश हुए हवा

थाना क्षेत्र की चौकी शाहपुर के अंतर्गत आने वाले गांव शाहपुर में बिहारी जी मंदिर की जमीन को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी तहसील प्रशासन ने न तो अभी...

उच्च न्यायालय के आदेश हुए हवा
हिन्दुस्तान टीम,मथुराSun, 03 Dec 2023 08:40 PM
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थाना क्षेत्र की चौकी शाहपुर के अंतर्गत आने वाले गांव शाहपुर में बिहारी जी मंदिर की जमीन को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी तहसील प्रशासन ने न तो अभी विवादित स्थल से मजार को हटवाया है और न ही उक्त जमीन को मंदिर के नाम दर्ज किया है, जिसको लेकर हिन्दूवादी संगठनों में भारी आक्रोश है। लेकिन शासन प्रशासन इस बड़े प्रकरण से बेखबर हैं। थाना क्षेत्र की चौकी शाहपुर के अंतर्गत आने वाले गांव शाहपुर में सपा शासन काल के दौरान विहारी मंदिर की जमीन को तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं तहसील प्रशासन ने मिली भगत कर कब्रिस्तान में दर्ज कर दिया गया था। समुदाय विशेष के लोगों ने विहारी जी मंदिर के गर्भग्रह के ऊपर मजार का निर्माण कर दिया था, जिसको लेकर बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रामावतार गुर्जर ने थाना कोसीकला में भोला खान पठान सहित अन्य ग्रामीण एवं तत्कालीन एसडीएम लेखपाल तहसीलदार नायब तहसीलदार कानून गो लेखपाल सहित 24 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन थाना पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं थी जिसके चलते ट्रस्ट के अध्यक्ष ने वर्ष 2022 में न्यायालय की शरण ली। न्यायालय में चली लंबी सुनवायी के दौरान ट्रस्ट की याचिका को सही मानते हुए 15 सितम्वर को कोर्ट के समक्ष पेश हुए एसडीम एवं तहसीलदार को एक माह के अंदर उक्त भूमि को मंदिर में दर्ज करने के आदेश दिए थे, वहीं षड्यंत्र रचने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाये जाने की बात कही थी। ढाई माह बाद भी उक्त विवादित जमीन से न तो अभी मजार को हटवाया गया है और न ही षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में लायी गयी है, जिसको लेकर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता रामावतार गुर्जर ने कई बार एसडीएम, डीएम आदि अन्य अधिकारियों से लिखित शिकायत की है। परंतु, अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई हैं। इसे लेकर हिन्दूवादी संगठनों से जुड़े लोगों में भारी रोष है, जो कभी भी आन्दोलन का रूप धारण कर सकता है। इस मामले में तहसीलदार मनोज वार्ष्णेय से बात की तो उन्होंने कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया। ट्रस्ट के अध्यक्ष रामावतार गुर्जर ने बताया कि 15 दिसंबर के बाद उच्च न्यायालय में कन्टेम्पट की कार्यवाही की जाएगी।

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