Hema defeated opponent by huge margin in Mathura - हेमामालिनी ने 2 लाख 93 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की DA Image

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हेमामालिनी ने 2 लाख 93 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की

मथुरा लोकसभा सामान्य निर्वाचन 2019 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्धंदी रालोद गठबंधन प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह को 2,93471 वोटों के बड़े अंतर से हराया। हेमामालिनी को 671293 वोट और नरेंद्र सिंह को 377822 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी महेश पाठक तीसरे नंबर पर रहे। इन्हें 28084 वोट मिले थे।

किस प्रत्याशी को कितने मिले वोट-

1-कुंवर नरेंद्र सिंह - 3,77,822

2-महेश पाठक - 28084

3-हेमामालिनी - 671293

4-ओमप्रकाश - 5095

5-छत्तर सिंह - 794

6-जगवीर सिंह - 470

7-जसवंत सिंह - 1245

8-जसवीर सिंह - 1630

9-दिनेश गौतम - 2363

10-रामदेव गौतम - 1261

11-प्रमोद कृष्ण - 1490

12-फक्कड़ बाबा - 4086

13-रामदास त्यागी - 1298

नोटा - 5800

कुल वोटिंग- 1104325

हेमामालिनी की जीत का अंतर

2,93,471 वोट

वोट प्रतिशत बढ़ने पर भी हारी रालोद

लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ने के बाद भी भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी अपनी पिछली जीत का आंकड़ा पार नहीं कर सकीं। हां यह बात अलग है कि उनको इस बार के समीकरण को देखते हुए उम्मीद से अधिक वोट हासिल हुए। गठबंधन प्रत्याशी को वोट प्रतिशत में 12 फीसद की बढ़ोत्तरी के बाद भी 2 लाख 88 हजार 119 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।

बता दें कि 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मथुरा सीट से पहली बार किस्मत आजमने की वजह से ड्रीम गर्ल हेमामालिनी का जादू सिर चढ़कर बोला था। यही वजह रही कि इस सीट पर तब हेमामालिनी ने रालोद के युवराज जयंत चौधरी को पराजित किया था। उस समय भाजपा को 53.29 प्रतिशत वोट मिले थे। इस प्रतिशत पर हेमामालिनी 3.25 लाख से अधिक वोटों से चुनाव जीती थीं। इस चुनाव में रालोद का कुल वोट प्रतिशत 22.62 था। लेकिन, इस बार रालोद प्रत्याशी के रूप में कुं. नरेन्द्र सिंह को 34.52 प्रतिशत वोट मिले। यानी की रालोद के वोट प्रतिशत में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई, लेकिन फिर भी उसे जीत नसीब नहीं हो सकी।

इधर, भाजपा को भी इस बार 60.99 प्रतिशत वोट मिले, यानी की उसके वोट बैंक में भी 7.70 फीसदी का इजाफा हुआ। इसके बाद भी वे 2014 के चुनाव में मिली 3.25 लाख से अधिक वोटों की जीत का आंकड़ा नहीं छू सकी। कांग्रेस का वोट प्रतिशत इस बार बिल्कुल धराशायी हो गया, जबकि 2009 के चुनाव में उसका वोट प्रतिशत 55 के आसपास था। इस बार कांग्रेस को मात्र 2.32 प्रतिशत वोट ही हासिल हो सके।

मोदी लहर ने दूसरी बार उम्मीदों पर फेरा पानी

गठबंधन प्रत्याशी के रूप में राष्ट्रीय लोकदल से अपनी किस्मत आजमाने वाले कुं. नरेन्द्र सिंह को इस बार भाजपा का सबसे सशक्त प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा था। यही वजह थी कि गठबंधन ने उनको चुनाव मैदान में उतारा। लेकिन, मोदी लहर के आगे गठबंधन का गणित फेल हो गया।

बता दें कि इससे पूर्व भी 2017 में कुं. नरेन्द्र सिंह ने गोवर्धन विधानसभा सीट से रालोद प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाई थी। तब हर किसी का यही आकलन था कि गोवर्धन सीट पर रालोद व बसपा के बीच मुकाबला है। भाजपा को लोग तीसरे नंबर पर आंक कर चल रहे थे। लेकिन, मोदी लहर के चलते यह चुनाव वे हार गए और भाजपा प्रत्याशी कारिंदा सिंह को जीत मिली। इस बार लोकसभा सीट पर मोदी लहर के बीच उनको हर कोई हेमामालिनी के आगे सबसे सशक्त प्रत्याशी मानकर चल रहा था। यही वजह थी कि गठबंधन ने उन पर भरोसा जताया और रालोद की टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा।

यहां यह भी गौरतलब है कि टिकट मिलते ही उनके बड़े भाई व पूर्व सांसद कुं. मानवेन्द्र सिंह अचानक भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट मांगे। हालांकि, कु. नरेन्द्र सिंह की संघर्षशील व मिलनसार छवि ने उनको मुख्य मुकाबले में रखा। लेकिन, गुरुवार को जब मतगणना शुरू हुई उनके समर्थकों के सारे अरमान और उम्मीदों पर पानी फिर गया।

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